चीन में एआई क्रांति: युवा प्रोग्रामरों से डिलीवरी वर्करों तक, नौकरियों पर बढ़ता संकट
सारांश
मुख्य बातें
चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अपनाने की रफ्तार ने श्रम बाज़ार में हलचल मचा दी है — सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से लेकर डिलीवरी सर्विस तक, हर क्षेत्र में कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। रिपोर्टों के अनुसार, बीजिंग अर्थव्यवस्था के लगभग हर सेक्टर में एआई को तेज़ी से शामिल कर रहा है, जिससे प्रोडक्टिविटी तो बढ़ रही है, लेकिन लाखों युवाओं की नौकरियाँ दाँव पर लग गई हैं।
एक प्रोग्रामर की कहानी: एआई ने छीनी नौकरी
बीजिंग के प्रोग्रामर फेई झाओजुन उन कर्मचारियों में शामिल हैं जो इस तकनीकी बदलाव की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। जब उनकी कंपनी ने यह परखना शुरू किया कि क्या एआई, इंसानों वाले कोडिंग कार्य कर सकता है, तो कॉर्पोरेट छंटनी के दौर में करीब 160 कर्मचारियों की नौकरी चली गई — फेई भी उनमें थे।
फेई का कहना है कि एआई की क्षमता लगातार बेहतर हो रही है और मिड-लेवल प्रोग्रामिंग की अनेक नौकरियाँ अब आसानी से स्वचालित की जा सकती हैं। नौकरी जाने के बाद उन्होंने टेक इंडस्ट्री से दूरी बना ली है, अब शॉर्ट वीडियो बना रहे हैं और अगले करियर की दिशा तलाश रहे हैं।
एआई अपनाने की चौंकाने वाली रफ्तार
मार्केट इंटेलिजेंस फर्म आईडीसी के आँकड़ों के अनुसार, 2024 में 10 प्रतिशत से भी कम चीनी औद्योगिक कंपनियाँ एआई मॉडल और एजेंट का इस्तेमाल कर रही थीं। 2025 में यह आँकड़ा बढ़कर लगभग 50 प्रतिशत हो गया।
यह छलाँग बताती है कि कंपनियाँ लागत घटाने और काम में तेज़ी लाने के लिए एआई को किस गति से अपना रही हैं। गौरतलब है कि यह बदलाव केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है — लॉजिस्टिक्स, ट्रैफिक मैनेजमेंट और खाद्य वितरण जैसी रोज़मर्रा की सेवाओं तक भी पहुँच चुका है।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बदलाव
लॉजिस्टिक्स केंद्रों में ह्यूमनॉइड रोबोट तैनात किए जा रहे हैं जो पार्सल छाँटने का काम करते हैं, जबकि स्वायत्त मशीनें ट्रैफिक प्रबंधन जैसे कार्य सँभाल रही हैं। शहरों में फूड डिलीवरी रोबोट भी आम होते जा रहे हैं, जिससे डिलीवरी सेवाओं में लगे लाखों कर्मचारियों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता उभर रही है।
यह ऐसे समय में हो रहा है जब चीन के युवा पहले से ही कठिन श्रम बाज़ार का सामना कर रहे हैं।
युवा बेरोज़गारी पर दोहरी मार
चीन में शहरी बेरोज़गारी दर लगभग 5 प्रतिशत है, लेकिन 16 से 24 वर्ष आयु वर्ग के उन युवाओं में — जो पढ़ाई नहीं कर रहे — यह दर राष्ट्रीय औसत से लगभग तीन गुना अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर ऑटोमेशन से युवाओं के लिए स्थिर रोज़गार पाना और भी कठिन हो सकता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि एआई के आर्थिक फ़ायदे स्पष्ट हैं — ऑटोमेशन से उत्पादकता बढ़ेगी और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। हालाँकि, उनकी चेतावनी है कि यदि नए रोज़गार के अवसर तेज़ी से नहीं बने, तो व्यापक छँटनी से बेरोज़गारी का दबाव बढ़ सकता है और सामाजिक अस्थिरता भी उभर सकती है।
यह बहस अब केवल चीन तक सीमित नहीं — भारत सहित दुनिया के हर बड़े देश में एआई और रोज़गार के बीच का यह टकराव नीति निर्माताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।