पाकिस्तान: PTI के 4 कार्यकर्ता गिरफ्तार, 27 सितंबर के विरोध से पहले पुलिस सतर्क; वित्त मंत्री बोले '₹120 अरब रोज़ का नुकसान'
सारांश
मुख्य बातें
इस्लामाबाद पुलिस ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के चार कार्यकर्ताओं और सदस्यों को हिरासत में ले लिया है — यह गिरफ्तारियाँ ऐसे समय में हुई हैं जब PTI ने 27 सितंबर 2026 को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और जमात-ए-इस्लामी (JI) ने इस्लामाबाद मार्च का ऐलान किया है। पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेजी दैनिक 'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, एक सब-इंस्पेक्टर की शिकायत पर इन कार्यकर्ताओं को अलग-अलग आरोपों में गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तारियाँ और पुलिस का दावा
पुलिस के अनुसार, उसे सूचना मिली थी कि PTI कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन की तैयारी के सिलसिले में बैठक कर रहे हैं। पुलिस का दावा है कि जब उसने बैठक स्थल पर छापा मारा, तो कार्यकर्ताओं ने पुलिस टीम के साथ मारपीट की, उनकी वर्दी फाड़ दी और उन्हें कथित तौर पर बंधक भी बनाया। यह आरोप PTI की ओर से स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किए गए हैं।
सुरक्षा की व्यापक तैयारी
इस्लामाबाद के सेंट्रल पुलिस ऑफिस में एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई गई, जिसमें विरोध प्रदर्शन को रोकने की रणनीति पर विचार किया गया। सुरक्षा एजेंसियाँ गेस्ट हाउस, सराय, बस टर्मिनल और उन संभावित ठेकेदारों पर नज़र रख रही हैं जो प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन, पानी, आवास और परिवहन की व्यवस्था कर सकते हैं। स्पेशल ब्रांच और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) भी पूरी तरह सतर्क हैं।
खुफिया इकाइयाँ PTI के नेताओं, सदस्यों और कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर नज़र रखे हुए हैं — यहाँ तक कि उन ठिकानों पर भी निगरानी है जहाँ संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए नेता रह रहे हों।
PTI और JI की माँगें
PTI ने 27 सितंबर के अपने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई, संवैधानिक अधिकारों की बहाली और देश में कानून के राज की माँग रखी है। वहीं, जमात-ए-इस्लामी ने एक अलग इस्लामाबाद मार्च की घोषणा की है, जिसकी माँगें PTI से भिन्न हैं। गौरतलब है कि दोनों प्रमुख विपक्षी ताकतों का एक साथ सक्रिय होना पाकिस्तान की वर्तमान सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।
वित्त मंत्री की चेतावनी
पाकिस्तान के वित्त मंत्री औरंगजेब ने रविवार को अपने संदेश में कहा कि धरना-प्रदर्शनों से देश के सरकारी खजाने को प्रतिदिन 120 अरब रुपये तक का नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा, 'ऐसे विरोध-प्रदर्शनों को समझना मुश्किल है, खासकर तब जब पाकिस्तान ने आर्थिक स्थिरता हासिल करने के लिए काफी कोशिशें की हैं।' उन्होंने चेतावनी दी कि आर्थिक गतिविधियों में रुकावट से देश की स्थिरता से विकास की ओर बढ़ने की प्रक्रिया कमज़ोर पड़ सकती है।
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सहायता पर बड़े पैमाने पर निर्भर है और बलूचिस्तान तथा पाक-अधिकृत कश्मीर (POK) में आंतरिक तनाव चरम पर है।
आगे की संभावनाएँ
27 सितंबर से पहले के अगले कुछ दिन पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। यदि PTI और JI के प्रदर्शन बड़े पैमाने पर हुए, तो यह सरकार के लिए गंभीर राजनीतिक और आर्थिक दबाव का कारण बन सकता है। आलोचकों का कहना है कि विपक्षी कार्यकर्ताओं की पूर्व-निरोधक गिरफ्तारी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़ा करती है।