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भुजंगासन रोज़ करें: कमर दर्द, तनाव और कब्ज़ से राहत, रीढ़ को मिलेगी नई मज़बूती

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भुजंगासन रोज़ करें: कमर दर्द, तनाव और कब्ज़ से राहत, रीढ़ को मिलेगी नई मज़बूती

सारांश

भुजंगासन सिर्फ एक आसन नहीं — यह कमर दर्द, तनाव, कब्ज़ और साइटिका के लिए एक बिना लागत का समाधान है। आयुष मंत्रालय भी इसे पीठ की मांसपेशियों और रीढ़ को मज़बूत बनाने में कारगर मानता है। सूर्य नमस्कार के आठवें आसन को दिनचर्या में शामिल कर हर उम्र के लोग बेहतर स्वास्थ्य पा सकते हैं।

मुख्य बातें

भुजंगासन (कोबरा पोज़) सूर्य नमस्कार के 12 आसनों में आठवें स्थान पर है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन पीठ की मांसपेशियों को मज़बूत और रीढ़ को लचीला बनाता है।
नियमित अभ्यास से कमर दर्द , साइटिका , तनाव और कब्ज़ में राहत मिल सकती है।
बेहतर रक्त संचार के कारण त्वचा में निखार और चेहरे पर चमक आती है।
तीव्र पीठ दर्द , हालिया सर्जरी , रीढ़ की गंभीर समस्या या मासिक धर्म के दौरान यह आसन न करें।

भुजंगासन — जिसे कोबरा पोज़ या सर्पासन भी कहा जाता है — नियमित योग अभ्यास में शामिल उन आसनों में से एक है जो रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने, कमर दर्द घटाने और तनाव कम करने में सहायक माने जाते हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन पीठ की मांसपेशियों को मज़बूत करने में काफी उपयोगी है। योग विशेषज्ञों का कहना है कि इस एक आसन के नियमित अभ्यास से शरीर और मन दोनों को एक साथ लाभ मिलता है।

भुजंगासन क्या है और इसका नाम क्यों पड़ा

संस्कृत में 'भुजंग' का अर्थ है सांप और 'आसन' का अर्थ है मुद्रा। इस आसन में शरीर की आकृति फन फैलाए हुए कोबरा के समान बनती है, इसीलिए इसे भुजंगासन कहा जाता है। यह सूर्य नमस्कार के 12 आसनों में आठवें स्थान पर आता है और शुरुआती से लेकर अनुभवी योगाभ्यासी — सभी के लिए उपयुक्त माना जाता है।

मुख्य स्वास्थ्य लाभ

आयुष मंत्रालय के अनुसार, भुजंगासन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मज़बूत होती है और शरीर में लचीलापन बढ़ता है। यह आसन पेट की अतिरिक्त चर्बी को कम करने और कब्ज़ जैसी पाचन समस्याओं को दूर करने में सहायक हो सकता है। इसके अलावा, पीठ दर्द, साइटिका और श्वसन तंत्र से जुड़ी दिक्कतों में भी राहत मिलती है।

इस आसन से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है, जिसके फलस्वरूप त्वचा में निखार आता है और चेहरे पर प्राकृतिक चमक बनी रहती है। योग विशेषज्ञों का मानना है कि भुजंगासन शरीर में ऊर्जा और ताज़गी बनाए रखने में भी कारगर है।

किन्हें नहीं करना चाहिए यह आसन

हालाँकि यह आसन अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है, फिर भी कुछ स्थितियों में इसे करने से परहेज़ करने की सलाह दी जाती है। तीव्र पीठ दर्द, हाल ही में हुई सर्जरी, रीढ़ की गंभीर समस्या या मासिक धर्म के दौरान इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य स्थिति में योग शुरू करने से पहले चिकित्सक से परामर्श लेना उचित रहता है।

आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में प्रासंगिक है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्टें बताती हैं कि भारत में कमर दर्द और तनाव-संबंधी विकार तेज़ी से बढ़ रहे हैं — विशेष रूप से कार्यालय में लंबे समय तक बैठने वाले लोगों में। भुजंगासन जैसे सरल आसनों को दैनिक दिनचर्या में शामिल करना एक कम लागत, बिना उपकरण वाला उपाय हो सकता है। गौरतलब है कि आयुष मंत्रालय लंबे समय से इस आसन को अपने सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में शामिल करता आया है।

आगे चलकर, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि भुजंगासन को प्राणायाम और ध्यान के साथ मिलाकर करने पर इसके लाभ और अधिक गहरे हो सकते हैं। नियमित अभ्यास से दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करना संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल शायद ही पूछा जाता है कि भारत में कमर दर्द और तनाव-संबंधी विकार इतने व्यापक क्यों हो रहे हैं। कार्यालय-केंद्रित जीवनशैली और स्क्रीन के सामने बिताए लंबे घंटे एक संरचनात्मक समस्या हैं, जिसे सिर्फ एक आसन से हल नहीं किया जा सकता। आयुष मंत्रालय का प्रचार सराहनीय है, लेकिन योग को सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में शामिल करने के लिए व्यापक कार्यस्थल दिशानिर्देश और स्कूल-स्तरीय योग शिक्षा की भी ज़रूरत है — केवल डिजिटल जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भुजंगासन क्या है और इसे कोबरा पोज़ क्यों कहते हैं?
भुजंगासन एक योग मुद्रा है जिसमें शरीर की आकृति फन फैलाए हुए कोबरा सांप जैसी बनती है, इसीलिए इसे कोबरा पोज़ या सर्पासन भी कहते हैं। यह सूर्य नमस्कार के 12 आसनों में आठवें स्थान पर है।
भुजंगासन के मुख्य फायदे क्या हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, भुजंगासन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मज़बूत होती है और शरीर में लचीलापन बढ़ता है। यह कमर दर्द, साइटिका, तनाव, कब्ज़ और श्वसन संबंधी समस्याओं में राहत दिला सकता है, साथ ही रक्त संचार बेहतर होने से त्वचा में भी निखार आता है।
भुजंगासन किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
तीव्र पीठ दर्द, हाल ही में हुई सर्जरी, रीढ़ की गंभीर समस्या या मासिक धर्म के दौरान इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य स्थिति में योग शुरू करने से पहले चिकित्सक से परामर्श लेना उचित रहता है।
भुजंगासन को रोज़ाना कितनी देर करना चाहिए?
स्रोत में अभ्यास की अवधि का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। सामान्यतः योग विशेषज्ञ शुरुआत में 15-30 सेकंड से शुरू करने और धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाने की सलाह देते हैं, लेकिन व्यक्तिगत सलाह के लिए किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक से मार्गदर्शन लें।
क्या भुजंगासन सूर्य नमस्कार का हिस्सा है?
हाँ, भुजंगासन सूर्य नमस्कार के 12 आसनों में से आठवाँ आसन है। इसे सूर्य नमस्कार के अभ्यास के साथ-साथ अलग से भी किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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