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बाबा रामदेव के बयान पर संतों की मुहर, जूना अखाड़ा महंत ने किया समर्थन; सद्भाव की अपील

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बाबा रामदेव के बयान पर संतों की मुहर, जूना अखाड़ा महंत ने किया समर्थन; सद्भाव की अपील

सारांश

बाबा रामदेव के भारतीय मुसलमानों के धर्मांतरण संबंधी बयान को लखनऊ में कई संतों ने सही ठहराया। जूना अखाड़ा महंत डॉ. योगानंद गिरि ने समर्थन के साथ सांप्रदायिक सद्भाव की अपील की, जबकि ओवैसी पर भाईचारा बिगाड़ने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के महंत डॉ.
योगानंद गिरि महाराज ने बाबा रामदेव के मुसलमानों के धर्मांतरण संबंधी बयान का समर्थन किया।
महंत ने कहा कि भारत के सभी मुसलमानों के पूर्वज हिंदू थे और मुगल उत्पीड़न के भय से धर्म परिवर्तन हुआ।
जगद्गुरु परमहंस आचार्य और जगद्गुरु राम दिनेश आचार्य ने भी रामदेव के बयान को 'सत्य' और 'तर्कसंगत' बताया।
संतों ने असदुद्दीन ओवैसी पर सामुदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाया।
सभी संतों ने आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने का आग्रह किया।

योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा भारतीय मुसलमानों के धर्मांतरण पर दिए गए बयान को लखनऊ में कई प्रमुख संतों ने सही ठहराया है। श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के अष्टकौशल महंत डॉ. योगानंद गिरि महाराज ने 1 अक्टूबर 2026 को इस बयान का समर्थन करते हुए सांप्रदायिक सद्भाव और आपसी भाईचारे की अपील की। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब रामदेव के बयान पर देशभर में बहस छिड़ी हुई है।

महंत डॉ. योगानंद गिरि का बयान

महंत डॉ. योगानंद गिरि महाराज ने कहा, 'बाबा रामदेव का बयान सत्य है, देश में जितने भी मुस्लिम हैं, वे सभी कन्वर्टेड मुसलमान हैं। अगर इनकी जाँच कराई जाए तो इनके दादा या परदादा हिन्दू ही निकलेंगे।' उन्होंने आगे कहा कि मुगल आक्रांताओं द्वारा किए गए उत्पीड़न के भय से लोगों ने इस्लाम स्वीकार किया, जिसके कारण देश में मुस्लिम आबादी बढ़ी।

महंत ने यह भी कहा कि मुस्लिम देश भारतीय मुसलमानों को मुस्लिम नहीं मानते और चीन में भी मुसलमानों का उत्पीड़न हो रहा है। उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी पर आरोप लगाया कि वे 'आपसी सौहार्द और भाईचारे को खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं।' महंत ने स्पष्ट कहा कि 'आपसी भाईचारे को बनाकर रहना चाहिए।'

जगद्गुरु परमहंस आचार्य और राम दिनेश आचार्य की प्रतिक्रिया

जगद्गुरु परमहंस आचार्य जी महाराज ने कहा, 'बाबा रामदेव ने बहुत ही सत्य बात कही है, जो इसको समझ जाएगा, उसका जीवन सुधर जाएगा।' उन्होंने कहा कि देश के सभी मुसलमानों के पूर्वज 'राम-कृष्ण ही हैं' और 'सनातनी हैं।' उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी पर आरोप लगाया कि वे 'अपने समुदाय के लोगों को गुमराह कर रहे हैं।'

जगद्गुरु राम दिनेश आचार्य ने कहा, 'सनातन सबसे प्राचीन धर्म है और बाकी धर्म बाद में आए हैं।' उन्होंने यह भी कहा, 'मेरा मानना है कि वे भी हिंदू ही हैं। बाबा रामदेव का बयान ठीक और तर्कसंगत है।'

बयान का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि बाबा रामदेव के मूल बयान ने देश में राजनीतिक और धार्मिक बहस को तेज़ कर दिया है। यह पहली बार नहीं है जब सनातन संतों ने धर्मांतरण के इतिहास पर सार्वजनिक रूप से राय व्यक्त की हो। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार के बयान सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकते हैं, जबकि समर्थकों का तर्क है कि यह ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित चर्चा है।

आगे क्या

इन बयानों के बाद विभिन्न धार्मिक और राजनीतिक संगठनों की प्रतिक्रियाएँ आने की संभावना है। संतों की यह एकजुटता रामदेव के बयान को सामाजिक-धार्मिक विमर्श में और अधिक केंद्रीय बना सकती है। फिलहाल, सांप्रदायिक सद्भाव की अपील के साथ-साथ यह बहस राष्ट्रीय स्तर पर जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसका असर दोनों समुदायों में तनाव बढ़ाने वाला होता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि 'सद्भाव' और 'घर वापसी' एक साथ कैसे संभव हैं।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाबा रामदेव ने मुसलमानों के बारे में क्या बयान दिया था?
बाबा रामदेव ने कहा था कि भारत के मुसलमान मूलतः धर्मांतरित हिंदू हैं और उनके पूर्वज हिंदू थे। इस बयान ने देशभर में राजनीतिक और धार्मिक बहस को जन्म दिया।
जूना अखाड़ा के महंत ने रामदेव के बयान पर क्या कहा?
श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के अष्टकौशल महंत डॉ. योगानंद गिरि महाराज ने कहा कि रामदेव का बयान सत्य है और भारत के सभी मुसलमानों के पूर्वज हिंदू थे। उन्होंने साथ ही आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की अपील भी की।
इस विवाद में ओवैसी का नाम क्यों लिया गया?
महंत डॉ. योगानंद गिरि और जगद्गुरु परमहंस आचार्य दोनों ने असदुद्दीन ओवैसी पर आरोप लगाया कि वे मुस्लिम समुदाय को गुमराह कर रहे हैं और आपसी सौहार्द खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या अन्य संतों ने भी रामदेव के बयान का समर्थन किया?
हाँ, जगद्गुरु परमहंस आचार्य जी महाराज और जगद्गुरु राम दिनेश आचार्य ने भी रामदेव के बयान को क्रमशः 'सत्य' और 'ठीक व तर्कसंगत' बताया। सभी ने सनातन धर्म को सबसे प्राचीन धर्म बताते हुए धर्मांतरण को ऐतिहासिक घटना करार दिया।
इस बयान का सामाजिक सद्भाव पर क्या असर हो सकता है?
आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार के बयान सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकते हैं, भले ही साथ में सद्भाव की अपील की जाए। धार्मिक-सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों की विभिन्न प्रतिक्रियाएँ आने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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