कांवड़ यात्रियों पर रशीदी की टिप्पणी: साधु-संतों ने बताया सामाजिक सद्भाव के विरुद्ध षड्यंत्र
सारांश
मुख्य बातें
साधु-संत समाज ने मौलाना साजिद रशीदी द्वारा कांवड़ यात्रियों को आतंकी करार देने वाली टिप्पणी की कड़ी निंदा की है। संतों ने इस बयान को सामाजिक सद्भाव को ठेस पहुँचाने वाला और हिंदू-मुस्लिम वैमनस्य फैलाने का सुनियोजित प्रयास बताया है। 6 अगस्त को विभिन्न धार्मिक नेताओं ने एकजुट होकर इस बयान की भर्त्सना की।
मिर्जापुर से उठी पहली आवाज़
मिर्जापुर में डॉ. योगानंद गिरि ने कहा कि मौलाना साजिद रशीदी का बयान 'बेतुका और सनातन विरोधी' है। उन्होंने कहा कि भगवाधारी कांवड़ियों को आतंकवादी कहना सनातन धर्म के किसी भी कार्य का उपहास करने के समान है। उनके अनुसार, 'भगवा को आतंकवाद से जोड़ना इन लोगों की पुरानी मानसिकता रही है।'
डॉ. गिरि ने यह भी रेखांकित किया कि कांवड़ यात्रा कोई आधुनिक परंपरा नहीं, बल्कि भारतवर्ष में प्राचीन काल से चली आ रही आस्था की यात्रा है। उनके अनुसार, इस प्रकार के बयान देने वाले लोग हिंदू-मुसलमान में दंगा कराने के लिए षड्यंत्र रचते हैं।
हनुमानगढ़ी महंत की तीखी प्रतिक्रिया
अयोध्या के सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी के महंत देवेशाचार्य जी महाराज ने और भी कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि मौलाना साजिद रशीदी का संबंध एक 'अंतरराष्ट्रीय गिरोह' से है जो भारत का विरोध करता है। महंत देवेशाचार्य ने कहा, 'जब भी कोई हिंदू त्योहार या उत्सव आता है, इन्हें फंड किया जाता है ताकि ये भारत के भीतर अशांति फैला सकें।'
उन्होंने यह भी कहा कि सावन के महीने में लाखों-करोड़ों कांवड़िये देश की भलाई और राष्ट्र की उन्नति के लिए पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ जल लेकर निकलते हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि महंत के ये आरोप उनके अपने वक्तव्य हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उत्तर प्रदेश और शांति-व्यवस्था पर जोर
डॉ. योगानंद गिरि ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश समेत भारत के कई राज्यों में कांवड़ यात्रा का वृहद स्वरूप होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में सुशासन के चलते किसी भी प्रकार की अशांति फैलाने के प्रयास सफल नहीं होंगे। उनके अनुसार, जब साजिश रचने वाले सफल नहीं हो पाते, तो वे इस तरह के बयान देने लगते हैं।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि कांवड़ यात्रा के दौरान धार्मिक-सामाजिक तनाव की घटनाएँ पहले भी सामने आती रही हैं। इस बार साधु-संत समाज की एकजुट प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि धार्मिक नेतृत्व इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है। मौलाना साजिद रशीदी की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या
संत समाज ने सरकार और प्रशासन से ऐसे बयान देने वालों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की माँग की है। सावन माह में कांवड़ यात्रा जारी है और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता रखने का भरोसा दिया है।