आजम खान के 350 मुकदमों के खिलाफ सपा का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, PM को सौंपा ज्ञापन
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ताओं ने 20 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया और उनकी रिहाई तथा उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की माँग की। पार्टी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वर्ष 2019 में केवल 3-4 महीनों की अवधि में आजम खान और उनके परिवार पर 350 आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए, जो उनके अनुसार राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम है।
प्रदर्शन का घटनाक्रम
सपा के राष्ट्रीय सचिव और जौनपुर से पूर्व विधायक मोहम्मद अरशद खान के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता रविवार को जंतर-मंतर पहुँचे। उनका आरोप है कि पुलिस ने चारों ओर बैरिकेडिंग करके उन्हें वहाँ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोक दिया, जबकि उनके पास इसकी अनुमति थी। इसके बाद सपा कार्यकर्ताओं ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया।
मोहम्मद अरशद खान ने कहा, 'हमारे पास प्रदर्शन की अनुमति थी, लेकिन पुलिस ने इसे एकाएक रद्द कर दिया।' उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के विरुद्ध बताया।
350 मुकदमों पर सपा का आरोप
मोहम्मद अरशद खान ने कहा कि 2019 के विधानसभा चुनाव में आजम खान की जीत के बाद उन पर और उनके परिवार के सदस्यों — अब्दुल्ला आजम खान सहित — के खिलाफ तकरीबन 350 मुकदमे दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि इतने कम समय में एक ही परिवार पर इतनी बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज होना 'सरकारी साजिश' की ओर इशारा करता है।
पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें लिखा गया — 'एक ही परिवार पर इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज होना प्रथम दृष्टया राजनीतिक प्रतिशोध और प्रशासनिक दुरूपयोग की आशंका को जन्म देता है। इससे यह संदेह गहरा होता है कि क्या इतने मुकदमे वास्तविक अपराधों पर आधारित हैं या राजनीतिक विरोध की कीमत वसूलने के लिए दर्ज किए गए हैं।'
जौहर यूनिवर्सिटी पर ध्वस्तीकरण का नोटिस
रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी भी इस विरोध प्रदर्शन का केंद्रीय मुद्दा रही। सपा नेताओं के अनुसार रामपुर विकास प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय के 38 भवनों को ध्वस्त करने का नोटिस जारी किया है, जो लगभग तीन महीने पहले दिया गया था। ज्ञापन में माँग की गई कि इस नोटिस को तत्काल निरस्त किया जाए और अंतिम निर्णय तक किसी भी ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
अरशद खान ने कहा कि यह मामला केवल इमारतों का नहीं, बल्कि उन हजारों छात्रों के भविष्य का सवाल है जो इस विश्वविद्यालय से जुड़े हैं। उन्होंने दावा किया कि जौहर यूनिवर्सिटी 'जायज तरीके से' बनी है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति में दशकों से एक प्रमुख चेहरा रहे हैं और रामपुर से कई बार विधायक चुने गए हैं। उन पर दर्ज मुकदमों में भूमि विवाद, धोखाधड़ी और अन्य आरोप कथित तौर पर शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ दल और सपा के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही बना हुआ है। गौरतलब है कि सपा यह भी आरोप लगाती रही है कि प्रशासनिक मशीनरी का उपयोग विपक्षी नेताओं को कमज़ोर करने के लिए किया जा रहा है।
आगे क्या
सपा नेताओं ने कहा कि यदि मुकदमे वापस नहीं लिए गए और जौहर यूनिवर्सिटी पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं रोकी गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।