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महाराष्ट्र: शहरी निकायों की परियोजनाओं पर AI और जियो-टैगिंग से होगी रियल-टाइम निगरानी, सरकार ने जारी किया GR

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महाराष्ट्र: शहरी निकायों की परियोजनाओं पर AI और जियो-टैगिंग से होगी रियल-टाइम निगरानी, सरकार ने जारी किया GR

सारांश

महाराष्ट्र सरकार ने शहरी निकायों की परियोजनाओं में भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण पर लगाम लगाने के लिए AI, जियो-टैगिंग और GIS मैपिंग को अनिवार्य किया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के वादे को GR के रूप में अमलीजामा पहनाया गया — अब नागरिक, RWA और तकनीकी विशेषज्ञ भी ऑडिट प्रक्रिया का हिस्सा होंगे।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सरकार ने 29 जुलाई 2026 को सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी कर शहरी निकायों में AI, जियो-टैगिंग और GIS मैपिंग से परियोजना निगरानी अनिवार्य की।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मानसून सत्र में की गई घोषणा को GR के रूप में लागू किया।
म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन निदेशालय के नेतृत्व में विशेष अध्ययन समूह गठित; एक महीने में रिपोर्ट देनी होगी।
ऑडिट में सरकारी अधिकारियों के साथ RWA, NGO, तकनीकी विशेषज्ञ और जन प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
यह पहल बीडीडी चॉल, मोतीलाल नगर और कमाठीपुरा जैसे बड़े पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स की निगरानी को भी कवर करेगी।

महाराष्ट्र सरकार ने 29 जुलाई 2026 को एक आधिकारिक सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी कर राज्य के शहरी स्थानीय निकायों — नगर निगम, नगरपालिकाएं और नगर परिषद — में सरकारी फंड से संचालित विकास परियोजनाओं की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जियो-टैगिंग और जीआईएस मैपिंग को अनिवार्य किया है। यह निर्णय राज्य विधानसभा के मानसून सत्र में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा की गई घोषणा के क्रियान्वयन के रूप में सामने आया है।

क्यों उठाया गया यह कदम

शहरी स्थानीय निकायों पर लंबे समय से सड़क निर्माण, जलापूर्ति योजनाओं और अन्य नागरिक परियोजनाओं में घटिया निर्माण, बुनियादी ढांचे के खराब रखरखाव और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के आरोप लगते रहे हैं। राज्य सरकार का मानना है कि प्रौद्योगिकी-आधारित ऑडिट से इन खामियों पर अंकुश लगाया जा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब बीडीडी चॉल, मोतीलाल नगर और कमाठीपुरा जैसे बड़े पुनर्विकास प्रोजेक्ट राज्य की प्राथमिकता सूची में हैं।

नई निगरानी व्यवस्था में क्या होगा

GR के अनुसार, जियो-टैगिंग और AI के माध्यम से रियल-टाइम ट्रैकिंग से अधिकारी प्रत्येक परियोजना के हर चरण की सीधे निगरानी कर सकेंगे। AI टूल्स परियोजना की सटीकता का विश्लेषण करेंगे और निर्माण की कुल गुणवत्ता का मूल्यांकन करेंगे। रियल-टाइम ऑनलाइन निगरानी यह सुनिश्चित करेगी कि परियोजनाएं तय समयसीमा के भीतर पूरी हों।

GR में स्पष्ट किया गया है कि ऑडिट प्रक्रिया में सरकारी अधिकारियों के अलावा स्थानीय नागरिक, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), एनजीओ, तकनीकी विशेषज्ञ, शैक्षणिक संस्थान और जन प्रतिनिधि भी शामिल होंगे — जो इसे तकनीकी के साथ-साथ एक सामाजिक ऑडिट का रूप देता है।

विशेष अध्ययन समूह का गठन

GR के तहत म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन निदेशालय के कमिश्नर और डायरेक्टर की अध्यक्षता में एक विशेष अध्ययन समूह गठित किया गया है। इस समूह को एक महीने के भीतर राज्य सरकार को विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी।

