अखिलेश यादव ने संसद में उठाया सवाल, भाजपा शासित 21 राज्यों में महिला मुख्यमंत्री कितनी?
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नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। परिसीमन और महिला आरक्षण के विषय पर लोकसभा में चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भाजपा और केंद्र सरकार पर गंभीर प्रश्न उठाए।
अखिलेश यादव ने कहा कि सपा महिला आरक्षण के पक्ष में है और यह उनकी पार्टी की विचारधारा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने राम मनोहर लोहिया का उल्लेख करते हुए कहा कि वे हमेशा जेंडर न्याय और सामाजिक न्याय के समर्थक रहे हैं। उनकी पार्टी भी इसी विचारधारा का अनुसरण कर रही है और महिला आरक्षण से इस सोच को और मजबूती मिलती है।
उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह 'नारी' को केवल एक नारे के रूप में उपयोग कर रही है। सपा प्रमुख ने पूछा कि जो पार्टी अपने संगठन में महिलाओं को पर्याप्त स्थान नहीं देती, वह उनके सम्मान और अधिकारों की बात कैसे कर सकती है। उन्होंने कहा कि कई वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद देश में जेंडर समानता की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
अखिलेश यादव ने भाजपा से यह भी पूछा कि जिन 21 राज्यों में उनकी सरकार है, वहां कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि देश की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा अपने ही ढांचे में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने में असफल रही है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि पूरे देश में भाजपा के विधायकों में महिलाओं की संख्या 10 प्रतिशत से भी कम है और लोकसभा में भी उनका प्रतिनिधित्व संदिग्ध स्थिति में है।
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में पंचायत स्तर पर महिलाओं को सबसे ज्यादा आरक्षण देने का कार्य समाजवादी पार्टी ने किया है। इस पर सवाल उठता है कि भाजपा को इतनी जल्दी क्यों है।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा जनगणना नहीं कराना चाहती, विशेष रूप से जातीय जनगणना से बचना चाहती है। उन्होंने कहा कि यदि जातीय आंकड़े सामने आएंगे, तो आरक्षण की मांग और दबाव बढ़ेगा, जिससे सरकार बचना चाहती है।
उन्होंने कहा कि यही कारण है कि महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़ा गया है, ताकि इसके लागू होने में देरी हो सके। उनके अनुसार इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार की मंशा आरक्षण देने की नहीं, बल्कि उसे टालने की है।
अखिलेश यादव ने भाजपा की रणनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एसआईआर के माध्यम से उनकी रणनीति का खुलासा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पहली गिनती में विपक्ष ने अपने वोट बचाने में सफलता प्राप्त की, तो भाजपा ने फॉर्म 7 का बड़े पैमाने पर उपयोग करना शुरू किया।
सपा प्रमुख ने कहा कि इस प्रक्रिया को भी पकड़ लिया गया और यह सामने आया कि फॉर्म 7 का उपयोग संदिग्ध तरीके से किया जा रहा था। इस मामले की जानकारी चुनाव आयोग को दी गई, जिसके पश्चात वोट कटना तो रुक गया, लेकिन फर्जी हस्ताक्षरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अखिलेश यादव ने कहा कि इन सभी घटनाओं से भाजपा की मंशा पर गंभीर प्रश्न उठते हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन इसे पारदर्शी और तुरंत लागू करने की आवश्यकता है, न कि इसे अन्य प्रक्रियाओं से जोड़कर टालने की।