भाजपा का बयान: नृपेंद्र मिश्रा के अनुसार मुलायम सरकार के हाथ रामभक्तों के खून से रंगे
सारांश
Key Takeaways
- नृपेंद्र मिश्रा का बयान राजनीतिक विवाद को जन्म देता है।
- भाजपा ने सपा को कारसेवकों पर गोली चलवाने का दोषी ठहराया।
- इस मुद्दे ने एक बार फिर से अयोध्या विवाद को चर्चा में लाया है।
- जयवीर सिंह ने मुख्यमंत्री के निर्णय की महत्वपूर्णता पर जोर दिया।
- भाजपा और सपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
अयोध्या, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के द्वारा 1992 में विवादित ढांचे पर दिए गए बयान के बाद से राजनीतिक चर्चाएँ और बढ़ गई हैं। मिश्रा ने उस समय के राजनीतिक नेतृत्व को उन घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया है। भाजपा के नेताओं ने उनके बयान का समर्थन किया है और सपा को कारसेवकों पर गोली चलवाने का दोषी माना।
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री जयवीर सिंह ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा, "पूरी दुनिया जानती है कि मुख्य सचिव कोई भी हो, निर्णय हमेशा मुख्यमंत्री का होता है। तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव के आदेश पर कारसेवकों पर गोली चलवाने का निर्णय लिया गया था।"
भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा, "मिश्रा की बात सही है, जिसे कोई नकार नहीं सकता। कल्याण सिंह भी मुख्यमंत्री रहे, जिन्होंने अपनी सरकार को जाने दिया, लेकिन एक भी रामभक्त पर गोली नहीं चलवाई।"
उन्होंने कहा, "नृपेंद्र मिश्रा ने जो कहा है कि कारसेवकों पर गोली चलाने का निर्णय मुलायम सिंह यादव की सरकार का था, वह सही है। उनके हाथ कारसेवकों के खून से रंगे हुए हैं।"
भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने भी मुलायम सिंह यादव सरकार की आलोचना करते हुए कहा, "उनकी सरकार ने कारसेवकों के साथ जो किया, उसे कोई भी सही नहीं ठहरा सकता। यह एक बड़ा हमला था।"
इससे पहले मिश्रा ने कहा था, "इस तरह के फैसले मुख्य सचिव के स्तर पर नहीं लिए जाते। इनमें से अधिकतर राजनीतिक होते हैं, जबकि कुछ में गृह सचिव और अन्य अधिकारियों की राय होती है।"
ये टिप्पणियां 1990 में अयोध्या में हुई गोलीबारी के संदर्भ में आई हैं, जब मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में पुलिस ने कारसेवकों पर गोली चलाई थी।