पश्चिम बंगाल SIR विवाद: सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश — नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 17 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) विवाद पर सुनवाई के दौरान एक बार फिर स्पष्ट किया कि नागरिकता निर्धारण करना चुनाव आयोग (ECI) का संवैधानिक अधिकार नहीं है। न्यायालय ने कहा कि आयोग का दायरा केवल मतदाता सूची के नियंत्रण और पर्यवेक्षण तक सीमित है — इस कानूनी स्थिति में कोई अस्पष्टता नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई ट्रिब्यूनल किसी व्यक्ति का नाम SIR सूची में शामिल न करने का निर्णय देता है, तो चुनाव आयोग को नागरिकता निर्धारण के लिए वह मामला संबंधित मंत्रालय को अग्रेषित करना होगा। इसके साथ ही न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि मतदाता सूची से नाम हटाने मात्र से किसी व्यक्ति की नागरिकता स्वतः समाप्त नहीं होती।
यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी माँगने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। न्यायालय ने इस याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दे दी है। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को निर्धारित है।
SIR क्या है और विवाद क्यों
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन, शुद्ध और त्रुटिरहित बनाने के लिए चलाया जाने वाला एक विशेष अभियान है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सूची में केवल पात्र भारतीय नागरिकों के नाम हों और मृत, स्थानांतरित या अपात्र व्यक्तियों के नाम हटाए जाएँ।
सामान्यतः चुनाव आयोग प्रतिवर्ष मतदाता सूची का संक्षिप्त पुनरीक्षण कराता है। किंतु जब किसी राज्य या क्षेत्र में व्यापक और गहन जाँच की आवश्यकता होती है, तब SIR आरंभ किया जाता है। इस प्रक्रिया में घर-घर जाकर सत्यापन, दस्तावेज़ों की जाँच और मतदाताओं की पात्रता का विस्तृत परीक्षण शामिल होता है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर पहले से ही कई याचिकाएँ दाखिल की जा चुकी हैं — कुछ का निपटारा हो चुका है और कुछ पर सुनवाई जारी है। सत्ता पक्ष के प्रतिनिधि इस अभियान को जनहित में बता रहे हैं, जबकि विपक्ष का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) राजनीतिक लाभ के लिए इस प्रक्रिया का उपयोग कर रही है। ये आरोप अभी तक सत्यापित नहीं हैं।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय की इस स्पष्ट टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग और संबंधित मंत्रालयों के बीच समन्वय की प्रक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी हैं। 25 अगस्त की अगली सुनवाई में न्यायालय द्वारा विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी पर आदेश की संभावना है, जो इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है।