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महाराष्ट्र सरकार का डिजिटल-फर्स्ट सुधार: 5 बड़े बदलाव, दफ्तरों के चक्कर अब इतिहास

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महाराष्ट्र सरकार का डिजिटल-फर्स्ट सुधार: 5 बड़े बदलाव, दफ्तरों के चक्कर अब इतिहास

सारांश

महाराष्ट्र सरकार ने GPR के तहत 5 बड़े सुधारों का आदेश जारी कर डिजिटल-फर्स्ट प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है — आधार ऑटो-फेच, DigiLocker, स्व-घोषणा और अधिकतम 3-स्तरीय मंजूरी प्रक्रिया से दफ्तरों के चक्कर खत्म होंगे। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में निगरानी समिति भी गठित।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सरकार ने 3 अगस्त 2026 को GPR (गवर्नमेंट प्रोसेस री-इंजीनियरिंग) के तहत 5 बड़े प्रशासनिक सुधारों का सरकारी आदेश जारी किया।
आधार और महा-समन्वय डेटाबेस से ऑटो-फेच, DigiLocker और API इंटरऑपरेबिलिटी से भौतिक दस्तावेज़ की अनिवार्यता समाप्त होगी।
निर्णय प्रक्रिया अधिकतम 3 प्रशासनिक स्तरों तक सीमित; RTS एक्ट के तहत कानूनी समय-सीमाएँ अपडेट होंगी।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य-स्तरीय GPR मंजूरी समिति निगरानी करेगी।
राज्य सचिवालय के पुनर्गठन में विभागों की संख्या 33 से 45 की गई — बिना कोई नया पद बनाए।
डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की जिम्मेदारी महा-आईटी को सौंपी गई।

महाराष्ट्र सरकार ने 3 अगस्त 2026 को सभी प्रशासनिक विभागों में 'गवर्नमेंट प्रोसेस री-इंजीनियरिंग' (GPR) के तहत पाँच प्रमुख सुधार लागू करने का आधिकारिक आदेश जारी किया है। इस सरकारी आदेश (GR) का मूल उद्देश्य नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाना, मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाना और सरकारी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल-फर्स्ट स्वरूप देना है। राज्य योजना विभाग द्वारा सोमवार को जारी यह आदेश मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के 'जीरो ब्यूरोक्रेसी' विज़न की व्यावहारिक परिणति माना जा रहा है।

पाँच प्रमुख सुधार: क्या बदलेगा

GR के अनुसार, सभी विभागों को अब पूरी तरह ऑनलाइन वेरिफिकेशन और डिजिटल वैलिडेशन पर निर्भर रहना होगा। आधार और महा-समन्वय जैसे मौजूदा सरकारी डेटाबेस से नागरिकों का डेटा सीधे ऑटो-फेच किया जाएगा, जिससे फॉर्म भरने की प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी।

जहाँ डिजिटल रिकॉर्ड पहले से उपलब्ध हैं, वहाँ भौतिक दस्तावेज़ जमा करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी जाएगी। विभाग DigiLocker और API इंटरऑपरेबिलिटी का उपयोग करेंगे और मुख्यतः स्व-घोषणा (Self-Declaration) के आधार पर सेवाएँ प्रदान करेंगे।

निर्णय-प्रक्रिया को अधिकतम तीन प्रशासनिक स्तरों तक सीमित किया जाएगा और प्रत्येक स्तर पर भूमिकाएँ स्पष्ट रूप से परिभाषित होंगी, ताकि नौकरशाही विलंब को जड़ से समाप्त किया जा सके।

कानूनी समय-सीमा और तकनीकी ढाँचा

'राइट टू सर्विसेज' (RTS) एक्ट के तहत अद्यतन कानूनी समय-सीमाएँ निर्धारित की जाएंगी और व्यापक तकनीकी उपयोग से प्रोसेसिंग समय में उल्लेखनीय कमी लाई जाएगी। सरकारी पोर्टल में बदलाव और आवश्यक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की जिम्मेदारी राज्य की आईटी कंपनी महा-आईटी को प्राथमिकता के आधार पर सौंपी गई है।

निगरानी तंत्र: GPR मंजूरी समिति

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य-स्तरीय GPR मंजूरी समिति गठित की गई है, जो इस पूरे बदलाव की निगरानी करेगी। यह समिति विभागों के प्रस्तावों का मूल्यांकन, डिजिटल वर्कफ्लो का अनुमोदन, संशोधित आवेदन फॉर्म को मंजूरी और सरलीकृत स्वीकृति प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने का काम करेगी।

