उत्तर कोरिया ने पूर्वी सागर में दागीं कई बैलिस्टिक मिसाइलें, 900 किमी से अधिक दूरी तय; दक्षिण कोरिया हाई अलर्ट पर
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया ने 12 अक्टूबर 2026 को पूर्वी सागर की दिशा में कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार, प्योंगयांग क्षेत्र से सोमवार सुबह लगभग 9:20 बजे इन प्रक्षेपणों का पता लगाया गया, और इनमें से कम से कम एक मिसाइल ने 900 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की। यह प्रक्षेपण कोरियाई प्रायद्वीप पर बढ़ते सैन्य तनाव की पृष्ठभूमि में हुआ है।
मुख्य घटनाक्रम
दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) ने पुष्टि की कि ताजा प्रक्षेपण के बाद निगरानी तंत्र को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। सेना किसी भी अतिरिक्त प्रक्षेपण की आशंका को देखते हुए पूरी तरह सतर्क है। इस घटनाक्रम की जानकारी अमेरिका और जापान के साथ भी साझा की जा रही है।
यह परीक्षण महज नौ दिन पहले हुई एक अन्य घटना के बाद आया है — 3 अक्टूबर 2026 को उत्तर कोरिया ने वॉनसान क्षेत्र से पूर्वी सागर की ओर एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी। उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया KCNA ने अगले दिन बताया था कि किम जोंग उन की निगरानी में एक मध्यम दूरी की रणनीतिक मिसाइल का परीक्षण किया गया, जिसका उद्देश्य हाइपरसोनिक रणनीतिक हथियार प्रणाली चलाने वाले मिसाइल सैनिकों को प्रशिक्षित करना था।
तनाव की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि इन प्रक्षेपणों से ठीक पहले दक्षिण कोरिया ने भी अपने पहले हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) का परीक्षण किया था। यह घटनाक्रम दोनों कोरियाई देशों के बीच तेज़ी से बढ़ते सैन्य तनाव को दर्शाता है।
दोनों देशों के बीच संबंध 21 सितंबर 2026 को विसैन्यीकृत क्षेत्र (DMZ) के दक्षिण कोरियाई हिस्से में हुए बारूदी सुरंग विस्फोट के बाद से और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं। इस घटना में दक्षिण कोरिया के तीन सैनिक घायल हुए थे, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई गई थी।
आरोप-प्रत्यारोप और चेतावनी
दक्षिण कोरिया की सेना और संयुक्त राष्ट्र कमान की जाँच में DMZ विस्फोट के लिए उत्तर कोरियाई सैनिकों द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को जिम्मेदार ठहराया गया। हालाँकि, प्योंगयांग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सोल पर जाँच के निष्कर्ष गढ़ने का आरोप लगाया। उत्तर कोरिया ने यह भी चेतावनी दी कि यदि दक्षिण कोरिया ने जवाबी कार्रवाई की, तो उसे तत्काल और कठोर प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा।
सरकार की प्रतिक्रिया
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय के राष्ट्रीय सुरक्षा कार्यालय ने उत्तर कोरिया से मिसाइल परीक्षण तत्काल रोकने की माँग की है। इन प्रक्षेपणों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का गंभीर उल्लंघन करार दिया गया। इस मुद्दे पर एक आपात बैठक भी बुलाई गई, जिसमें देश की सुरक्षा स्थिति और सैन्य तैयारियों की समीक्षा की गई।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब कोरियाई प्रायद्वीप पर कूटनीतिक चैनल लगभग बंद हैं और दोनों पक्ष अपनी सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले हफ्तों में अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के बीच त्रिपक्षीय सुरक्षा समन्वय और तेज़ होने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।