9 जुलाई 2026
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अखिलेश-अविमुक्तेश्वरानंद मुलाकात पर मनोज पांडेय का पलटवार: 'रावण भी साधु वेश में आया था'

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अखिलेश-अविमुक्तेश्वरानंद मुलाकात पर मनोज पांडेय का पलटवार: 'रावण भी साधु वेश में आया था'

सारांश

यूपी के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने अखिलेश यादव की शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात पर रामायण का हवाला देते हुए कहा — 'रावण भी साधु वेश में आया था।' साथ ही अयोध्या कारसेवक गोलीकांड और गौ संरक्षण पर सपा को घेरा।

मुख्य बातें

मनोज पांडेय ने 9 जुलाई 2026 को अखिलेश यादव की अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
पांडेय ने रामचरित मानस का संदर्भ देते हुए कहा कि रावण ने भी साधु वेश में माँ सीता का अपहरण किया था।
मंत्री ने अयोध्या में कारसेवकों पर गोलीबारी का मुद्दा उठाकर सपा पर सनातन धर्म विरोधी होने का आरोप लगाया।
100 करोड़ लोगों की गौ माता में आस्था का हवाला देते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार की गौ संरक्षण नीति की सराहना की।
पीडीए राजनीति पर पांडेय ने पूछा कि पहले की सरकारों में पाल, पटेल, कुम्हार, प्रजापति, नाई और पासवान समुदाय को सरकारी नौकरियाँ क्यों नहीं मिलीं।

उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने 9 जुलाई 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से हुई मुलाकात पर तीखी प्रतिक्रिया दी। पांडेय ने रामायण का संदर्भ देते हुए कहा कि जब रावण को माँ सीता का अपहरण करना था, तब वह साधु के वेश में आया था।

मुलाकात पर सीधा निशाना

मनोज पांडेय ने कहा कि धार्मिक गुरुओं से भेंट कर सद्बुद्धि प्राप्त करना भारतीय संस्कार का हिस्सा है और देश में अनेक धर्माचार्य हैं जिनके मार्गदर्शन से सनातन धर्म आज भी मजबूत है। हालाँकि, उन्होंने सीधे संकेत करते हुए कहा, 'रामचरित मानस में स्पष्ट उल्लेख है कि रावण ने भिक्षु का रूप धारण कर माँ सीता के साथ छल किया — इसे कोई नकार नहीं सकता।'

पांडेय ने आगे कहा कि कुछ लोग प्रभु राम और सनातन धर्म का नाम लेकर आस्था पर प्रहार करने का प्रयास कर रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसे प्रयास न पहले सफल हुए हैं और न भविष्य में होंगे।

अयोध्या कारसेवकों का संदर्भ

मंत्री ने तीखे शब्दों में कहा कि जिन लोगों के हाथ अयोध्या में निहत्थे कारसेवकों पर गोली चलवाने से 'लहू से सने' हों, उन्हें सनातनियों को उपदेश देने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की जनता ऐसे लोगों की बात सुनने को तैयार नहीं है। यह टिप्पणी सपा के उस दौर की ओर इशारा मानी जा रही है जब 1990 में तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार के कार्यकाल में कारसेवकों पर गोलीबारी हुई थी।

गौ माता और एसआईटी जाँच पर रुख

गौ संरक्षण के मुद्दे पर पांडेय ने कहा कि भारत के 100 करोड़ लोगों की गौ माता से अपार आस्था है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि किन सरकारों के कार्यकाल में गौ हत्या होती थी, और दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में गौ माता पर आघात करने की किसी की हिम्मत नहीं है।

पीडीए और जातिगत राजनीति पर प्रहार

विपक्ष के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) दावों पर मनोज पांडेय ने कहा कि लोकतंत्र में सपने देखने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन जनता तय करती है कि उसे क्या चाहिए। उन्होंने जाति के नाम पर राजनीति करने वालों को उनका इतिहास याद दिलाते हुए पूछा कि पहले की सरकारों में पाल, पटेल, कुम्हार, प्रजापति, नाई और पासवान समुदायों को सरकारी नौकरियों में स्थान क्यों नहीं मिला।

राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि अखिलेश यादव की अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब राम मंदिर चढ़ावा विवाद और धार्मिक मुद्दों पर उत्तर प्रदेश की राजनीति गर्म है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस मुलाकात को अवसरवादी राजनीति के रूप में पेश कर रही है, जबकि सपा का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि BJP की उस रणनीति का हिस्सा है जो किसी भी विपक्षी नेता की धार्मिक गुरुओं से मुलाकात को 'अवसरवाद' के रूप में प्रस्तुत करती है। विडंबना यह है कि सत्तारूढ़ दल के नेता भी धर्माचार्यों से नियमित भेंट करते हैं, फिर भी विपक्ष की ऐसी मुलाकातें 'संदिग्ध' ठहराई जाती हैं। अयोध्या गोलीकांड का संदर्भ उठाकर पांडेय ने पुरानी भावनात्मक राजनीति को ताज़ा करने की कोशिश की है, जो यूपी चुनावी चक्र में BJP का आज़माया हुआ हथियार रहा है। असली सवाल यह है कि क्या धार्मिक प्रतीकों पर यह बहस आम जनता की रोज़ी-रोटी और शासन के सवालों से ध्यान भटकाने का माध्यम तो नहीं बन रही।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोज पांडेय ने अखिलेश यादव की अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात पर क्या कहा?
यूपी कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने कहा कि रावण ने भी माँ सीता का अपहरण करने के लिए साधु का वेश धारण किया था — यह संदर्भ उन्होंने अखिलेश यादव की शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात पर परोक्ष टिप्पणी के रूप में दिया। उनका कहना था कि धर्म का नाम लेकर आस्था पर प्रहार करने वाले कभी सफल नहीं होंगे।
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कौन हैं और उनसे अखिलेश यादव की मुलाकात क्यों चर्चा में है?
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक प्रमुख शंकराचार्य हैं जो राम मंदिर चढ़ावा विवाद सहित कई धार्मिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं। अखिलेश यादव की उनसे मुलाकात उत्तर प्रदेश की राजनीतिक-धार्मिक बहस के बीच हुई, जिससे BJP ने इसे अवसरवादी राजनीति करार दिया।
मनोज पांडेय ने अयोध्या कारसेवकों का संदर्भ क्यों दिया?
पांडेय ने कहा कि जिन लोगों के हाथ अयोध्या में निहत्थे कारसेवकों पर गोली चलवाने से 'लहू से सने' हों, उन्हें सनातनियों को उपदेश देने का अधिकार नहीं। यह टिप्पणी 1990 के उस गोलीकांड की ओर इशारा मानी जा रही है जो मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री काल में हुआ था।
पीडीए राजनीति पर मनोज पांडेय का क्या रुख है?
पांडेय ने कहा कि जाति के नाम पर राजनीति करने वालों को अपना इतिहास देखना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि पहले की सरकारों में पाल, पटेल, कुम्हार, प्रजापति, नाई और पासवान समुदायों को सरकारी नौकरियों में जगह क्यों नहीं दी गई।
गौ संरक्षण पर मनोज पांडेय ने क्या बयान दिया?
पांडेय ने कहा कि भारत के 100 करोड़ लोगों की गौ माता से अपार आस्था है और योगी आदित्यनाथ की सरकार में गौ माता पर आघात करने की किसी की हिम्मत नहीं है। उन्होंने विपक्षी सरकारों पर गौ हत्या को बढ़ावा देने का परोक्ष आरोप लगाया।
राष्ट्र प्रेस
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