उत्तर कोरिया ने ईस्ट सी में दागा अज्ञात प्रोजेक्टाइल, दक्षिण कोरियाई सेना का दावा
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया की सेना ने 20 सितंबर 2026 को दावा किया कि उत्तर कोरिया ने ईस्ट सी (जापान सागर) की ओर एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल दागा है। सोल स्थित ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) ने मीडिया को भेजे एक संदेश में इस लॉन्च की पुष्टि की, हालांकि प्रोजेक्टाइल के प्रकार या उसकी रेंज के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं की गई।
ताज़ा घटनाक्रम
JCS ने मीडिया को भेजे संक्षिप्त संदेश में कहा कि प्रोजेक्टाइल की दिशा और विवरण की जाँच जारी है। इसे शुरुआत में 'अज्ञात प्रोजेक्टाइल' बताया गया — यह वही पैटर्न है जो उत्तर कोरिया के पिछले लॉन्च के दौरान भी देखा गया था, जब पहले जानकारी अस्पष्ट रही और बाद में मिसाइल की पुष्टि हुई।
गौरतलब है कि 12 सितंबर 2026 को भी प्योंगयांग ने वॉनसन इलाके से ईस्ट सी की ओर कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। उस कार्रवाई को सोल, वॉशिंगटन और टोक्यो के बीच चल रहे त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास (7 से 12 सितंबर) के विरोध के तौर पर देखा गया था।
परमाणु विवाद और IAEA का संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब उत्तर कोरिया ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था, जिसमें प्योंगयांग को परमाणु-सम्पन्न राष्ट्र का दर्जा न दिए जाने की बात कही गई थी। वियना में हुए IAEA के 70वें महासम्मेलन में यह प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें कहा गया कि परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत उत्तर कोरिया को ऐसी मान्यता नहीं दी जा सकती।
किम जोंग उन की बहन और वरिष्ठ नेता किम यो-जोंग ने गुरुवार को स्पष्ट कहा कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियार बनाए रखेगा, क्योंकि ये देश की सुरक्षा के लिए 'अनिवार्य' हैं। उन्होंने परमाणु हथियार छोड़ने के लिए मनाने की किसी भी कोशिश को 'बेवकूफी भरी बात' करार दिया।
आक्रामकता का बढ़ता पैटर्न
20 अगस्त 2026 को भी प्योंगयांग ने ईस्ट सी की ओर एक मिसाइल दागी थी, जिसकी रेंज दक्षिण कोरियाई सेना के अनुसार 300 किलोमीटर रही। इससे पहले 12 अगस्त को भी पूर्व दिशा में एक कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई थी — उस समय अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच संयुक्त 'उल्ची फ्रीडम शील्ड' सैन्य अभ्यास चल रहा था। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्देश पर इस अभ्यास की अवधि 27 अगस्त से घटाकर 21 अगस्त तक कर दी गई थी।
किम यो-जोंग ने उस कदम पर भी संदेह जताते हुए कहा था, 'सैन्य अभ्यासों का दायरा या अवधि कम करने से उनके उकसावे वाले और आक्रामक स्वभाव में कोई बदलाव नहीं आता।' उन्होंने स्पष्ट किया कि प्योंगयांग की इस कदम में 'जरा भी दिलचस्पी नहीं' है।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
विश्लेषकों के अनुसार उत्तर कोरिया का यह पैटर्न स्पष्ट है — जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके खिलाफ कोई कदम उठाया जाता है या उसे अपने हित प्रभावित होते दिखते हैं, वह मिसाइल या प्रोजेक्टाइल परीक्षण के ज़रिये संकेत देता है। IAEA प्रस्ताव, त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास और 'उल्ची फ्रीडम शील्ड' — तीनों घटनाओं के तुरंत बाद प्योंगयांग ने सैन्य गतिविधि बढ़ाई है।
आगे सोल, टोक्यो और वॉशिंगटन की संयुक्त प्रतिक्रिया और संयुक्त राष्ट्र में इस लॉन्च की औपचारिक चर्चा की संभावना बनी हुई है।