मतदाता सूची से लाखों नाम हटाना लोकतंत्र पर हमला: अधीर रंजन चौधरी का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में चुनाव आयोग (ECI) की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाना भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया ने चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
मुख्य आरोप और दावे
चौधरी ने कहा कि SIR के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जबकि कुछ नए नाम भी जोड़े गए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव आयोग पर ही मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप लग रहे हों, तो लोकतंत्र के लिए इससे बड़ा संकट क्या हो सकता है। उनका कहना है कि इन घटनाओं ने पूरी चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गहरी छाया डाली है।
ट्रिब्यूनल की कमी और लंबित मामले
कांग्रेस नेता ने न्यायिक प्रक्रिया की धीमी रफ्तार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में नागरिकों को ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश होना है, लेकिन पर्याप्त ट्रिब्यूनल और न्यायिक अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं।
चौधरी के अनुसार, अकेले उनके जिले में 7 लाख से अधिक और पूरे पश्चिम बंगाल में 34 लाख से अधिक मामले ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित हैं, जबकि अब तक केवल 514 मामलों में ही फैसला हो सका है।
कानूनी लड़ाई और राहुल गांधी का संदर्भ
चौधरी ने बताया कि SIR को लेकर सर्वोच्च न्यायालय और कलकत्ता उच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई जारी है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा इस मुद्दे पर उठाए गए सवालों का भी हवाला दिया और कहा कि चुनाव आयोग के भीतर से सामने आए बयानों ने इस पर नई बहस छेड़ दी है।
उनका तर्क है कि यदि स्थानीय चुनाव अधिकारियों — ERO, DEO और CEO — के पास पर्याप्त स्वायत्त अधिकार नहीं थे और निर्णय केंद्रीय स्तर से नियंत्रित थे, तो मतदाता सूची तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता की स्वतंत्र जाँच अनिवार्य है।
चुनाव परिणामों की समीक्षा की माँग
चौधरी ने माँग की कि SIR के बाद जिन क्षेत्रों में चुनाव संपन्न हो चुके हैं, उन चुनाव परिणामों की विशेष समीक्षा की जानी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की स्वायत्तता और पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं।
स्वतंत्र जाँच की माँग
कांग्रेस नेता ने पूरे मामले की स्वतंत्र और व्यापक जाँच की माँग करते हुए कहा कि SIR से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का विश्वसनीय समाधान हो सके। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश में आगामी चुनावों की तैयारियाँ तेज हो रही हैं और मतदाता सूची की सटीकता एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।