6 अगस्त 2026
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मौलाना साजिद रशीदी का विवादित बयान: कुछ कांवड़ियों को बताया 'आतंकवादी', योगी और बंगाल पर भी निशाना

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मौलाना साजिद रशीदी का विवादित बयान: कुछ कांवड़ियों को बताया 'आतंकवादी', योगी और बंगाल पर भी निशाना

सारांश

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कांवड़ियों के एक वर्ग को 'आतंकवादी' कहकर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी। साथ ही बंगाल में लाउडस्पीकर हटाने को 'गैरकानूनी' बताया और शेख हसीना को बांग्लादेश सौंपने की माँग की — एक बयान में तीन विस्फोटक मुद्दे।

मुख्य बातें

मौलाना साजिद रशीदी ने 6 अगस्त को कांवड़ियों के एक वर्ग को 'आतंकवादी' बताया, हालाँकि कहा कि वे सभी कांवड़ियों को नहीं बोल रहे।
उन्होंने स्कूल वैन के बच्चों को घायल करने, पुलिस की पिटाई और मरीज़ को 'जय श्री राम' बोलने पर मजबूर करने जैसी कथित घटनाओं का हवाला दिया।
बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के विपरीत बताया; 75 डेसीबल सीमा का उल्लेख किया।
शेख हसीना को बांग्लादेश सौंपने की माँग की, कहा — 'वहाँ के लोग तय करेंगे कि इसके साथ क्या करना है।' बयान को आलोचकों ने सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील बताया; राजनीतिक प्रतिक्रिया अपेक्षित है।

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 6 अगस्त को कांवड़ यात्रा को लेकर एक विवादित बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि यात्रा में शामिल कुछ लोग शिवभक्त नहीं, बल्कि 'आतंकवादी' हैं। उनका यह बयान तत्काल राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया।

मौलाना रशीदी ने क्या कहा

मौलाना रशीदी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि वे सभी कांवड़ियों को निशाना नहीं बना रहे। उन्होंने कहा, 'सड़कों पर बैठकर शराब पीने और नशा करने वालों को शिवभक्त बोला जाता है। पुलिस वालों को वर्दी में रहते हुए पीटते हैं, आप उनको शिवभक्त बोलते हैं। स्कूल वैन में बैठे बच्चों के शीशे तोड़ दिए, कई बच्चों को घायल कर दिया, आप उनको शिवभक्त कहते हैं।'

उन्होंने आगे कहा, 'आप उन लोगों को, जिन्होंने एक मरीज की वैन तक नहीं छोड़ी — और एक मरीज को परेशानी की हालत में, बीमारी की हालत में उससे कह रहे हैं, 'जय श्री राम के नारे लगाओ' — ये शिवभक्त हैं? ये शिवभक्त नहीं हैं, ये तो आतंकवादी हैं।'

रशीदी ने यह भी जोड़ा, 'मैं सभी कांवड़ियों को नहीं बोल रहा हूं। इनमें कुछ अच्छे लोग भी हैं, लेकिन अधिकतर लोग सिर्फ नशे और उपद्रव के लिए जाते हैं। क्या शिवजी ने यही कहा है कि किसी भी हक खा जाओ और किसी को भी लूट लो।'

योगी आदित्यनाथ पर तंज

मौलाना ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने चौराहों पर नमाज़ पर आपत्ति जताई थी, लेकिन सड़कों पर कांवड़ियों के व्यवहार पर चुप हैं। उन्होंने कहा, 'एक वीडियो में एक युवक राम जी की मूर्ति को सिगरेट पिला रहा था। ऐसे लोग क्या कांवड़िए हो सकते हैं? ये नशेड़ी और आतंकवादी हैं।' गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांवड़ यात्रा के दौरान कई राज्यों में कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं की खबरें सामने आई हैं।

