20 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

चीन में एआई क्रांति: युवा प्रोग्रामरों से डिलीवरी वर्करों तक, नौकरियों पर बढ़ता संकट

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
चीन में एआई क्रांति: युवा प्रोग्रामरों से डिलीवरी वर्करों तक, नौकरियों पर बढ़ता संकट

सारांश

चीन में एआई अपनाने की दर महज़ एक साल में 10% से 50% तक पहुँच गई। बीजिंग के प्रोग्रामर फेई झाओजुन जैसे सैकड़ों युवा पहले ही नौकरी गँवा चुके हैं। डिलीवरी रोबोट और ह्यूमनॉइड मशीनें आने से लाखों और के रोज़गार दाँव पर हैं — और युवा बेरोज़गारी राष्ट्रीय औसत से तीन गुना अधिक है।

मुख्य बातें

आईडीसी के अनुसार चीन में एआई अपनाने की दर 2024 में 10% से कम थी, जो 2025 में ~50% हो गई।
बीजिंग के प्रोग्रामर फेई झाओजुन सहित एक कंपनी में करीब 160 कर्मचारियों की नौकरी एआई परीक्षण के बाद चली गई।
लॉजिस्टिक्स में ह्यूमनॉइड रोबोट और शहरों में फूड डिलीवरी रोबोट डिलीवरी सेक्टर के लाखों कर्मचारियों को प्रभावित कर रहे हैं।
चीन में 16-24 वर्ष आयु वर्ग की युवा बेरोज़गारी राष्ट्रीय शहरी औसत ( ~5% ) से लगभग तीन गुना अधिक है।
अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी कि नए रोज़गार जल्दी न बने तो सामाजिक अस्थिरता का ख़तरा बढ़ सकता है।

चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अपनाने की रफ्तार ने श्रम बाज़ार में हलचल मचा दी है — सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से लेकर डिलीवरी सर्विस तक, हर क्षेत्र में कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। रिपोर्टों के अनुसार, बीजिंग अर्थव्यवस्था के लगभग हर सेक्टर में एआई को तेज़ी से शामिल कर रहा है, जिससे प्रोडक्टिविटी तो बढ़ रही है, लेकिन लाखों युवाओं की नौकरियाँ दाँव पर लग गई हैं।

एक प्रोग्रामर की कहानी: एआई ने छीनी नौकरी

बीजिंग के प्रोग्रामर फेई झाओजुन उन कर्मचारियों में शामिल हैं जो इस तकनीकी बदलाव की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। जब उनकी कंपनी ने यह परखना शुरू किया कि क्या एआई, इंसानों वाले कोडिंग कार्य कर सकता है, तो कॉर्पोरेट छंटनी के दौर में करीब 160 कर्मचारियों की नौकरी चली गई — फेई भी उनमें थे।

फेई का कहना है कि एआई की क्षमता लगातार बेहतर हो रही है और मिड-लेवल प्रोग्रामिंग की अनेक नौकरियाँ अब आसानी से स्वचालित की जा सकती हैं। नौकरी जाने के बाद उन्होंने टेक इंडस्ट्री से दूरी बना ली है, अब शॉर्ट वीडियो बना रहे हैं और अगले करियर की दिशा तलाश रहे हैं।

एआई अपनाने की चौंकाने वाली रफ्तार

मार्केट इंटेलिजेंस फर्म आईडीसी के आँकड़ों के अनुसार, 2024 में 10 प्रतिशत से भी कम चीनी औद्योगिक कंपनियाँ एआई मॉडल और एजेंट का इस्तेमाल कर रही थीं। 2025 में यह आँकड़ा बढ़कर लगभग 50 प्रतिशत हो गया।

यह छलाँग बताती है कि कंपनियाँ लागत घटाने और काम में तेज़ी लाने के लिए एआई को किस गति से अपना रही हैं। गौरतलब है कि यह बदलाव केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है — लॉजिस्टिक्स, ट्रैफिक मैनेजमेंट और खाद्य वितरण जैसी रोज़मर्रा की सेवाओं तक भी पहुँच चुका है।

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बदलाव

लॉजिस्टिक्स केंद्रों में ह्यूमनॉइड रोबोट तैनात किए जा रहे हैं जो पार्सल छाँटने का काम करते हैं, जबकि स्वायत्त मशीनें ट्रैफिक प्रबंधन जैसे कार्य सँभाल रही हैं। शहरों में फूड डिलीवरी रोबोट भी आम होते जा रहे हैं, जिससे डिलीवरी सेवाओं में लगे लाखों कर्मचारियों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता उभर रही है।

