7 अगस्त 2026
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मौलाना साजिद रशीदी के कांवड़ यात्रा वाले बयान पर नेताओं-धर्मगुरुओं का तीखा विरोध

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मौलाना साजिद रशीदी के कांवड़ यात्रा वाले बयान पर नेताओं-धर्मगुरुओं का तीखा विरोध

सारांश

मौलाना साजिद रशीदी का कांवड़ यात्रा पर विवादास्पद बयान देशभर में आलोचना की आंधी ले आया। शिया धर्मगुरु से लेकर भाजपा नेताओं तक — सभी ने एक सुर में निंदा की। सवाल यह है कि क्या ऐसे बयान सामाजिक विभाजन की सुनियोजित कोशिश हैं या महज़ गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी।

मुख्य बातें

मौलाना साजिद रशीदी के कांवड़ यात्रा पर दिए बयान पर 7 अगस्त को देशभर में तीखी प्रतिक्रियाएं आईं।
शिया मरकजी चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने रशीदी को राष्ट्रीय मुस्लिम मंच (RSS से जुड़ा) का सदस्य बताते हुए उनके बयान को इस्लाम-विरुद्ध करार दिया।
बिहार के बसपा विधायक सतीश कुमार सिंह यादव ने कांवड़ यात्रा को राजनीति से दूर रखने की अपील की; वे स्वयं 100 किलोमीटर से अधिक की पैदल यात्रा कर चुके हैं।
पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार (अयोध्या) और डॉ.
सरिता अग्रवाल (हैदराबाद) ने बयान को 'बेतुका' और 'गैर-जिम्मेदाराना' बताया।
अग्रवाल ने रशीदी से सनातन धर्म के अनुयायियों को आतंकवादी कहना तत्काल बंद करने की अपील की।

कांवड़ यात्रा को लेकर मौलाना साजिद रशीदी की विवादास्पद टिप्पणी पर 7 अगस्त को देशभर से राजनीतिक नेताओं और धार्मिक हस्तियों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। नेताओं ने इस बयान को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर आघात बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की और इसे सामाजिक सद्भाव के लिए हानिकारक करार दिया।

शिया धर्मगुरु की कड़ी आलोचना

लखनऊ में शिया मरकजी चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने रशीदी के बयान को व्यक्तिगत और इस्लाम-विरोधी आचरण बताया। उन्होंने कहा कि रशीदी की दाढ़ी और टोपी देखकर लोग उन्हें मुसलमान मान लेते हैं, लेकिन इस्लाम से उनका कोई वास्तविक संबंध नहीं है।

नकवी ने आरोप लगाया कि रशीदी राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के सक्रिय सदस्य हैं, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा संगठन है। उनके अनुसार, ऐसे लोग किसी के इशारे पर बोलकर समुदायों के बीच बिखराव पैदा करने का काम करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्चा मुसलमान वह है जो किसी दूसरे की धार्मिक यात्रा या आस्था पर टिप्पणी नहीं करता।

बसपा विधायक की संतुलित प्रतिक्रिया

बिहार के कैमूर से बहुजन समाज पार्टी (BSP) के विधायक सतीश कुमार सिंह यादव ने कहा कि उन्होंने रशीदी का बयान सुना नहीं है, इसलिए वे सीधी टिप्पणी से बचेंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि कांवड़ यात्रा करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है और इसे राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

यादव ने बताया कि वे स्वयं कई बार सुल्तानगंज से देवघर तक 100 किलोमीटर से अधिक की पैदल कांवड़ यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि किसी की भी धार्मिक आस्था पर टिप्पणी करना न केवल अनुचित है, बल्कि मूर्खता भी है।

भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया

अयोध्या से पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार ने कहा कि रशीदी अक्सर इस प्रकार के बेतुके बयान देते रहते हैं। उन्होंने कहा कि कांवड़ियों का स्वागत बेहतर ढंग से हो रहा है और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा बनाई गई उन्नत सड़कों से श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुगम हुई है।

