महाराष्ट्र सरकार का डिजिटल-फर्स्ट सुधार: 5 बड़े बदलाव, दफ्तरों के चक्कर अब इतिहास
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने 3 अगस्त 2026 को सभी प्रशासनिक विभागों में 'गवर्नमेंट प्रोसेस री-इंजीनियरिंग' (GPR) के तहत पाँच प्रमुख सुधार लागू करने का आधिकारिक आदेश जारी किया है। इस सरकारी आदेश (GR) का मूल उद्देश्य नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाना, मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाना और सरकारी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल-फर्स्ट स्वरूप देना है। राज्य योजना विभाग द्वारा सोमवार को जारी यह आदेश मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के 'जीरो ब्यूरोक्रेसी' विज़न की व्यावहारिक परिणति माना जा रहा है।
पाँच प्रमुख सुधार: क्या बदलेगा
GR के अनुसार, सभी विभागों को अब पूरी तरह ऑनलाइन वेरिफिकेशन और डिजिटल वैलिडेशन पर निर्भर रहना होगा। आधार और महा-समन्वय जैसे मौजूदा सरकारी डेटाबेस से नागरिकों का डेटा सीधे ऑटो-फेच किया जाएगा, जिससे फॉर्म भरने की प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी।
जहाँ डिजिटल रिकॉर्ड पहले से उपलब्ध हैं, वहाँ भौतिक दस्तावेज़ जमा करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी जाएगी। विभाग DigiLocker और API इंटरऑपरेबिलिटी का उपयोग करेंगे और मुख्यतः स्व-घोषणा (Self-Declaration) के आधार पर सेवाएँ प्रदान करेंगे।
निर्णय-प्रक्रिया को अधिकतम तीन प्रशासनिक स्तरों तक सीमित किया जाएगा और प्रत्येक स्तर पर भूमिकाएँ स्पष्ट रूप से परिभाषित होंगी, ताकि नौकरशाही विलंब को जड़ से समाप्त किया जा सके।
कानूनी समय-सीमा और तकनीकी ढाँचा
'राइट टू सर्विसेज' (RTS) एक्ट के तहत अद्यतन कानूनी समय-सीमाएँ निर्धारित की जाएंगी और व्यापक तकनीकी उपयोग से प्रोसेसिंग समय में उल्लेखनीय कमी लाई जाएगी। सरकारी पोर्टल में बदलाव और आवश्यक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की जिम्मेदारी राज्य की आईटी कंपनी महा-आईटी को प्राथमिकता के आधार पर सौंपी गई है।
निगरानी तंत्र: GPR मंजूरी समिति
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य-स्तरीय GPR मंजूरी समिति गठित की गई है, जो इस पूरे बदलाव की निगरानी करेगी। यह समिति विभागों के प्रस्तावों का मूल्यांकन, डिजिटल वर्कफ्लो का अनुमोदन, संशोधित आवेदन फॉर्म को मंजूरी और सरलीकृत स्वीकृति प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने का काम करेगी।
गौरतलब है कि जिन परिचालन अपडेट के लिए किसी कानूनी संशोधन या उच्च-स्तरीय नीतिगत निर्णय की आवश्यकता नहीं है, उनके लिए प्रशासनिक विभागों के सचिव सीधे प्रक्रियात्मक आदेश जारी कर सकते हैं।
फडणवीस के सुधार अभियान का हिस्सा
यह ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले ही 'जीरो ब्यूरोक्रेसी' मॉडल, प्रोसेस री-इंजीनियरिंग और सरकारी विभागों के संरचनात्मक पुनर्गठन पर केंद्रित कई प्रशासनिक सुधारों की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं। एक बड़े कदम के तहत, राज्य कैबिनेट ने राज्य सचिवालय के पुनर्गठन को मंजूरी दी, जिसमें बिना कोई नया पद सृजित किए प्रशासनिक विभागों की संख्या 33 से बढ़ाकर 45 कर दी गई।
आम नागरिक पर असर और आगे की राह
इन सुधारों का सबसे सीधा असर उन करोड़ों नागरिकों पर पड़ेगा जो जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, भूमि रिकॉर्ड और कल्याणकारी योजनाओं के लाभ के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते हैं। यदि GPR का क्रियान्वयन समयबद्ध तरीके से होता है, तो महाराष्ट्र डिजिटल शासन में अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकता है।