तेजस्वी सूर्या का बयान: दक्षिण भारत में परिसीमन को लेकर फैलाई जा रही है भ्रांति
सारांश
Key Takeaways
- दक्षिण भारत में परिसीमन को लेकर भ्रम है।
- तेजस्वी सूर्या ने संविधान के अनुसार परिसीमन की बात की।
- महिला आरक्षण का विधेयक 2023 में पारित हुआ।
- अखिलेश यादव ने भाजपा की नीयत पर सवाल उठाए।
- परिसीमन से तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है।
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने परिसीमन पर सदन में बताया कि दक्षिण भारत के लोगों के बीच एक बड़ा भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में विपक्ष का विरोध अराजकता की ओर बढ़ रहा है और इसी के साथ भ्रम भी फैलाया जा रहा है।
तेजस्वी सूर्या ने स्पष्ट किया कि परिसीमन कोई बैकडोर प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह संविधान के अनुसार किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि यदि लोकसभा सीटों को फ्रीज किया गया और महिला आरक्षण का समान रूप से लागू किया गया, तो इससे वोटों की वास्तविक मूल्य में कमी आएगी।
सदन में तेजस्वी सूर्या ने सभी राज्यों के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि परिसीमन के बाद किन-किन राज्यों की सीटें बढ़ने वाली हैं। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन लागू नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन गलत जानकारी फैला रहे हैं। परिसीमन के तहत तमिलनाडु से सांसदों की संख्या 39 से बढ़कर 59 हो सकती है, जिससे राज्य का प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा।
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पारित किया गया था, जिसके प्रावधान 2026 की जनगणना और परिसीमन के आधार पर लागू होंगे। लोकसभा में सदस्यों की संख्या में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जिससे कुल सीटें 815 हो जाएंगी। इनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जो सदन की कुल संख्या का एक-तिहाई हैं। किसी भी राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा और उनकी मौजूदा ताकत बनी रहेगी।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने परिसीमन विधेयक पर भाजपा और सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सपा महिला आरक्षण के पक्ष में है। डॉ. लोहिया हमेशा जेंडर जस्टिस और सोशल जस्टिस के पक्ष में रहे हैं। हम भी उसी राह पर चल रहे हैं। यह आरक्षण हमारे आह्वान को और मजबूत कर रहा है। अब भारतीय जनता पार्टी नारी को एक नारे की तरह प्रस्तुत करने का प्रयास कर रही है।
अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग अपने संगठन में महिलाओं का समावेश नहीं करते, वे उनके मान-सम्मान का कैसे ख्याल रखेंगे? पिछले कई वर्षों से ये लोग सरकार में हैं, लेकिन यदि हम वैश्विक आंकड़ों पर नजर डालें तो जेंडर समानता में हम कहां खड़े हैं? उनकी सरकार में 21 स्थान हैं, लेकिन कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं?