जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण पर सपा का जंतर-मंतर पर धरना, राष्ट्रपति से SIT गठन की माँग
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को जारी ध्वस्तीकरण नोटिस और मोहम्मद आजम खान तथा उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम खान सहित परिवार के सदस्यों के खिलाफ दर्ज मुकदमों के विरोध में 20 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन का आह्वान किया है। पार्टी ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) गठित किए जाने की माँग की है।
ध्वस्तीकरण नोटिस का मामला
सपा के राष्ट्रीय सचिव और जौनपुर सदर के पूर्व विधायक मोहम्मद अरशद खान की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई केवल इमारतों तक सीमित नहीं है। पार्टी का तर्क है कि इस कदम से हज़ारों विद्यार्थियों की शिक्षा, शिक्षकों के रोज़गार और चल रहे शोध कार्य का भविष्य भी सीधे प्रभावित हो सकता है। सपा ने माँग की है कि ध्वस्तीकरण नोटिस के वैधानिक आधार की स्वतंत्र समीक्षा पूरी होने तक किसी भी कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
मुकदमों पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
पत्र में दावा किया गया है कि वर्ष 2019 में मोहम्मद आजम खान, अब्दुल्ला आजम खान और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ केवल तीन से चार महीने की अवधि में करीब 350 मुकदमे दर्ज किए गए। सपा का आरोप है कि इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज होना राजनीतिक प्रतिशोध और प्रशासनिक दुरुपयोग की आशंका को जन्म देता है। गौरतलब है कि आजम खान उत्तर प्रदेश के प्रमुख विपक्षी नेताओं में से एक रहे हैं और उनसे जुड़े विवाद लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र बने हुए हैं।
संवैधानिक अधिकारों की दुहाई
पत्र में संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का हवाला देते हुए निष्पक्ष सुनवाई की माँग की गई है। सपा ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान के लिए न्यायसम्मत कानूनी प्रक्रिया तथा कानून के अनुसार जमानत का अधिकार सुनिश्चित किए जाने की भी अपील की है।
SIT जांच और राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की माँग
सपा ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि सभी मामलों की एकीकृत और समग्र जाँच के लिए सर्वोच्च न्यायालय के सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र SIT बनाई जाए। पार्टी का कहना है कि यह जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध होनी चाहिए ताकि वास्तविक तथ्यों के आधार पर न्याय सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही पार्टी ने 38 भवनों का ध्वस्तीकरण नोटिस वापस लेने और अंतिम न्यायिक निर्णय तक कार्रवाई पर रोक लगाने की भी माँग की है।
आगे क्या होगा
जंतर-मंतर धरने के ज़रिये सपा इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश कर रही है। यह विरोध ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी दल सरकार की प्रशासनिक कार्रवाइयों को लेकर लगातार सक्रिय हैं। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मामले का अगला मोड़ इस बात पर निर्भर करेगा कि न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाएँ इन माँगों पर क्या रुख अपनाती हैं।