अखिलेश-अविमुक्तेश्वरानंद मुलाकात पर मनोज पांडेय का पलटवार: 'रावण भी साधु वेश में आया था'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने 9 जुलाई 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से हुई मुलाकात पर तीखी प्रतिक्रिया दी। पांडेय ने रामायण का संदर्भ देते हुए कहा कि जब रावण को माँ सीता का अपहरण करना था, तब वह साधु के वेश में आया था।
मुलाकात पर सीधा निशाना
मनोज पांडेय ने कहा कि धार्मिक गुरुओं से भेंट कर सद्बुद्धि प्राप्त करना भारतीय संस्कार का हिस्सा है और देश में अनेक धर्माचार्य हैं जिनके मार्गदर्शन से सनातन धर्म आज भी मजबूत है। हालाँकि, उन्होंने सीधे संकेत करते हुए कहा, 'रामचरित मानस में स्पष्ट उल्लेख है कि रावण ने भिक्षु का रूप धारण कर माँ सीता के साथ छल किया — इसे कोई नकार नहीं सकता।'
पांडेय ने आगे कहा कि कुछ लोग प्रभु राम और सनातन धर्म का नाम लेकर आस्था पर प्रहार करने का प्रयास कर रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसे प्रयास न पहले सफल हुए हैं और न भविष्य में होंगे।
अयोध्या कारसेवकों का संदर्भ
मंत्री ने तीखे शब्दों में कहा कि जिन लोगों के हाथ अयोध्या में निहत्थे कारसेवकों पर गोली चलवाने से 'लहू से सने' हों, उन्हें सनातनियों को उपदेश देने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की जनता ऐसे लोगों की बात सुनने को तैयार नहीं है। यह टिप्पणी सपा के उस दौर की ओर इशारा मानी जा रही है जब 1990 में तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार के कार्यकाल में कारसेवकों पर गोलीबारी हुई थी।
गौ माता और एसआईटी जाँच पर रुख
गौ संरक्षण के मुद्दे पर पांडेय ने कहा कि भारत के 100 करोड़ लोगों की गौ माता से अपार आस्था है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि किन सरकारों के कार्यकाल में गौ हत्या होती थी, और दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में गौ माता पर आघात करने की किसी की हिम्मत नहीं है।
पीडीए और जातिगत राजनीति पर प्रहार
विपक्ष के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) दावों पर मनोज पांडेय ने कहा कि लोकतंत्र में सपने देखने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन जनता तय करती है कि उसे क्या चाहिए। उन्होंने जाति के नाम पर राजनीति करने वालों को उनका इतिहास याद दिलाते हुए पूछा कि पहले की सरकारों में पाल, पटेल, कुम्हार, प्रजापति, नाई और पासवान समुदायों को सरकारी नौकरियों में स्थान क्यों नहीं मिला।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि अखिलेश यादव की अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब राम मंदिर चढ़ावा विवाद और धार्मिक मुद्दों पर उत्तर प्रदेश की राजनीति गर्म है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस मुलाकात को अवसरवादी राजनीति के रूप में पेश कर रही है, जबकि सपा का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।