समूह को मौजूदा तकनीकी और वित्तीय ऑडिट ढांचे में सुधार के सुझाव देने, स्थानीय समुदायों पर परियोजनाओं के प्रत्यक्ष प्रभाव का आकलन करने और चल रहे एवं प्रस्तावित बुनियादी ढांचा कार्यों के लिए गुणवत्ता मानकों की पालना सुनिश्चित करने के उपाय सुझाने का काम सौंपा गया है।

शहरी प्रशासन सुधार की व्यापक मुहिम

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में कहा था कि यह तकनीक-आधारित निगरानी ढांचा महाराष्ट्र में शहरी प्रशासन को आधुनिक बनाने की व्यापक मुहिम का हिस्सा है। यह ढांचा शहरी विकास विभाग (UDD) में प्रोजेक्ट ट्रैकिंग को एकरूप बनाने और सार्वजनिक खर्च में जवाबदेही सुनिश्चित करने की राज्य की मौजूदा पहलों के साथ मिलकर काम करेगा। गौरतलब है कि यह पहल तब आई है जब देश के कई राज्य स्मार्ट सिटी मिशन के बाद शहरी बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता को लेकर नए सिरे से जवाबदेही तंत्र बना रहे हैं।

अध्ययन समूह की रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार इस ढांचे को चरणबद्ध तरीके से सभी शहरी स्थानीय निकायों में लागू करने की योजना बना रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राज्य के सैकड़ों नगर निकायों में AI और GIS को लागू करने की प्रशासनिक क्षमता और डिजिटल बुनियादी ढांचा मौजूद है। देश में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कई ऐसी तकनीकी निगरानी पहलें शुरू हुईं जो कागज पर मजबूत थीं लेकिन क्रियान्वयन में लड़खड़ा गईं। अध्ययन समूह की एक महीने की समयसीमा उत्साहजनक है, परंतु जब तक ऑडिट के नतीजों पर कार्रवाई का स्पष्ट तंत्र नहीं बनता, यह निगरानी प्रणाली डेटा संग्रह का अभ्यास बनकर रह सकती है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र सरकार ने AI और जियो-टैगिंग से परियोजना निगरानी का फैसला क्यों किया?
शहरी स्थानीय निकायों पर घटिया निर्माण, खराब रखरखाव और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के लंबे समय से लगते आ रहे आरोपों के जवाब में यह कदम उठाया गया है। AI और जियो-टैगिंग से रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव होगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
नई ऑडिट व्यवस्था में कौन-कौन शामिल होंगे?
GR के अनुसार ऑडिट प्रक्रिया में सरकारी अधिकारियों के अलावा स्थानीय नागरिक, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), एनजीओ, तकनीकी विशेषज्ञ, शैक्षणिक संस्थान और जन प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। यह इसे तकनीकी के साथ-साथ सामाजिक ऑडिट का रूप देता है।
विशेष अध्ययन समूह को क्या काम सौंपा गया है और रिपोर्ट कब तक देनी होगी?
म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन निदेशालय के नेतृत्व में गठित इस समूह को एक महीने के भीतर रिपोर्ट देनी होगी। इसे मौजूदा ऑडिट ढांचे में सुधार के सुझाव, परियोजनाओं के सामुदायिक प्रभाव का आकलन और गुणवत्ता मानकों की पालना सुनिश्चित करने के उपाय तैयार करने हैं।
यह पहल महाराष्ट्र के किन प्रमुख परियोजनाओं पर लागू होगी?
यह ढांचा बीडीडी चॉल, मोतीलाल नगर और कमाठीपुरा जैसे बड़े पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स सहित राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों की सरकारी फंड से चल रही विकास परियोजनाओं पर लागू होगा। शहरी विकास विभाग (UDD) में प्रोजेक्ट ट्रैकिंग को भी एकरूप बनाया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस बारे में क्या कहा था?
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राज्य विधानसभा के मानसून सत्र में घोषणा की थी कि AI, जियो-टैगिंग और GIS मैपिंग से शहरी निकायों में एक स्वतंत्र ऑडिट और निगरानी व्यवस्था बनेगी। उन्होंने इसे महाराष्ट्र में शहरी प्रशासन को आधुनिक बनाने की व्यापक मुहिम का हिस्सा बताया था।
राष्ट्र प्रेस
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