हैदराबाद से भाजपा नेता डॉ. सरिता अग्रवाल ने बयान को 'बेहद गैर-जिम्मेदाराना' करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग वास्तविक आतंकवादियों को आतंकवादी कहने से बचते हैं, वही सदियों पुरानी सनातन परंपरा के अनुयायियों पर ऐसा लेबल लगा रहे हैं। डॉ. अग्रवाल ने रशीदी से सनातन धर्म के श्रद्धालुओं के प्रति ऐसी टिप्पणियाँ बंद करने की अपील की।

आम जनता और सामाजिक सद्भाव पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब कांवड़ यात्रा का सीजन चरम पर है और लाखों श्रद्धालु पूरे उत्तर भारत में यात्रा पर हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान धार्मिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाते हैं। गौरतलब है कि कांवड़ यात्रा को लेकर पहले भी विवादास्पद बयान सामने आ चुके हैं और हर बार इन्होंने सामाजिक तनाव को बढ़ाने का काम किया है।

विभिन्न दलों और धर्मों के नेताओं की एकजुट आलोचना यह संकेत देती है कि धार्मिक यात्राओं को राजनीतिक या सांप्रदायिक विमर्श से अलग रखने पर व्यापक सहमति है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर और प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो हर बार सामाजिक ध्रुवीकरण को हवा देता है। ध्यान देने योग्य है कि इस बार आलोचना केवल भाजपा नेताओं तक सीमित नहीं रही — शिया धर्मगुरु और बसपा विधायक भी एक ही पाले में खड़े दिखे, जो बताता है कि इस तरह के बयान मुस्लिम समुदाय के भीतर भी असहज करते हैं। मौलाना नकवी का रशीदी को RSS-संबद्ध संगठन से जोड़ना एक गंभीर आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। मीडिया को चाहिए कि वह इस विवाद को महज़ प्रतिक्रियाओं की सूची तक सीमित न रखे, बल्कि यह भी जाँचे कि रशीदी ने वास्तव में क्या कहा और उसका संदर्भ क्या था।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना साजिद रशीदी ने कांवड़ यात्रा पर क्या बयान दिया था?
स्रोत में रशीदी के बयान का पूरा विवरण नहीं दिया गया है, लेकिन भाजपा नेता डॉ. सरिता अग्रवाल के अनुसार उन्होंने कांवड़ यात्रा को आतंकवाद से जोड़ा और सनातन धर्म के अनुयायियों को आतंकवादी कहा। इसी बयान पर देशभर में तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं।
शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने रशीदी के बारे में क्या कहा?
मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि रशीदी का इस्लाम से कोई वास्तविक संबंध नहीं है और वे RSS से जुड़े राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के सक्रिय सदस्य हैं। उनके अनुसार रशीदी किसी के इशारे पर बोलकर मुसलमानों को बदनाम करने और समाज में बिखराव पैदा करने का काम करते हैं।
बसपा विधायक सतीश कुमार सिंह यादव ने क्या कहा?
बिहार के कैमूर से बसपा विधायक सतीश कुमार सिंह यादव ने कहा कि कांवड़ यात्रा करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था का विषय है और इसे राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि वे स्वयं कई बार सुल्तानगंज से देवघर तक 100 किलोमीटर से अधिक की पैदल कांवड़ यात्रा कर चुके हैं।
भाजपा नेताओं ने इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
अयोध्या से पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार ने रशीदी के बयान को 'ऊट-पटांग' बताया, जबकि हैदराबाद से भाजपा नेता डॉ. सरिता अग्रवाल ने इसे 'बेहद गैर-जिम्मेदाराना' करार दिया। डॉ. अग्रवाल ने रशीदी से सनातन धर्म के अनुयायियों को आतंकवादी कहना तत्काल बंद करने की अपील की।
इस विवाद का सामाजिक सद्भाव पर क्या असर पड़ सकता है?
आलोचकों का कहना है कि कांवड़ यात्रा जैसी धार्मिक परंपराओं पर विवादास्पद बयान सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा देते हैं। विभिन्न दलों और धर्मों के नेताओं की एकजुट प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि धार्मिक यात्राओं को राजनीतिक विमर्श से अलग रखने पर व्यापक सहमति है।
राष्ट्र प्रेस
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