मौलाना साजिद रशीदी के कांवड़ यात्रा वाले बयान पर नेताओं-धर्मगुरुओं का तीखा विरोध
सारांश
मुख्य बातें
कांवड़ यात्रा को लेकर मौलाना साजिद रशीदी की विवादास्पद टिप्पणी पर 7 अगस्त को देशभर से राजनीतिक नेताओं और धार्मिक हस्तियों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। नेताओं ने इस बयान को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर आघात बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की और इसे सामाजिक सद्भाव के लिए हानिकारक करार दिया।
शिया धर्मगुरु की कड़ी आलोचना
लखनऊ में शिया मरकजी चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने रशीदी के बयान को व्यक्तिगत और इस्लाम-विरोधी आचरण बताया। उन्होंने कहा कि रशीदी की दाढ़ी और टोपी देखकर लोग उन्हें मुसलमान मान लेते हैं, लेकिन इस्लाम से उनका कोई वास्तविक संबंध नहीं है।
नकवी ने आरोप लगाया कि रशीदी राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के सक्रिय सदस्य हैं, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा संगठन है। उनके अनुसार, ऐसे लोग किसी के इशारे पर बोलकर समुदायों के बीच बिखराव पैदा करने का काम करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्चा मुसलमान वह है जो किसी दूसरे की धार्मिक यात्रा या आस्था पर टिप्पणी नहीं करता।
बसपा विधायक की संतुलित प्रतिक्रिया
बिहार के कैमूर से बहुजन समाज पार्टी (BSP) के विधायक सतीश कुमार सिंह यादव ने कहा कि उन्होंने रशीदी का बयान सुना नहीं है, इसलिए वे सीधी टिप्पणी से बचेंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि कांवड़ यात्रा करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है और इसे राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
यादव ने बताया कि वे स्वयं कई बार सुल्तानगंज से देवघर तक 100 किलोमीटर से अधिक की पैदल कांवड़ यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि किसी की भी धार्मिक आस्था पर टिप्पणी करना न केवल अनुचित है, बल्कि मूर्खता भी है।
भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
अयोध्या से पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार ने कहा कि रशीदी अक्सर इस प्रकार के बेतुके बयान देते रहते हैं। उन्होंने कहा कि कांवड़ियों का स्वागत बेहतर ढंग से हो रहा है और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा बनाई गई उन्नत सड़कों से श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुगम हुई है।
हैदराबाद से भाजपा नेता डॉ. सरिता अग्रवाल ने बयान को 'बेहद गैर-जिम्मेदाराना' करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग वास्तविक आतंकवादियों को आतंकवादी कहने से बचते हैं, वही सदियों पुरानी सनातन परंपरा के अनुयायियों पर ऐसा लेबल लगा रहे हैं। डॉ. अग्रवाल ने रशीदी से सनातन धर्म के श्रद्धालुओं के प्रति ऐसी टिप्पणियाँ बंद करने की अपील की।
आम जनता और सामाजिक सद्भाव पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब कांवड़ यात्रा का सीजन चरम पर है और लाखों श्रद्धालु पूरे उत्तर भारत में यात्रा पर हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान धार्मिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाते हैं। गौरतलब है कि कांवड़ यात्रा को लेकर पहले भी विवादास्पद बयान सामने आ चुके हैं और हर बार इन्होंने सामाजिक तनाव को बढ़ाने का काम किया है।
विभिन्न दलों और धर्मों के नेताओं की एकजुट आलोचना यह संकेत देती है कि धार्मिक यात्राओं को राजनीतिक या सांप्रदायिक विमर्श से अलग रखने पर व्यापक सहमति है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर और प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है।