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कांवड़ यात्रियों पर रशीदी की टिप्पणी: साधु-संतों ने बताया सामाजिक सद्भाव के विरुद्ध षड्यंत्र

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कांवड़ यात्रियों पर रशीदी की टिप्पणी: साधु-संतों ने बताया सामाजिक सद्भाव के विरुद्ध षड्यंत्र

सारांश

मौलाना साजिद रशीदी के कांवड़ यात्रियों को आतंकी बताने वाले बयान पर साधु-संत समाज एकजुट हो गया है। अयोध्या के महंत देवेशाचार्य और मिर्जापुर के डॉ. योगानंद गिरि ने इसे सनातन विरोधी षड्यंत्र करार दिया। सावन माह में यह विवाद धार्मिक-सामाजिक तनाव की नई परत जोड़ता है।

मुख्य बातें

मौलाना साजिद रशीदी ने कांवड़ यात्रियों को आतंकी बताया, जिसकी साधु-संत समाज ने कड़ी निंदा की।
योगानंद गिरि ने बयान को 'बेतुका और सनातन विरोधी' करार दिया।
अयोध्या के हनुमानगढ़ी महंत देवेशाचार्य जी महाराज ने रशीदी पर अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़े होने का आरोप लगाया — यह उनका अपना वक्तव्य है, स्वतंत्र रूप से अपुष्ट।
संत समाज ने इस बयान को हिंदू-मुस्लिम वैमनस्य फैलाने का सुनियोजित प्रयास बताया।
मौलाना रशीदी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

साधु-संत समाज ने मौलाना साजिद रशीदी द्वारा कांवड़ यात्रियों को आतंकी करार देने वाली टिप्पणी की कड़ी निंदा की है। संतों ने इस बयान को सामाजिक सद्भाव को ठेस पहुँचाने वाला और हिंदू-मुस्लिम वैमनस्य फैलाने का सुनियोजित प्रयास बताया है। 6 अगस्त को विभिन्न धार्मिक नेताओं ने एकजुट होकर इस बयान की भर्त्सना की।

मिर्जापुर से उठी पहली आवाज़

मिर्जापुर में डॉ. योगानंद गिरि ने कहा कि मौलाना साजिद रशीदी का बयान 'बेतुका और सनातन विरोधी' है। उन्होंने कहा कि भगवाधारी कांवड़ियों को आतंकवादी कहना सनातन धर्म के किसी भी कार्य का उपहास करने के समान है। उनके अनुसार, 'भगवा को आतंकवाद से जोड़ना इन लोगों की पुरानी मानसिकता रही है।'

डॉ. गिरि ने यह भी रेखांकित किया कि कांवड़ यात्रा कोई आधुनिक परंपरा नहीं, बल्कि भारतवर्ष में प्राचीन काल से चली आ रही आस्था की यात्रा है। उनके अनुसार, इस प्रकार के बयान देने वाले लोग हिंदू-मुसलमान में दंगा कराने के लिए षड्यंत्र रचते हैं।

हनुमानगढ़ी महंत की तीखी प्रतिक्रिया

अयोध्या के सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी के महंत देवेशाचार्य जी महाराज ने और भी कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि मौलाना साजिद रशीदी का संबंध एक 'अंतरराष्ट्रीय गिरोह' से है जो भारत का विरोध करता है। महंत देवेशाचार्य ने कहा, 'जब भी कोई हिंदू त्योहार या उत्सव आता है, इन्हें फंड किया जाता है ताकि ये भारत के भीतर अशांति फैला सकें।'

उन्होंने यह भी कहा कि सावन के महीने में लाखों-करोड़ों कांवड़िये देश की भलाई और राष्ट्र की उन्नति के लिए पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ जल लेकर निकलते हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि महंत के ये आरोप उनके अपने वक्तव्य हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

उत्तर प्रदेश और शांति-व्यवस्था पर जोर

डॉ. योगानंद गिरि ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश समेत भारत के कई राज्यों में कांवड़ यात्रा का वृहद स्वरूप होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में सुशासन के चलते किसी भी प्रकार की अशांति फैलाने के प्रयास सफल नहीं होंगे। उनके अनुसार, जब साजिश रचने वाले सफल नहीं हो पाते, तो वे इस तरह के बयान देने लगते हैं।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि कांवड़ यात्रा के दौरान धार्मिक-सामाजिक तनाव की घटनाएँ पहले भी सामने आती रही हैं। इस बार साधु-संत समाज की एकजुट प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि धार्मिक नेतृत्व इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है। मौलाना साजिद रशीदी की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे क्या

संत समाज ने सरकार और प्रशासन से ऐसे बयान देने वालों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की माँग की है। सावन माह में कांवड़ यात्रा जारी है और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता रखने का भरोसा दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों की जवाबदेही की जाँच ज़रूरी है। महंत देवेशाचार्य के 'अंतरराष्ट्रीय गिरोह' और 'जिहाद-आतंकवाद' जैसे गंभीर आरोप बिना किसी साक्ष्य के लगाए गए हैं, जो स्वयं तनाव बढ़ाने वाले हो सकते हैं। मूल बयान निंदनीय हो सकता है, लेकिन उसके जवाब में अपुष्ट आरोपों की झड़ी लगाना सामाजिक सद्भाव की रक्षा नहीं करता। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह सवाल नहीं उठाती कि क्या दोनों तरफ से दिए जा रहे उत्तेजक बयान सावन जैसे संवेदनशील समय में जनहित में हैं।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना साजिद रशीदी ने कांवड़ यात्रियों के बारे में क्या कहा था?
मौलाना साजिद रशीदी ने कांवड़ यात्रियों को आतंकी बताया था, जिसे साधु-संत समाज ने सनातन विरोधी और सामाजिक सद्भाव के खिलाफ बताया है। इस बयान पर अब तक रशीदी की ओर से कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है।
साधु-संतों ने इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
मिर्जापुर के डॉ. योगानंद गिरि और अयोध्या के हनुमानगढ़ी महंत देवेशाचार्य जी महाराज सहित कई संतों ने बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे हिंदू-मुस्लिम वैमनस्य फैलाने का षड्यंत्र बताया और सरकार से कार्रवाई की माँग की।
कांवड़ यात्रा क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
कांवड़ यात्रा भारत की प्राचीन धार्मिक परंपरा है जिसमें सावन माह के दौरान श्रद्धालु गंगाजल लेकर शिव मंदिरों तक पैदल यात्रा करते हैं। उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में इस यात्रा में लाखों-करोड़ों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
महंत देवेशाचार्य ने रशीदी पर क्या आरोप लगाए?
महंत देवेशाचार्य जी महाराज ने आरोप लगाया कि मौलाना रशीदी का संबंध एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह से है जो हिंदू त्योहारों के दौरान भारत में अशांति फैलाने के लिए फंडिंग करता है। ये आरोप महंत के अपने वक्तव्य हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इस विवाद का सामाजिक सद्भाव पर क्या असर पड़ सकता है?
संत समाज ने आशंका जताई है कि इस तरह के बयान सावन जैसे धार्मिक रूप से संवेदनशील समय में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा सकते हैं। हालाँकि, प्रशासन ने कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता रखने का आश्वासन दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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