महाराष्ट्र कैबिनेट ने इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और एआई के लिए नया विभाग बनाने को दी मंजूरी
सारांश
Key Takeaways
- नया विभाग: इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और एआई के लिए स्वतंत्र विभाग की स्थापना।
- मुख्यमंत्री का बयान: महाराष्ट्र एआई स्टार्टअप्स में अग्रणी है।
- महावितरण का पुनर्गठन: 32,679 करोड़ रुपये के कर्ज के लिए सरकारी बॉंड।
- भू-स्थानिक तकनीक: प्रशासनिक दक्षता के लिए केंद्र की स्थापना।
- आपदा प्रबंधन: निजी पूंजी से कोष जुटाने की योजना।
मुंबई, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अंतर्गत 'विकसित महाराष्ट्र' को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, महाराष्ट्र कैबिनेट ने मंगलवार को इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के लिए एक नया स्वतंत्र विभाग स्थापित करने की मंजूरी दी।
सूचना प्रौद्योगिकी निदेशालय को अब इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और एआई निदेशालय में परिवर्तित किया जाएगा। राज्य में आईटी, एआई और डिजिटल गवर्नेंस को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए एक नया आईटी कैडर बनाया जाएगा, जिसमें मंत्रालयी विभागों, कमिश्नर के कार्यालय और सभी जिलों के लिए स्थायी पद शामिल होंगे।
यह कदम तब उठाया गया है जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में राज्य विधानसभा में बताया कि महाराष्ट्र एआई स्टार्टअप्स के क्षेत्र में अग्रणी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार फिनटेक और एआई स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास कर रही है, क्योंकि वह राज्य को ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करना चाहती है।
सीएम ने कहा कि तकनीक इस आर्थिक विकास की नींव का कार्य करेगी और सरकार राज्य को स्टार्टअप और तकनीकी क्षेत्र में एक नेता के रूप में स्थापित कर रही है।
राज्य कैबिनेट ने महावितरण की वित्तीय पुनर्गठन को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत 32,679 करोड़ रुपये के राज्य-गारंटी वाले कर्ज के लिए सरकारी बॉंड जारी किए जाएंगे।
अतिरिक्त, कृषि वितरण कारोबार का डीमर्जर किया जाएगा और महावितरण को शेयर बाजार में सूचीबद्ध किया जाएगा। कैबिनेट ने भू-स्थानिक तकनीक
यह केंद्र आधुनिक तकनीक, अनुसंधान, भू-स्थानिक नवाचार और उद्यमिता पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिससे छात्रों, पेशेवरों और शोधकर्ताओं के लिए शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित करना संभव होगा।
राज्य कैबिनेट ने महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर के पुनर्गठन को भी मंजूरी दी है, जो अब एक कंपनी के रूप में स्थापित होगा। इसके अंतर्गत 1860 के सोसायटीज एक्ट के तहत इसका पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा और इसे कंपनी एक्ट, 2013 की धारा 8 के तहत एक कंपनी के रूप में पंजीकृत किया जाएगा।
इस फैसले से सड़क सूचना प्रणालियों, शहरी योजना, जलयुक्त शिवार (वॉटरशेड) विकास, पहाड़ी क्षेत्र विकास, ई-पंचनामा, महा एग्री टेक, मैंग्रोव अध्ययन, भूजल प्रबंधन और खनिज/खनन अध्ययन से संबंधित परियोजनाओं में तेजी आएगी।
इसके अलावा, राज्य कैबिनेट ने महाराष्ट्र रेजिलियंस डेवलपमेंट प्रोग्राम को लागू करने की भी मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य निजी पूंजी की सहायता से आपदा प्रबंधन कोष जुटाना है।
इसमें विश्व बैंक से मिलने वाला 165 करोड़ रुपये का कोष भी शामिल है। यह प्रोग्राम आपदा प्रभावित नागरिकों को होम लोन पर राहत तथा एमएसएमई (लघु और मध्यम उद्यमों) को ऋण रियायत और बीमा सुरक्षा प्रदान करेगा।
बाढ़ के जोखिम को कम करने के लिए, कृष्णा बेसिन—जिसमें कोल्हापुर, सांगली और इचलकरंजी शहर शामिल हैं—के लिए रोकथाम की योजनाएँ तैयार की जाएंगी।