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मतदाता सूची से लाखों नाम हटाना लोकतंत्र पर हमला: अधीर रंजन चौधरी का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला

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मतदाता सूची से लाखों नाम हटाना लोकतंत्र पर हमला: अधीर रंजन चौधरी का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला

सारांश

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का बड़ा आरोप — चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के तहत लाखों नाम मतदाता सूची से हटाए गए। अकेले उनके जिले में 7 लाख और पूरे पश्चिम बंगाल में 34 लाख मामले लंबित, अब तक केवल 514 में फैसला। स्वतंत्र जाँच और चुनाव परिणामों की समीक्षा की माँग।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने 23 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग की SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
उनके अनुसार अकेले उनके जिले में 7 लाख से अधिक और पूरे पश्चिम बंगाल में 34 लाख से अधिक मामले ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित हैं, जबकि अब तक केवल 514 मामलों में फैसला हुआ है।
SIR को लेकर सर्वोच्च न्यायालय और कलकत्ता उच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई जारी है।
चौधरी ने SIR के बाद संपन्न हुए चुनावों के परिणामों की विशेष समीक्षा और पूरे मामले की स्वतंत्र जाँच की माँग की।
उन्होंने ERO, DEO और CEO जैसे स्थानीय अधिकारियों की स्वायत्तता पर भी सवाल उठाए, और केंद्रीय नियंत्रण की संभावना पर जाँच की माँग की।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में चुनाव आयोग (ECI) की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाना भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया ने चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

मुख्य आरोप और दावे

चौधरी ने कहा कि SIR के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जबकि कुछ नए नाम भी जोड़े गए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव आयोग पर ही मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप लग रहे हों, तो लोकतंत्र के लिए इससे बड़ा संकट क्या हो सकता है। उनका कहना है कि इन घटनाओं ने पूरी चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गहरी छाया डाली है।

ट्रिब्यूनल की कमी और लंबित मामले

कांग्रेस नेता ने न्यायिक प्रक्रिया की धीमी रफ्तार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में नागरिकों को ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश होना है, लेकिन पर्याप्त ट्रिब्यूनल और न्यायिक अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं।

चौधरी के अनुसार, अकेले उनके जिले में 7 लाख से अधिक और पूरे पश्चिम बंगाल में 34 लाख से अधिक मामले ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित हैं, जबकि अब तक केवल 514 मामलों में ही फैसला हो सका है।

कानूनी लड़ाई और राहुल गांधी का संदर्भ

चौधरी ने बताया कि SIR को लेकर सर्वोच्च न्यायालय और कलकत्ता उच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई जारी है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा इस मुद्दे पर उठाए गए सवालों का भी हवाला दिया और कहा कि चुनाव आयोग के भीतर से सामने आए बयानों ने इस पर नई बहस छेड़ दी है।

उनका तर्क है कि यदि स्थानीय चुनाव अधिकारियों — ERO, DEO और CEO — के पास पर्याप्त स्वायत्त अधिकार नहीं थे और निर्णय केंद्रीय स्तर से नियंत्रित थे, तो मतदाता सूची तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता की स्वतंत्र जाँच अनिवार्य है।

चुनाव परिणामों की समीक्षा की माँग

चौधरी ने माँग की कि SIR के बाद जिन क्षेत्रों में चुनाव संपन्न हो चुके हैं, उन चुनाव परिणामों की विशेष समीक्षा की जानी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की स्वायत्तता और पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं।

स्वतंत्र जाँच की माँग

कांग्रेस नेता ने पूरे मामले की स्वतंत्र और व्यापक जाँच की माँग करते हुए कहा कि SIR से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का विश्वसनीय समाधान हो सके। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश में आगामी चुनावों की तैयारियाँ तेज हो रही हैं और मतदाता सूची की सटीकता एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो मतदाता सूची की शुद्धता के लिए बनाई गई, क्या वास्तव में उस लक्ष्य को पूरा कर रही है — या प्रशासनिक क्षमता की कमी के चलते वैध मतदाता भी इसकी चपेट में आ रहे हैं? चुनाव आयोग ने अभी तक इन आँकड़ों पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है, जो पारदर्शिता की माँग को और तीखा बनाता है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चुनाव आयोग की SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया क्या है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध करने की एक प्रक्रिया है, जिसमें अयोग्य या दोहरे नाम हटाए जाते हैं और नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं। विवाद यह है कि इस प्रक्रिया में कथित तौर पर बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम भी हटाए गए।
अधीर रंजन चौधरी ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए हैं?
चौधरी ने आरोप लगाया है कि SIR के तहत लाखों नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिससे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता संदिग्ध हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय चुनाव अधिकारियों के पास पर्याप्त स्वायत्त अधिकार नहीं थे और निर्णय केंद्रीय स्तर से नियंत्रित थे।
पश्चिम बंगाल में SIR से संबंधित कितने मामले लंबित हैं?
कांग्रेस नेता चौधरी के दावे के अनुसार, पूरे पश्चिम बंगाल में 34 लाख से अधिक मामले ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित हैं, जबकि अकेले उनके जिले में 7 लाख से अधिक मामले हैं। अब तक केवल 514 मामलों में ही फैसला हो पाया है।
SIR मामले पर अदालतों में क्या स्थिति है?
SIR को लेकर सर्वोच्च न्यायालय और कलकत्ता उच्च न्यायालय दोनों में कानूनी लड़ाई जारी है। चौधरी ने इन मामलों का हवाला देते हुए जल्द न्यायिक समाधान और स्वतंत्र जाँच की माँग की है।
कांग्रेस ने चुनाव परिणामों की समीक्षा की माँग क्यों की है?
चौधरी का तर्क है कि यदि SIR प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुई हैं, तो उन क्षेत्रों के चुनाव परिणाम भी प्रभावित हो सकते हैं जहाँ SIR के बाद चुनाव हुए। इसीलिए उन्होंने उन परिणामों की विशेष समीक्षा की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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