4 अक्टूबर 2026
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उत्तर कोरिया ने दागी हाइपरसोनिक मध्यम दूरी की मिसाइल, किम जोंग-उन ने परमाणु निरोधक क्षमता तेज करने का दिया आदेश

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उत्तर कोरिया ने दागी हाइपरसोनिक मध्यम दूरी की मिसाइल, किम जोंग-उन ने परमाणु निरोधक क्षमता तेज करने का दिया आदेश

सारांश

उत्तर कोरिया ने हाइपरसोनिक मध्यम दूरी की मिसाइल दागकर एक बार फिर कोरियाई प्रायद्वीप को तनाव की आग में झोंक दिया है। डीएमजेड धमाके के बाद यह परीक्षण किम जोंग-उन का स्पष्ट संदेश है — परमाणु निरोधक क्षमता से कोई समझौता नहीं होगा।

मुख्य बातें

उत्तर कोरिया ने शनिवार तड़के पूर्वी सागर की दिशा में हाइपरसोनिक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जिसने करीब 1,000 किलोमीटर दूर लक्ष्य को भेदा।
किम जोंग-उन ने बेटी जू-ए और पत्नी री सोल-जू के साथ लॉन्च देखा और परमाणु निरोधक क्षमता तेजी से विकसित करने का निर्देश दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार दागी गई मिसाइल 'हवासोंग-16 ना' हाइपरसोनिक मिसाइल हो सकती है, जो कम ऊंचाई पर उड़ते हुए रास्ता बदलने में सक्षम है।
किम यो-जोंग ने दावा किया कि दक्षिण कोरिया और जापान की सेनाएं मिसाइल का पूरा मार्ग ट्रैक करने में नाकाम रहीं।
यह परीक्षण 21 सितंबर 2026 के डीएमजेड बारूदी सुरंग धमाके के बाद हुआ, जिसमें दक्षिण कोरिया के तीन सैनिक घायल हुए थे।
उत्तर कोरिया ने डीएमजेड घटना की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया और किसी भी जवाबी कार्रवाई पर 'बेरहमी से' जवाब देने की चेतावनी दी।

उत्तर कोरिया ने शनिवार तड़के पूर्वी सागर की दिशा में एक मध्यम दूरी की हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया, जिसने करीब 1,000 किलोमीटर दूर अपने लक्ष्य को निशाना बनाया। किम जोंग-उन ने इस लॉन्च के दौरान अपनी बेटी जू-ए और पत्नी री सोल-जू के साथ मौजूद रहकर देश की 'हाइपरसोनिक रणनीतिक हथियार प्रणाली' की क्षमता का प्रदर्शन किया। उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया केसीएनए ने रविवार को पुष्टि करते हुए बताया कि किम ने हमलावर हथियारों की मारक क्षमता लगातार बढ़ाते रहने का निर्देश दिया है।

मिसाइल परीक्षण का विवरण

कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के अनुसार, यह परीक्षण उन मिसाइल यूनिट्स की ट्रेनिंग का हिस्सा था जो 'हाइपरसोनिक रणनीतिक हथियार प्रणाली' को संचालित करती हैं। मिसाइल को उत्तर-पूर्व दिशा में दागा गया और उसने पूर्वी सागर में अपने निर्धारित लक्ष्य को भेदा। रिपोर्टों के अनुसार, यह मिसाइल कम ऊंचाई पर उड़ते हुए अपना रास्ता बदलने में सक्षम थी, जो इसे मौजूदा रक्षा प्रणालियों के लिए कठिन लक्ष्य बनाती है।

विशेषज्ञों ने अनुमान जताया है कि यह 'हवासोंग-16 ना' हाइपरसोनिक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल हो सकती है। वहीं दक्षिण कोरिया की सेना ने अपने आकलन में कहा कि मिसाइल ने 700 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की — हालांकि उत्तर कोरिया का दावा 1,000 किलोमीटर का है।

किम जोंग-उन का संदेश

केसीएनए के अनुसार, किम जोंग-उन ने कहा, 'हमें लगातार और जिम्मेदारी के साथ कोशिश करते रहना चाहिए, ताकि दुश्मन बार-बार हमारे रणनीतिक हमलावर हथियारों की भरोसेमंद क्षमता और उनकी मारक ताकत को समझ सके।' किम ने इस लॉन्च को देश की परमाणु युद्ध-निरोधक क्षमता को और तीव्र गति से विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तर कोरियाई सेना के जवाबी हमला करने वाले साधनों को हमेशा तत्पर स्थिति में रखना और उनकी क्षमता का प्रदर्शन करना अत्यंत आवश्यक है।

