अखिलेश यादव ने यूपी सरकार की शर्तों को बताया अतार्किक, उठाए सवाल
सारांश
Key Takeaways
- अखिलेश यादव ने यूपी सरकार की शर्तों को अतार्किक बताया।
- सरकार ने कार्यक्रम के लिए सख्त शर्तें लागू की हैं।
- भाजपा पर समाज के सम्मान की अवहेलना का आरोप।
- शर्तों के उल्लंघन पर कार्यक्रम की अनुमति रद्द हो सकती है।
- यह विवाद राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
लखनऊ, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के कार्यक्रम को लेकर राज्य सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों पर सोशल मीडिया के माध्यम से तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने शर्तें इतनी बढ़ा दी हैं कि "आंख और मुंह कितने सेंटीमीटर खुल सकते हैं, ये भी शर्त रख देते।"
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विशेष समाज की गरिमा को नजरअंदाज कर रही है और अपमान करने के कारण समाज के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा के कुछ जनप्रतिनिधि जैसे मंत्री, सांसद, विधायक और पार्षद इस मामले में समाज के सामने अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहे हैं और स्वार्थी राजनीति के कारण समाज में अपना सम्मान खो चुके हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि समाज के सच्चे शुभचिंतक अन्य दलों से संपर्क में हैं, जिन्होंने हमेशा सनातन धर्म और समाज का सम्मान किया है। वर्तमान सरकार की आलोचना करते हुए अखिलेश यादव ने प्रश्न उठाया कि कोविड-१९ के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों का पालन भाजपा की बैठकों में कैसे हुआ। उन्होंने इसे असंगत और अतार्किक बताया, और कहा कि इसी कारण "बाटी-चोखा" वाली बैठक पर पाबंदी लगाई गई थी।
उन्होंने कहा, "अतार्किक बंदिशें लगाना कमजोर सत्ता की पहचान होती है। यह निंदनीय और घोर आपत्तिजनक है।"
प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति देते हुए सख्त नियम और शर्तें लागू की हैं ताकि शांति, यातायात व्यवस्था और कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। इन शर्तों के अनुसार किसी भी धर्म, जाति, संप्रदाय या भाषा के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। कार्यक्रम स्थल पर सीमित संख्या में ही वाहनों को प्रवेश दिया जाएगा और पार्किंग की व्यवस्था इस तरह की जाएगी कि यातायात बाधित न हो।
आयोजकों को केवल पारंपरिक ध्वज-दंड रखने की अनुमति होगी और किसी भी प्रकार की घातक वस्तु लाने पर रोक रहेगी। शांत क्षेत्र में लाउडस्पीकर, ढोल-नगाड़े या तेज संगीत बजाने की अनुमति नहीं होगी। ध्वनि प्रदूषण नियम २००० के प्रावधानों का पालन अनिवार्य होगा। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम १९८६ की धारा १५ के तहत कार्रवाई की जा सकती है। किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी आयोजकों की होगी और आवश्यक होने पर पुलिस बल की व्यवस्था का खर्च भी आयोजकों को वहन करना होगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो कार्यक्रम की अनुमति स्वतः निरस्त कर दी जाएगी और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।