उत्तर कोरिया ने दागी 300 किमी रेंज की मिसाइल, जापान सागर की ओर प्रक्षेपण; किम की बहन ने अमेरिका को चेताया
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया ने 20 अगस्त को ईस्ट सी (जापान सागर) की दिशा में एक मिसाइल दागी, जिसकी रेंज दक्षिण कोरियाई सेना के अनुसार 300 किलोमीटर रही। यह प्रक्षेपण ऐसे समय हुआ जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने संयुक्त सैन्य अभ्यासों में कटौती की घोषणा की थी — और वह भी उस घोषणा के ठीक एक दिन बाद।
मुख्य घटनाक्रम
दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) ने पुष्टि की कि सेना ने मिसाइल प्रक्षेपण का पता लगाया। प्रारंभ में इसे 'अज्ञात प्रोजेक्टाइल' बताया गया था और तय की गई दूरी को लेकर तत्काल स्पष्टता नहीं थी। बाद में 300 किलोमीटर की रेंज का दावा सामने आया।
गौरतलब है कि यह प्योंगयांग का महीने भर में दूसरा प्रक्षेपण है। इससे पहले 12 अगस्त को भी उत्तर कोरिया ने पूर्व दिशा में एक कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी।
किम यो जोंग की चेतावनी
किम जोंग उन की बहन और उत्तर कोरिया की प्रभावशाली नेता किम यो जोंग ने बुधवार को अमेरिका-दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यास पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। कोरियाई केंद्रीय समाचार एजेंसी (KCNA) के अनुसार उन्होंने कहा, 'हम इस बात पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास जारी हैं, और यह उत्तर कोरिया के प्रति दुश्मनी का साफ संकेत है।'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 'सैन्य अभ्यासों का दायरा या अवधि कम करने से उनके उकसावे वाले और आक्रामक स्वभाव में कोई बदलाव नहीं आता।' साथ ही उन्होंने कहा कि प्योंगयांग की इस अभ्यास-कटौती में 'जरा भी दिलचस्पी नहीं' है।
उल्ची फ्रीडम शील्ड अभ्यास और तनाव की पृष्ठभूमि
अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच 'उल्ची फ्रीडम शील्ड' संयुक्त सैन्य अभ्यास को लेकर प्योंगयांग लगातार विरोध जताता रहा है। उत्तर कोरिया इन अभ्यासों को अपनी संप्रभुता के लिए सीधा खतरा और युद्ध की तैयारी करार देता है। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण कोरिया कूटनीतिक संवाद की संभावनाएँ तलाश रहा है, जबकि प्योंगयांग अपनी आक्रामक नीति से पीछे हटने को तैयार नहीं दिखता।
क्या होगा आगे
इस प्रक्षेपण के बाद कोरियाई प्रायद्वीप में कूटनीतिक समीकरण और जटिल हो गए हैं। विश्लेषकों के अनुसार प्योंगयांग का यह कदम अमेरिका-दक्षिण कोरिया की किसी भी रियायत को अपनी 'जीत' की बजाय 'कमज़ोरी' के रूप में पेश करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि वाशिंगटन और सोल इस ताज़े प्रक्षेपण पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।