बाबा रामदेव के बयान पर संतों का समर्थन: 'भारत के मुसलमानों के पूर्वज हिंदू थे'
सारांश
मुख्य बातें
योग गुरु बाबा रामदेव के इस बयान — कि 'भारत में सभी मुसलमान कन्वर्टेड हैं' — पर हरिद्वार से धार्मिक जगत की प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। 1 अक्टूबर 2026 को महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने इस बयान को सत्य बताते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान में रहने वाले मुस्लिम समाज के लोग मूल रूप से हिंदू समाज से ही धर्मांतरित हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद साक्षी महाराज ने भी इसी मत का समर्थन किया।
महामंडलेश्वर का पक्ष
महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने कहा कि ऐतिहासिक परिस्थितियों में लोगों को बहला-फुसलाकर, दबाव या भय के कारण धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी जैसे कुछ मुस्लिम नेता अपने समुदाय को गुमराह करने का काम करते हैं और उनके पास विकास या सामाजिक हित से जुड़े कोई ठोस मुद्दे नहीं हैं।
महामंडलेश्वर ने कहा कि मुस्लिम समाज अब पहले की तुलना में अधिक शिक्षित और जागरूक हो रहा है और ऐसे नेताओं को स्वीकार्यता नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा, 'सनातन का उद्देश्य सभी संतों का सम्मान, सामाजिकता, इंसानियत और मानवता को बढ़ावा देना है।'
भाजपा सांसद साक्षी महाराज का बयान
भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि भारत का मुस्लिम समाज मक्का, मदीना या अरब से आकर यहाँ नहीं बसा है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से यह बात कहते रहे हैं कि भारत में रहने वाले मुस्लिम समाज के लोग हिंदू समाज से धर्मांतरित हुए हैं।
साक्षी महाराज ने कहा कि इतिहास में अलग-अलग परिस्थितियों में — तलवार, भय, आतंक या मृत्यु के डर के कारण — लोगों ने धर्म परिवर्तन किया, लेकिन आज ऐसी परिस्थितियाँ नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समय के साथ लोगों को अपने पूर्वजों के बारे में समझ आएगी और 'घर वापसी' की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है।
विवाद का पृष्ठभूमि संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब धर्मांतरण और 'घर वापसी' जैसे विषय राजनीतिक रूप से संवेदनशील बने हुए हैं। गौरतलब है कि इस तरह के बयान पहले भी सामाजिक और राजनीतिक विवाद का केंद्र रहे हैं। इतिहासकारों और समाजशास्त्रियों के बीच भारतीय मुसलमानों की ऐतिहासिक जड़ों को लेकर जटिल और विविध मत प्रचलित हैं, और इस विषय पर कोई एकमत नहीं है।
आगे की स्थिति
इन बयानों पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों से प्रतिक्रियाएँ आने की संभावना है। हरिद्वार से उठी यह धार्मिक आवाज़ राष्ट्रीय विमर्श में एक नई बहस को जन्म दे सकती है। फ़िलहाल किसी विपक्षी दल या मुस्लिम संगठन की औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।