गौरतलब है कि जिन परिचालन अपडेट के लिए किसी कानूनी संशोधन या उच्च-स्तरीय नीतिगत निर्णय की आवश्यकता नहीं है, उनके लिए प्रशासनिक विभागों के सचिव सीधे प्रक्रियात्मक आदेश जारी कर सकते हैं।

फडणवीस के सुधार अभियान का हिस्सा

यह ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले ही 'जीरो ब्यूरोक्रेसी' मॉडल, प्रोसेस री-इंजीनियरिंग और सरकारी विभागों के संरचनात्मक पुनर्गठन पर केंद्रित कई प्रशासनिक सुधारों की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं। एक बड़े कदम के तहत, राज्य कैबिनेट ने राज्य सचिवालय के पुनर्गठन को मंजूरी दी, जिसमें बिना कोई नया पद सृजित किए प्रशासनिक विभागों की संख्या 33 से बढ़ाकर 45 कर दी गई।

आम नागरिक पर असर और आगे की राह

इन सुधारों का सबसे सीधा असर उन करोड़ों नागरिकों पर पड़ेगा जो जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, भूमि रिकॉर्ड और कल्याणकारी योजनाओं के लाभ के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते हैं। यदि GPR का क्रियान्वयन समयबद्ध तरीके से होता है, तो महाराष्ट्र डिजिटल शासन में अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन की गति और ज़मीनी तैयारी का है — राज्य में इंटरनेट पहुँच और डिजिटल साक्षरता अभी भी असमान है, और ग्रामीण क्षेत्रों में DigiLocker या ऑनलाइन वेरिफिकेशन की व्यावहारिकता पर सवाल बने रहेंगे। 'जीरो ब्यूरोक्रेसी' का नारा नया नहीं है — केंद्र और कई राज्य सरकारें इसी तरह की डिजिटल-फर्स्ट घोषणाएँ कर चुकी हैं, पर अंतिम-मील क्रियान्वयन अक्सर लड़खड़ाता है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली निगरानी समिति की जवाबदेही तंत्र और समय-सीमाएँ सार्वजनिक नहीं की गई हैं, जो पारदर्शिता की कमी दर्शाता है। विभागों की संख्या 33 से 45 करना संरचनात्मक सुधार है या प्रशासनिक विस्तार — यह भी स्पष्ट होना चाहिए।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र GPR सुधार क्या हैं और इनका नागरिकों पर क्या असर होगा?
GPR यानी गवर्नमेंट प्रोसेस री-इंजीनियरिंग के तहत महाराष्ट्र सरकार ने 5 बड़े सुधार लागू किए हैं — ऑनलाइन वेरिफिकेशन, आधार से ऑटो-फेच, DigiLocker का उपयोग, स्व-घोषणा और अधिकतम 3-स्तरीय मंजूरी। इससे नागरिकों को सरकारी सेवाओं के लिए दफ्तर जाने की जरूरत नहीं रहेगी।
महाराष्ट्र GPR सुधार कब से लागू होंगे?
3 अगस्त 2026 को जारी सरकारी आदेश (GR) के साथ ये सुधार तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। महा-आईटी को प्राथमिकता के आधार पर डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का काम सौंपा गया है, हालाँकि पूर्ण क्रियान्वयन की समय-सीमा सार्वजनिक नहीं की गई है।
GPR मंजूरी समिति क्या है और इसकी भूमिका क्या होगी?
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित राज्य-स्तरीय GPR मंजूरी समिति इस पूरे सुधार की निगरानी करेगी। यह समिति विभागों के प्रस्ताव मूल्यांकित करेगी, डिजिटल वर्कफ्लो को मंजूरी देगी और संशोधित आवेदन फॉर्म को अंतिम रूप देगी।
क्या भौतिक दस्तावेज़ पूरी तरह बंद हो जाएंगे?
जहाँ डिजिटल रिकॉर्ड पहले से उपलब्ध हैं, वहाँ भौतिक दस्तावेज़ जमा करने की अनिवार्यता समाप्त होगी। DigiLocker और API इंटरऑपरेबिलिटी के जरिए दस्तावेज़ सत्यापन होगा और स्व-घोषणा को प्राथमिकता दी जाएगी।
महाराष्ट्र सचिवालय पुनर्गठन में क्या बदला?
राज्य कैबिनेट ने सचिवालय पुनर्गठन को मंजूरी दी जिसमें बिना कोई नया पद सृजित किए प्रशासनिक विभागों की संख्या 33 से बढ़ाकर 45 कर दी गई। यह फडणवीस सरकार के व्यापक प्रशासनिक सुधार अभियान का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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