किम यो-जोंग का दावा और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया

किम जोंग-उन की प्रभावशाली बहन किम यो-जोंग ने शनिवार को ही मिसाइल लॉन्च की जानकारी सार्वजनिक कर दी। उन्होंने दावा किया कि दक्षिण कोरिया और जापान की सेनाएं अपनी ट्रैकिंग प्रणालियों की सीमाओं के कारण मिसाइल का पूरा मार्ग ट्रैक कर पाने में विफल रहीं। यह दावा कितना सटीक है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

दक्षिण कोरिया की सेना ने मिसाइल लॉन्च की पुष्टि करते हुए वोनसान इलाके से इसके दागे जाने का उल्लेख किया। सियोल और टोक्यो ने इस परीक्षण की तीखी निंदा की है।

डीएमजेड विस्फोट की पृष्ठभूमि में बढ़ता तनाव

यह मिसाइल परीक्षण ऐसे संवेदनशील समय पर हुआ है, जब कोरियाई प्रायद्वीप पर पहले से तनाव बढ़ा हुआ है। 21 सितंबर 2026 को डीमिलिटराइज्ड जोन (डीएमजेड) के भीतर बारूदी सुरंग में हुए एक धमाके में दक्षिण कोरिया के तीन सैनिक घायल हो गए थे। दक्षिण कोरिया की सेना ने इस घटना के लिए उत्तर कोरिया को जिम्मेदार ठहराया और इसे 1950-53 के कोरियाई युद्ध को समाप्त करने वाले युद्धविराम समझौते का 'खुला उल्लंघन' करार दिया।

सियोल ने प्योंगयांग से माफी और जिम्मेदारी स्वीकार करने की मांग की। उत्तर कोरिया ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए दक्षिण कोरिया पर जांच के नतीजे 'गढ़ने' का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि किसी भी जवाबी कार्रवाई का वह 'बेरहमी से' उत्तर देगा।

क्या होगा आगे

यह परीक्षण उत्तर कोरिया की उस रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है जिसमें वह नियमित अंतराल पर अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन कर क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करने की कोशिश करता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि हाइपरसोनिक मिसाइल प्रौद्योगिकी का लगातार विकास आने वाले समय में इस क्षेत्र में सुरक्षा समीकरणों को और जटिल बना सकता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस परीक्षण पर प्रतिक्रिया की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दक्षिण कोरिया-अमेरिका के सैन्य गठबंधन के लिए गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। मुख्यधारा की कवरेज मिसाइल की दूरी पर केंद्रित है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या वाशिंगटन, सियोल और टोक्यो के पास अब भी एक समन्वित प्रतिरोध रणनीति है — जब अमेरिकी घरेलू राजनीति का ध्यान कहीं और है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर कोरिया ने इस बार कौन-सी मिसाइल दागी और इसकी खासियत क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार उत्तर कोरिया ने संभवतः 'हवासोंग-16 ना' हाइपरसोनिक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जो करीब 1,000 किलोमीटर दूर अपने लक्ष्य तक पहुंची। यह मिसाइल कम ऊंचाई पर उड़ते हुए अपना रास्ता बदलने में सक्षम है, जिससे इसे रोकना मुश्किल हो जाता है।
किम जोंग-उन ने इस मिसाइल परीक्षण के जरिए क्या संदेश दिया?
किम जोंग-उन ने केसीएनए के माध्यम से कहा कि देश की परमाणु युद्ध-निरोधक क्षमता को तेजी से विकसित करना और दुश्मनों को हमलावर हथियारों की मारक ताकत का एहसास कराते रहना जरूरी है। उन्होंने इसे देश की सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताया।
दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच ताजा तनाव की वजह क्या है?
21 सितंबर 2026 को डीमिलिटराइज्ड जोन में हुए बारूदी सुरंग विस्फोट में दक्षिण कोरिया के तीन सैनिक घायल हो गए थे। दक्षिण कोरिया ने इसे उत्तर कोरिया की करतूत और युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताया, जबकि उत्तर कोरिया ने आरोप खारिज कर दिया।
किम यो-जोंग ने क्या दावा किया और इसका क्या महत्व है?
किम जोंग-उन की बहन और करीबी सहयोगी किम यो-जोंग ने दावा किया कि दक्षिण कोरिया और जापान की सेनाएं अपनी ट्रैकिंग क्षमताओं की सीमाओं के चलते मिसाइल का पूरा मार्ग ट्रैक नहीं कर पाईं। यह दावा उत्तर कोरिया की मिसाइल प्रौद्योगिकी में आत्मविश्वास और क्षेत्रीय रक्षा प्रणालियों को चुनौती देने की मंशा दर्शाता है।
इस मिसाइल परीक्षण का क्षेत्रीय सुरक्षा पर क्या असर पड़ सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार हाइपरसोनिक मिसाइलों का लगातार विकास दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका की मौजूदा मिसाइल-रोधी प्रणालियों को अप्रभावी बना सकता है। यह परीक्षण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नई प्रतिक्रिया और कोरियाई प्रायद्वीप पर सैन्य तैनाती की समीक्षा को मजबूर कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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