यह ऐसे समय में हो रहा है जब चीन के युवा पहले से ही कठिन श्रम बाज़ार का सामना कर रहे हैं।

युवा बेरोज़गारी पर दोहरी मार

चीन में शहरी बेरोज़गारी दर लगभग 5 प्रतिशत है, लेकिन 16 से 24 वर्ष आयु वर्ग के उन युवाओं में — जो पढ़ाई नहीं कर रहे — यह दर राष्ट्रीय औसत से लगभग तीन गुना अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर ऑटोमेशन से युवाओं के लिए स्थिर रोज़गार पाना और भी कठिन हो सकता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि एआई के आर्थिक फ़ायदे स्पष्ट हैं — ऑटोमेशन से उत्पादकता बढ़ेगी और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। हालाँकि, उनकी चेतावनी है कि यदि नए रोज़गार के अवसर तेज़ी से नहीं बने, तो व्यापक छँटनी से बेरोज़गारी का दबाव बढ़ सकता है और सामाजिक अस्थिरता भी उभर सकती है।

यह बहस अब केवल चीन तक सीमित नहीं — भारत सहित दुनिया के हर बड़े देश में एआई और रोज़गार के बीच का यह टकराव नीति निर्माताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि उसी की वजह से युवा बेरोज़गारी — जो पहले से राष्ट्रीय औसत से तीन गुना है — और विकराल हो सकती है। मुख्यधारा की कवरेज तकनीकी क्षमता पर केंद्रित रहती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या चीन — या कोई भी देश — इस गति से होने वाले विस्थापन के लिए पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा जाल तैयार कर पाया है। भारत के लिए यह एक चेतावनी है: एआई-नीति और रोज़गार-नीति को साथ-साथ चलाना होगा।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन में एआई से किन नौकरियों पर सबसे अधिक खतरा है?
रिपोर्टों के अनुसार, मिड-लेवल प्रोग्रामिंग, लॉजिस्टिक्स, पार्सल सॉर्टिंग और फूड डिलीवरी जैसे क्षेत्रों में नौकरियाँ सबसे तेज़ी से प्रभावित हो रही हैं। ह्यूमनॉइड रोबोट और स्वायत्त मशीनें इन कार्यों को इंसानों की तुलना में कम लागत में करने में सक्षम हो रही हैं।
चीन में एआई अपनाने की दर इतनी तेज़ क्यों है?
आईडीसी के आँकड़ों के अनुसार, 2024 में 10% से कम चीनी औद्योगिक कंपनियाँ एआई का इस्तेमाल कर रही थीं, जो 2025 में लगभग 50% हो गई। कंपनियाँ लागत कम करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए इस तकनीक को तेज़ी से अपना रही हैं, और बीजिंग की नीतियाँ भी एआई को बढ़ावा दे रही हैं।
चीन में युवा बेरोज़गारी की स्थिति क्या है?
चीन में शहरी बेरोज़गारी दर लगभग 5% है, लेकिन 16 से 24 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में — जो पढ़ाई नहीं कर रहे — यह दर राष्ट्रीय औसत से लगभग तीन गुना अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑटोमेशन से यह खाई और गहरी हो सकती है।
एआई से नौकरी जाने के बाद कर्मचारी क्या कर रहे हैं?
फेई झाओजुन जैसे विस्थापित कर्मचारी टेक सेक्टर से दूर जाकर वैकल्पिक रोज़गार तलाश रहे हैं — जैसे शॉर्ट वीडियो कंटेंट बनाना। हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नए क्षेत्रों में पर्याप्त अवसर नहीं बने, तो यह बदलाव स्थायी सामाजिक दबाव पैदा कर सकता है।
क्या एआई से नौकरियाँ जाना केवल चीन की समस्या है?
नहीं — यह वैश्विक चुनौती है। चीन में यह बदलाव विशेष रूप से तेज़ गति से हो रहा है, लेकिन भारत सहित अन्य देशों में भी एआई-जनित विस्थापन की आशंका नीति निर्माताओं के लिए बड़ी चिंता का विषय बन रही है। अर्थशास्त्री मानते हैं कि यदि नए रोज़गार पर्याप्त तेज़ी से नहीं बने, तो सामाजिक अस्थिरता का जोखिम बढ़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले