उत्तर कोरिया ने वोनसान से दागी बैलिस्टिक मिसाइल, 700 किमी से अधिक दूरी तय कर पूर्वी सागर में गिरी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया ने शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को वोनसान इलाके से पूर्वी सागर की दिशा में एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जो समुद्र में गिरने से पहले 700 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर चुकी थी। दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) ने इस लॉन्च की पुष्टि करते हुए बताया कि मिसाइल सुबह करीब 6:30 बजे प्रक्षेपित की गई। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच डिमिलिटराइज़्ड ज़ोन (DMZ) में हुए बारूदी सुरंग विस्फोट के बाद पहले से तनाव का माहौल है।
मुख्य घटनाक्रम
JCS के अनुसार, मिसाइल का प्रकार अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालाँकि, सरकारी सूत्रों के हवाले से रिपोर्टों में बताया गया है कि जाँच इस संभावना को ध्यान में रखकर की जा रही है कि यह मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) अथवा इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) हो सकती है। एक सरकारी सूत्र के अनुसार, 'इस बात की संभावना है कि उत्तर कोरिया ने कम दूरी के लिए सेट करके IRBM दागी हो।'
सूत्रों के मुताबिक यह मिसाइल 12 अगस्त 2026 को वोनसान से ही दागी गई मिसाइल से मिलती-जुलती प्रतीत होती है। उस प्रक्षेपण को दक्षिण कोरिया और अमेरिका के वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास 'उल्ची फ्रीडम शील्ड' के विरोध में किया गया माना गया था। उस समय भी मिसाइल का सही प्रकार सार्वजनिक नहीं किया गया था।
मिसाइल की संभावित क्षमता
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, MRBM की सामान्य मारक रेंज लगभग 1,000 से 3,000 किलोमीटर होती है, जबकि IRBM की रेंज करीब 3,000 से 5,500 किलोमीटर तक बताई जाती है। यदि यह पुष्टि होती है कि IRBM को कम दूरी के लिए निर्धारित कर दागा गया, तो इसे उत्तर कोरिया की उस रणनीति का हिस्सा माना जाएगा जिसमें वह उन्नत हथियारों का परीक्षण 'छोटी उड़ान' के रूप में करता है ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया को सीमित रखा जा सके।
दक्षिण कोरिया और अमेरिका की प्रतिक्रिया
दक्षिण कोरियाई सेना ने कहा, 'हमारी सेना दक्षिण कोरिया-अमेरिका की मज़बूत साझा रक्षा व्यवस्था के तहत उत्तर कोरिया की अलग-अलग गतिविधियों पर करीब से नज़र रख रही है। किसी भी उकसावे का निर्णायक जवाब देने के लिए हमारी तैयारी और क्षमता बरकरार है।' JCS ने यह भी बताया कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका की खुफिया एजेंसियाँ प्रारंभिक दौर से ही इस लॉन्च पर नज़र रख रही थीं और दोनों पक्षों ने संबंधित जानकारी साझा की।
दक्षिण कोरियाई सेना मिसाइल की सटीक क्षमता और अन्य तकनीकी विवरण जानने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर विश्लेषण कर रही है।
बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि
यह प्रक्षेपण दोनों कोरिया के बीच बेहद नाज़ुक दौर में हुआ है। 21 सितंबर 2026 को DMZ में उत्तर कोरियाई बारूदी सुरंगों में विस्फोट की घटना सामने आई थी, जिसमें दक्षिण कोरिया के तीन सैनिक घायल हो गए थे — जिनमें से दो को गंभीर चोटें आई थीं। दक्षिण कोरियाई सेना ने इस घटना के लिए उत्तर कोरिया को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे युद्धविराम समझौते का 'खुला उल्लंघन' करार दिया था।
सोल ने प्योंगयांग से माफी माँगने और सीमा पर किलेबंदी से जुड़ा काम रोकने की माँग की थी। उत्तर कोरिया ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। गौरतलब है कि यह लॉन्च प्रायद्वीप पर कूटनीतिक संवाद के पूरी तरह ठप रहने के दौर में हुआ है।
क्या होगा आगे
विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर कोरिया का यह कदम आंतरिक सैन्य परीक्षण चक्र और कूटनीतिक दबाव — दोनों का मेल हो सकता है। क्षेत्रीय सुरक्षा पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक प्योंगयांग वार्ता की मेज पर नहीं आता, कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव कम होने की संभावना नहीं है। अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई सेनाओं का संयुक्त विश्लेषण पूरा होने के बाद अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आने की उम्मीद है।