उत्तर कोरिया का टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण, 12 अक्टूबर को 900+ किमी मारक क्षमता का दावा
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया ने 12 अक्टूबर 2026 को एक टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया, जिसे प्योंगयांग की सरकारी मीडिया ने 'बड़ी सफलता' करार दिया है। कोरियन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी (KCNA) के अनुसार, इस परीक्षण का उद्देश्य हथियार प्रणाली के एक अहम तकनीकी घटक के उन्नयन की पुष्टि करना था। यह इस साल उत्तर कोरिया का 16वाँ बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण है।
मुख्य घटनाक्रम
उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रशासन ने दावा किया कि यह उन्नयन सभी आक्रामक हथियार प्रणालियों की क्षमता और तकनीकी स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक 'महत्वपूर्ण बदलाव' है। हालाँकि, प्रशासन ने परीक्षण की विस्तृत तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की।
दक्षिण कोरिया की ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) ने पहले ही 12 अक्टूबर को पुष्टि की थी कि प्योंगयांग क्षेत्र से पूर्वी सागर की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं। इनमें से एक मिसाइल ने 900 किलोमीटर से अधिक दूरी तय की। जापान के रक्षा मंत्रालय ने भी कहा कि उत्तर कोरिया ने कम से कम दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं — एक ने 220 किलोमीटर और दूसरी ने 910 किलोमीटर से अधिक दूरी तय की। अमेरिकी पैसिफिक कमांड (PACOM) ने भी इस प्रक्षेपण में दो बैलिस्टिक मिसाइलों की भागीदारी की पुष्टि की।
मिसाइल की संभावित श्रेणी
JCS के प्रवक्ता कैप्टन जांग डो-यंग ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को कहा, 'संभव है कि उत्तर कोरिया ने कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल को उसकी अधिकतम सीमा तक दागा हो। यह भी संभव है कि उसने मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल को कम दूरी पर परीक्षण के लिए लॉन्च किया हो।'
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता 300 से 1,000 किलोमीटर तक होती है, जबकि मध्यम दूरी की मिसाइलें 1,000 से 3,000 किलोमीटर तक मार कर सकती हैं। दक्षिण कोरिया और अमेरिकी अधिकारी अब इन मिसाइलों की तकनीकी विशेषताओं का विस्तृत विश्लेषण कर रहे हैं।
क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि
यह परीक्षण ऐसे समय में आया है जब प्रायद्वीप पर तनाव पहले से बढ़ा हुआ था। इससे ठीक चार दिन पहले दक्षिण कोरिया ने अपने स्वदेशी हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) के पहले सफल परीक्षण की सार्वजनिक घोषणा की थी, जिसमें राष्ट्रपति ली जे म्युंग स्वयं उपस्थित थे। विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण कोरिया का यह कदम उत्तर कोरिया को अपनी प्रतिरोधक क्षमता का संदेश देने के लिए था।
गौरतलब है कि इससे पहले 21 सितंबर को असैन्यीकृत क्षेत्र (DMZ) में हुए लैंडमाइन विस्फोट में दक्षिण कोरिया के तीन सैनिक घायल हो गए थे। उत्तर कोरिया ने इससे पहले 3 अक्टूबर को भी मिसाइल लॉन्च किया था।
हाइपरसोनिक हथियारों का बढ़ता महत्व
हाइपरसोनिक मिसाइलों को अक्सर युद्धक्षेत्र में 'गेम चेंजर' माना जाता है क्योंकि ये मैक-5 या उससे अधिक गति से उड़ सकती हैं और पारंपरिक मिसाइलों से भिन्न प्रक्षेप पथ पर चलती हैं, जिससे इन्हें ट्रैक करना और रोकना बेहद कठिन हो जाता है। दोनों कोरिया द्वारा उन्नत मिसाइल क्षमताओं को सार्वजनिक करना इस क्षेत्र में हथियारों की होड़ के एक नए चरण का संकेत देता है।
सहयोगी देशों की प्रतिक्रिया
कैप्टन जांग डो-यंग ने स्पष्ट किया कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका की संयुक्त रक्षा तैयारियाँ मजबूत हैं और दोनों देश उत्तर कोरिया की मिसाइलों का पता लगाने व उन्हें रोकने में पूरी तरह सक्षम हैं। यह वर्ष का 16वाँ उत्तर कोरियाई बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण है — एक स्तर जो कोरियाई प्रायद्वीप पर दीर्घकालिक सुरक्षा चिंताओं को और गहरा करता है।