बंगाल में लाउडस्पीकर विवाद पर प्रतिक्रिया

मौलाना रशीदी ने पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जाने के मुद्दे पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर प्रतिबंधित किया है और 75 डेसीबल की सीमा तय की है, लेकिन लाउडस्पीकर उतारने का कोई आदेश नहीं दिया। उन्होंने कहा, 'जो लोग लाउडस्पीकर उतार रहे हैं, वो बिना कानून के किया जा रहा है।'

मौलाना ने इसे 'वोटबैंक की राजनीति' करार देते हुए कहा कि बंगाल सरकार को 'होश में आ जाना चाहिए' और मुसलमानों के साथ टकराव बंद करना चाहिए। उनकी यह टिप्पणी आलोचकों की नज़र में विवादास्पद मानी जा रही है।

शेख हसीना पर बयान

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के वर्चुअल कार्यक्रम पर मौलाना ने कहा, 'दुनिया एक सर्किल है। जो करोगे, वो लौटकर आता है।' उन्होंने माँग की कि शेख हसीना को उनके देश को सौंपा जाए और वहाँ के लोग तय करें कि उनके साथ क्या किया जाए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-बांग्लादेश संबंधों पर कूटनीतिक दबाव बना हुआ है।

विवाद का संदर्भ और आगे की स्थिति

मौलाना साजिद रशीदी का यह बयान कांवड़ यात्रा के दौरान देशभर में सांप्रदायिक संवेदनशीलता के बीच आया है। विभिन्न राजनीतिक दलों और हिंदू संगठनों की ओर से इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना है। अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना होगा कि क्या यह विवाद कानूनी कार्रवाई या राजनीतिक प्रतिक्रिया को जन्म देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मरीज़ वाहनों को रोकना — और इन पर सार्वजनिक बहस ज़रूरी है। लेकिन 'आतंकवादी' जैसे शब्द का प्रयोग इस बहस को तथ्य से भावनात्मक टकराव की ओर मोड़ देता है, जिससे असली जवाबदेही का सवाल पीछे छूट जाता है। साथ ही, बंगाल सरकार को दी गई अप्रत्यक्ष धमकी — 'सरकारों का इलाज भी हो जाता है' — एक धार्मिक नेता के लिए संवैधानिक मर्यादा की सीमा को चुनौती देती है। मुख्यधारा की मीडिया इस बयान की सनसनी पर केंद्रित है, जबकि असली सवाल यह है कि कांवड़ यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था की विफलता पर राज्य सरकारें जवाब क्यों नहीं दे रहीं।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना साजिद रशीदी ने कांवड़ियों के बारे में क्या कहा?
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि कांवड़ यात्रा में शामिल कुछ लोग — जो नशा करते हैं, पुलिस को पीटते हैं और मरीज़ वाहनों को रोकते हैं — 'शिवभक्त नहीं, आतंकवादी हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सभी कांवड़ियों को नहीं, बल्कि उपद्रवी तत्वों को संबोधित कर रहे हैं।
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन क्या है?
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन भारत में मस्जिदों के इमामों का एक संगठन है, जिसके अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी हैं। यह संगठन मुस्लिम धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से बयान देता रहा है।
बंगाल में लाउडस्पीकर विवाद पर मौलाना का क्या रुख है?
मौलाना रशीदी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने केवल रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर प्रतिबंधित किया है और 75 डेसीबल की सीमा तय की है, लेकिन लाउडस्पीकर हटाने का कोई आदेश नहीं दिया। उन्होंने बंगाल में लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई को 'बिना कानून के' और 'वोटबैंक की राजनीति' बताया।
मौलाना ने शेख हसीना के बारे में क्या माँग की?
मौलाना रशीदी ने कहा कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को उनके देश को सौंपा जाना चाहिए, ताकि वहाँ के लोग उनके भविष्य का फैसला कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि 'जो करोगे, वो लौटकर आता है।'
क्या मौलाना रशीदी के बयान पर कोई कानूनी कार्रवाई हो सकती है?
अभी तक किसी अधिकारी या सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालाँकि, 'आतंकवादी' जैसे शब्द के प्रयोग को लेकर विभिन्न हिंदू संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से शिकायत दर्ज कराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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