उत्तर कोरिया का 11वाँ मिसाइल परीक्षण: दक्षिण कोरिया ने बताया उकसावा, UNSC प्रस्तावों का उल्लंघन
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया ने बुधवार, 12 अगस्त की सुबह वॉनसान क्षेत्र से पूर्वी सागर की दिशा में एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जिसने 700 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय चियोंग वा डे ने इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों का 'स्पष्ट उल्लंघन' और एक 'उकसावे वाली कार्रवाई' करार देते हुए तत्काल रोक की माँग की।
आपातकालीन सुरक्षा बैठक और सोल का रुख
मिसाइल प्रक्षेपण के कुछ ही देर बाद चियोंग वा डे के राष्ट्रीय सुरक्षा कार्यालय ने आपातकालीन सुरक्षा समीक्षा बैठक बुलाई। बैठक में सोल के आधिकारिक रुख पर चर्चा की गई, राष्ट्रीय सुरक्षा पर संभावित प्रभावों का आकलन किया गया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
राष्ट्रपति कार्यालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्योंगयांग के लगातार बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं और ऐसे प्रक्षेपणों को 'तुरंत बंद' किया जाना चाहिए।
मिसाइल की तकनीकी विशेषताएँ
दक्षिण कोरियाई सेना के अनुसार, मिसाइल को वॉनसान के तटीय क्षेत्र से सुबह लगभग 6 बजे IST दागा गया। उड़ान दूरी के आधार पर इसके कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM) होने की संभावना जताई जा रही है, हालाँकि मिसाइल का सटीक प्रकार अभी तक आधिकारिक रूप से निर्धारित नहीं किया गया है।
एक सप्ताह में दूसरा प्रक्षेपण
यह एक सप्ताह से भी कम समय में उत्तर कोरिया का दूसरा मिसाइल परीक्षण है। इससे पहले गुरुवार को भी प्योंगयांग ने पूर्वी सागर की ओर एक कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी। आँकड़ों के अनुसार, यह 2026 में उत्तर कोरिया का 11वाँ मिसाइल प्रक्षेपण है।
गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने पिछले कई वर्षों में दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण किए हैं, जिनमें से अधिकांश UNSC प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए किए गए। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद किम जोंग उन सरकार अपने मिसाइल कार्यक्रम को जारी रखे हुए है।
'उल्ची फ्रीडम शील्ड' अभ्यास से पहले तनाव
इस परीक्षण का समय विशेष रूप से संवेदनशील है। दक्षिण कोरिया और अमेरिका अगले सप्ताह अपना प्रमुख वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास 'उल्ची फ्रीडम शील्ड' शुरू करने वाले हैं। प्योंगयांग इन संयुक्त अभ्यासों को लंबे समय से 'युद्ध की तैयारी' करार देता रहा है और ऐसे अभ्यासों के आसपास अपने हथियार परीक्षण तेज़ करने का इतिहास रखता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रक्षेपण कूटनीतिक संदेश का हिस्सा हो सकता है — जिसका उद्देश्य सियोल और वाशिंगटन पर दबाव बनाना है। आने वाले दिनों में कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव का स्तर और बढ़ सकता है।