महाराष्ट्र का 'महा एआई' प्लेटफॉर्म: सरकारी कामकाज में AI क्रांति, सीएम फडणवीस ने बताई खासियतें
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 23 जून 2026 को विधानभवन, मुंबई में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में घोषणा की कि महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के प्रशासनिक तंत्र को आधुनिक बनाने के लिए 'महा एआई' — यानी महाराष्ट्र हब फॉर एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस — विकसित किया है। उनके अनुसार, यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित देश की पहली ऐसी अनूठी सरकारी पहल है जो राज्य के अपने सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर पर संचालित होगी।
महा एआई क्या है और कैसे काम करेगा
नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) ने यह प्रणाली विकसित की है, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए महाराष्ट्र राज्य डेटा सेंटर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर तैनात किया गया है। इस प्लेटफॉर्म के ज़रिए सरकारी पत्र, ईमेल और नोट तैयार करना, दस्तावेज़ों का सारांश बनाना, भाषाई अनुवाद, सरकारी नियमों-कानूनों की जानकारी खोजना और आम भाषा में रिपोर्ट तैयार करना जैसे कार्य तेज़ी और सटीकता से किए जा सकेंगे।
यह सिस्टम अलग-अलग एआई मॉडल चुनने और इमेज व दस्तावेज़ अपलोड करने की सुविधा भी देता है। इसमें यूज़र-वाइज़ सुरक्षित लॉग-इन, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और पद के अनुसार एक्सेस कंट्रोल जैसे सुरक्षा फीचर शामिल हैं।
डेटा संप्रभुता और गोपनीयता
मुख्यमंत्री फडणवीस ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि सभी संवेदनशील सरकारी जानकारी राज्य सरकार के ही नियंत्रण में रहेगी। डेटा को किसी बाहरी क्लाउड पर नहीं, बल्कि राज्य सरकार के सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर में ही स्टोर और प्रोसेस किया जाएगा। यह व्यवस्था सरकारी जानकारी की संप्रभुता, गोपनीयता और साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करती है — जो किसी भी एआई-आधारित सरकारी प्रणाली के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती है।
लाभार्थी सत्यापन और ई-गवर्नेंस से जुड़ाव
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से लाभार्थियों के वेरिफिकेशन की सुविधा भी मिलेगी, ताकि एक ही लाभार्थी का नाम दोहरा न दर्ज हो। भविष्य में इस प्लेटफॉर्म को ई-ऑफिस, आरटीआई पोर्टल, ई-एचआरएमएस और 'आपले सरकार' जैसी मौजूदा ई-गवर्नेंस प्रणालियों से जोड़ा जाएगा। इससे ड्राफ्टिंग, अनुवाद, सारांश, जानकारी संकलन और लाभार्थी सत्यापन जैसी सेवाएँ और अधिक सुदृढ़ होंगी।
गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब केंद्र और कई राज्य सरकारें डिजिटल गवर्नेंस को प्राथमिकता दे रही हैं, लेकिन डेटा सुरक्षा और स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर के सवाल अनुत्तरित रहे हैं। महाराष्ट्र का यह कदम उस दिशा में एक ठोस प्रयास माना जा रहा है।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
इस बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव लोकेश चंद्र, अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास चंद्र रस्तोगी, प्रधान सचिव डॉ. श्रीकर परदेशी, प्रधान सचिव नवीन सोना, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी विभाग के सचिव वीरेंद्र सिंह, महाआईटी की निदेशक भुवनेश्वरी एस. और NIC की डिप्टी डायरेक्टर जनरल सपना कपूर उपस्थित थीं।
आगे की राह
मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि जल्द ही 'महा एआई' को राज्य के सभी सरकारी विभागों में एक यूनिफॉर्म एआई प्लेटफॉर्म के रूप में लागू किया जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी विभाग के सचिव वीरेंद्र सिंह और NIC की सपना कपूर ने बैठक में 'महा एआई' पर विस्तृत प्रेज़ेंटेशन दिया। यह प्रणाली महाराष्ट्र के प्रशासनिक ढाँचे को तकनीकी रूप से नई पीढ़ी में ले जाने का पहला बड़ा कदम साबित हो सकती है।