9 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पश्चिम बंगाल SIR मामला: सुप्रीम कोर्ट 16 अक्टूबर को करेगा सुनवाई, 1.70 लाख अपीलें लंबित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पश्चिम बंगाल SIR मामला: सुप्रीम कोर्ट 16 अक्टूबर को करेगा सुनवाई, 1.70 लाख अपीलें लंबित

सारांश

पश्चिम बंगाल में SIR के बाद मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की 1.70 लाख अपीलें लंबित हैं और नवंबर में नगर निगम चुनाव आने वाले हैं। सुप्रीम कोर्ट 16 अक्टूबर को तय करेगा कि इन मतदाताओं को वोट देने का अधिकार मिलेगा या नहीं।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल SIR मामले पर 16 अक्टूबर 2026 को सुनवाई तय की है।
SIR अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अभी 1.70 लाख अपीलें लंबित हैं।
पिछले 6 महीनों में केवल 1.20 लाख मामलों का निपटारा हो सका है।
नाम शामिल करने की 1 लाख से अधिक अपीलों में से 93% आवेदक योग्य पाए गए।
वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से दायर याचिका में दावा है कि नाम बिना नोटिस दिए हटाए गए।
अदालत विचार करेगी कि लंबित अपील वाले मतदाताओं को कोलकाता-हावड़ा नगर निगम चुनावों में मतदान की अनुमति मिले या नहीं।

सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए गए मतदाताओं की अपीलों के शीघ्र निपटारे से जुड़ी याचिकाओं पर 16 अक्टूबर 2026 को सुनवाई का भरोसा दिया है। यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि कोलकाता और हावड़ा नगर निगम के चुनाव नवंबर में प्रस्तावित हैं और हज़ारों मतदाताओं के मताधिकार पर सीधा सवाल खड़ा है।

मामले की पृष्ठभूमि

वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है, जिसमें 5 याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि उनके नाम मतदाता सूची से बिना किसी पूर्व नोटिस के हटा दिए गए। याचिकाकर्ताओं की माँग है कि SIR अपीलीय न्यायाधिकरण उनकी अपीलों पर तत्काल फैसला सुनाए, ताकि वे आगामी नगर निगम चुनावों में मतदान कर सकें।

गौरतलब है कि SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर पश्चिम बंगाल में पहले से ही राजनीतिक विवाद चल रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।

अपीलों की स्थिति

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि SIR अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अभी भी लगभग 1.70 लाख अपीलें लंबित हैं। राज्य सरकार के अनुसार, पिछले 6 महीनों में केवल 1.20 लाख मामलों का ही निपटारा हो सका है।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने की 1 लाख से अधिक अपीलों पर फैसला हो चुका है, जिनमें से उल्लेखनीय रूप से 93 प्रतिशत आवेदक योग्य पाए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मुख्य प्रश्न

सर्वोच्च न्यायालय इस बात पर विचार कर रहा है कि नवंबर चुनावों को देखते हुए नाम हटाने की अपीलों की तुलना में नाम शामिल करने की अपीलों को प्राथमिकता दी जाए — विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहाँ निकाय चुनाव होने वाले हैं।

इसके साथ ही अदालत इस महत्वपूर्ण प्रश्न पर भी विचार करेगी कि क्या जिन मतदाताओं की अपीलें अभी लंबित हैं, उन्हें नगर निगम चुनावों में मतदान करने की अनुमति दी जा सकती है या नहीं।

मतदाताओं पर असर

यह मामला केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है — इसके केंद्र में उन हज़ारों नागरिकों का मौलिक मताधिकार है जिनके नाम बिना सूचना के सूची से हटा दिए गए। 93% पात्रता दर यह संकेत देती है कि सूची से बड़े पैमाने पर हुई छँटाई में त्रुटियाँ हुई हैं।

अगर 16 अक्टूबर की सुनवाई में कोई ठोस दिशा-निर्देश नहीं मिले, तो लंबित 1.70 लाख मतदाताओं का नगर निगम चुनावों में भाग लेने का अधिकार अनिश्चित रह सकता है।

आगे क्या होगा

16 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय अपीलों की प्राथमिकता और लंबित मतदाताओं के मताधिकार पर स्पष्ट निर्देश दे सकता है। न्यायालय का अगला कदम यह तय करेगा कि नवंबर के नगर निगम चुनाव कितने समावेशी और विवाद-मुक्त होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह लोकतांत्रिक भागीदारी पर गंभीर सवाल उठाएगा; और यदि अनुमति देता है, तो यह प्रशासनिक त्रुटियों को बिना जवाबदेही के आगे बढ़ाने जैसा होगा। असली जवाबदेही का सवाल यह है कि SIR की प्रक्रिया में इतने बड़े पैमाने पर गलत नाम क्यों हटाए गए — जो अभी तक अनुत्तरित है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल SIR मामला क्या है और सुप्रीम कोर्ट में क्यों आया?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से 5 याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की है, जिसमें दावा है कि उनके नाम बिना किसी पूर्व नोटिस के हटाए गए और अपीलीय न्यायाधिकरण शीघ्र सुनवाई नहीं कर रहा।
SIR अपीलीय न्यायाधिकरण में कितनी अपीलें लंबित हैं?
पश्चिम बंगाल सरकार के अनुसार, SIR अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अभी लगभग 1.70 लाख अपीलें लंबित हैं। पिछले 6 महीनों में केवल 1.20 लाख मामलों का निपटारा हो सका है।
सुप्रीम कोर्ट 16 अक्टूबर को किन मुद्दों पर विचार करेगा?
सर्वोच्च न्यायालय 16 अक्टूबर को यह तय करेगा कि नाम शामिल करने की अपीलों को प्राथमिकता दी जाए या नहीं, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ नगर निगम चुनाव होने हैं। इसके साथ ही कोर्ट यह भी विचार करेगा कि लंबित अपील वाले मतदाताओं को नवंबर के चुनावों में मतदान की अनुमति दी जाए या नहीं।
93 प्रतिशत अपीलकर्ताओं के योग्य पाए जाने का क्या महत्व है?
मतदाता सूची में नाम शामिल करने की 1 लाख से अधिक अपीलों में से 93 प्रतिशत आवेदक योग्य पाए गए हैं। यह आँकड़ा इस बात का संकेत देता है कि SIR प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गलत तरीके से नाम हटाए गए, जिससे हज़ारों वैध मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।
कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनाव कब होने हैं?
कोलकाता और हावड़ा नगर निगम के चुनाव नवंबर 2026 में प्रस्तावित हैं। चुनाव नज़दीक होने के कारण ही सुप्रीम कोर्ट लंबित अपीलों के त्वरित निपटारे और मतदान अधिकार के प्रश्न पर प्राथमिकता से विचार कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले