भुजंगासन रोज़ करें: कमर दर्द, तनाव और कब्ज़ से राहत, रीढ़ बनेगी मज़बूत
सारांश
मुख्य बातें
भुजंगासन — जिसे कोबरा पोज़ या सर्पासन भी कहा जाता है — उन योगासनों में शामिल है जिन्हें आयुष मंत्रालय पीठ की मांसपेशियों को मज़बूत बनाने के लिए विशेष रूप से उपयोगी मानता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी में लचीलापन लाता है, तनाव घटाता है और पाचन तंत्र को दुरुस्त करने में सहायक हो सकता है। 12 सितंबर 2026 को स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस आसन का नियमित अभ्यास हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद बताया गया है।
भुजंगासन क्या है और यह नाम कैसे पड़ा
'भुजंग' का अर्थ है सांप और 'आसन' का अर्थ है मुद्रा। इस आसन में शरीर की आकृति फन फैलाए सांप के समान बनती है, इसीलिए इसे भुजंगासन या कोबरा पोज़ कहा जाता है। यह सूर्य नमस्कार के 12 आसनों में आठवें स्थान पर है, जो इसकी योग-परंपरा में केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करता है।
गौरतलब है कि यह आसन दिखने में सरल लगता है, लेकिन इसके शारीरिक और मानसिक लाभ व्यापक बताए जाते हैं। यही कारण है कि योग प्रशिक्षक इसे शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए भी उपयुक्त मानते हैं।
भुजंगासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ
आयुष मंत्रालय के अनुसार, भुजंगासन के नियमित अभ्यास से निम्नलिखित लाभ मिल सकते हैं:
रीढ़ और पीठ: रीढ़ की हड्डी मज़बूत होती है और पीठ की मांसपेशियाँ सक्रिय होती हैं, जिससे कमर दर्द और साइटिका जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। यह आसन पीठ के निचले हिस्से की अकड़न को दूर करने में भी सहायक माना जाता है।
तनाव और मानसिक स्वास्थ्य: इस आसन के अभ्यास से तनाव का स्तर घटता है और मन में एकाग्रता बढ़ती है। शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होने से ताज़गी और ऊर्जा का संचार होता है।
पाचन और वज़न: भुजंगासन पेट की मांसपेशियों पर दबाव डालता है, जिससे कब्ज़ जैसी पाचन समस्याओं में सुधार हो सकता है। साथ ही यह पेट की अतिरिक्त चर्बी कम करने में भी मददगार बताया जाता है।
त्वचा और श्वसन: बेहतर रक्त संचार से त्वचा में निखार आता है और चेहरे पर चमक बढ़ती है। श्वसन तंत्र से जुड़ी दिक्कतों में भी यह आसन राहत प्रदान कर सकता है।
सावधानियाँ और किसे नहीं करना चाहिए
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में यह आसन करने से बचना चाहिए। पीठ दर्द की गंभीर स्थिति, हाल में हुई कोई सर्जरी, रीढ़ की गंभीर समस्या या मासिक धर्म के दौरान भुजंगासन का अभ्यास उचित नहीं माना जाता।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब शहरी जीवनशैली के कारण कमर दर्द और तनाव की शिकायतें तेज़ी से बढ़ रही हैं। किसी भी नए योगाभ्यास को शुरू करने से पहले योग-प्रशिक्षक या चिकित्सक से परामर्श लेना अनिवार्य है।
कैसे करें सही अभ्यास
भुजंगासन करने के लिए पेट के बल लेटें, हथेलियाँ कंधों के नीचे रखें और साँस लेते हुए धीरे-धीरे ऊपरी शरीर को उठाएँ — ठीक वैसे जैसे सांप फन उठाता है। कमर पर अनावश्यक दबाव न डालें और कोहनियाँ हल्की मुड़ी रहने दें। 15 से 30 सेकंड तक इस स्थिति में रहें और फिर धीरे-धीरे वापस लौटें।
नियमित अभ्यास और सही मार्गदर्शन के साथ, भुजंगासन एक संपूर्ण स्वास्थ्य-दिनचर्या का प्रभावी हिस्सा बन सकता है।