चीन की टेक कंपनियों ने 18 महीनों में 1.3 लाख कर्मचारियों की छंटनी की, एआई बना बड़ा कारण
सारांश
मुख्य बातें
चीन की प्रमुख टेक कंपनियों — अलीबाबा, टेनसेंट, बाइटडांस, मीतुआन और बायडू — ने पिछले 18 महीनों में मिलकर 1.3 लाख से अधिक कर्मचारियों की छंटनी की है। रिपोर्टों के अनुसार, यह कटौती कंपनियों के घाटे के कारण नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अपनाने और कारोबारी कुशलता बढ़ाने की रणनीति के तहत की जा रही है। इस व्यापक छंटनी पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की चुप्पी को लेकर आलोचकों ने सवाल उठाए हैं।
किस कंपनी में कितनी छंटनी
अलीबाबा में कर्मचारियों की संख्या करीब 1.94 लाख से घटकर 1.28 लाख रह गई है — यानी लगभग 34 प्रतिशत की कमी। बायडू ने करीब 10,000 कर्मचारियों की छंटनी की है, जबकि जेडी डॉट कॉम करीब 12,000 नौकरियाँ खत्म करने की योजना बना रही है।
यात्रा, कंटेंट और ई-कॉमर्स सपोर्ट से जुड़े कुछ विभागों में कर्मचारियों की संख्या 30 से 50 प्रतिशत तक घटाई गई है। गौरतलब है कि यह छंटनी तब हो रही है जब इन कंपनियों का मुनाफा बढ़ रहा है — जो इसे पिछले दौर की मंदी-प्रेरित कटौतियों से अलग बनाता है।
एआई की भूमिका और कंपनियों की रणनीति
रिपोर्टों के अनुसार, ये कंपनियाँ एआई-आधारित उत्पादों और सेवाओं की ओर तेज़ी से बढ़ने की अपनी दीर्घकालिक रणनीति के तहत कार्यबल घटा रही हैं। अलीबाबा के 'वुकोंग' प्लेटफॉर्म जैसे एआई टूल्स ई-कॉमर्स, लाइव स्ट्रीमिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में पूरे विभागों का काम स्वचालित करने का दावा करते हैं और तथाकथित 'वन-पर्सन कंपनी' मॉडल को संभव बनाने की बात करते हैं।
इस बदलाव को बीजिंग की नीतिगत महत्वाकांक्षाओं का भी समर्थन प्राप्त है। बीजिंग के 'एआई प्लस एक्शन प्लान' के तहत वर्ष 2027 तक प्रमुख उद्योगों में 70 प्रतिशत और 2030 तक 90 प्रतिशत एआई उपयोग का लक्ष्य रखा गया है।
आम कर्मचारियों पर असर
विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि चीन में लगभग 7 करोड़ नौकरियाँ — देश के कुल कार्यबल का करीब 9.6 प्रतिशत — एआई के कारण जोखिम में हैं। इनमें सबसे अधिक खतरा युवा कर्मचारियों को बताया जा रहा है।
रिपोर्टों में बाइटडांस के एक 26 वर्षीय पूर्व कर्मचारी का उल्लेख है, जिसे कंटेंट ऑपरेशंस में छह साल काम करने के बाद नौकरी से निकाल दिया गया। उसके अनुसार, पहले बड़ी टेक कंपनी का नाम प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था, लेकिन अब वहाँ का अनुभव भी नौकरी की सुरक्षा की गारंटी नहीं रहा।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि चीन में अनौपचारिक रूप से '35 वर्ष की उम्र की सीमा' जैसी स्थिति बन गई है, जिसके तहत परिवार, होम लोन और बच्चों की जिम्मेदारी वाले 35 वर्ष के आसपास के कर्मचारियों को बड़े पैमाने पर नौकरी से निकाला जा रहा है।
सरकार की भूमिका पर सवाल
आलोचकों का कहना है कि चीनी सरकार कर्मचारियों की सुरक्षा या पुनः कौशल प्रशिक्षण के लिए ठोस नीतियाँ लागू करने के बजाय ऑटोमेशन और एआई को विकास का प्रतीक बताकर प्रोत्साहित कर रही है। सीपीसी की ओर से इस व्यापक छंटनी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एआई-प्रेरित कार्यबल पुनर्गठन तेज़ हो रहा है और भारत सहित अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएँ भी इसके संभावित प्रभावों का आकलन कर रही हैं। चीन की इस प्रवृत्ति से यह सवाल और गहरा होता जा रहा है कि क्या एआई-संचालित विकास रोज़गार सृजन के बजाय रोज़गार विस्थापन का नया दौर लेकर आएगा।