सुप्रीम कोर्ट का पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिए नया निर्देश: सिविल न्यायाधीश भी होंगे शामिल
सारांश
Key Takeaways
- सुप्रीम कोर्ट ने सिविल न्यायाधीशों को पुनरीक्षण प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश दिया।
- सत्यापन कार्य को युद्ध स्तर पर पूरा करना आवश्यक है।
- पूरक सूची में शामिल मतदाता भी अंतिम सूची का हिस्सा माने जाएंगे।
नई दिल्ली, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
राज्य में तार्किक विसंगति और अनमैप्ड श्रेणी के मामलों के समाधान के लिए न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के पूर्व के आदेश के अनुसार, जिला न्यायाधीश और अतिरिक्त जिला न्यायाधीश स्तर के लगभग २५० न्यायिक अधिकारी इस सत्यापन कार्य में संलग्न हैं। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में आवेदनों के सामने यह संख्या अपर्याप्त साबित हो रही है।
इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया को तेज करने के लिए सिविल न्यायाधीशों को भी शामिल करने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि यदि जरूरत पड़ी, तो कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश झारखंड और उड़ीसा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों से भी अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों की मांग की जा सकती है। कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि यह कार्य युद्ध स्तर पर पूरा किया जाए, ताकि समय पर मतदाता सूची तैयार हो सके।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि २८ फरवरी २०२६ तक तार्किक विसंगति या अनमैप्ड श्रेणी के सभी मामलों का सत्यापन पूरा नहीं हो पाता है, तो निर्वाचन आयोग अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने के बाद पूरक सूची जारी कर सकता है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूरक सूची में शामिल होने वाले योग्य मतदाताओं को भी २८ फरवरी को जारी होने वाली अंतिम सूची का हिस्सा माना जाएगा। अर्थात, वे वैध मतदाता माने जाएंगे और उन्हें मतदान का पूरा अधिकार होगा।
कोर्ट ने सभी पक्षों से सहयोग की अपील की है, ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे। न्यायिक हस्तक्षेप से इन मामलों का निपटारा तेज होगा और लाखों मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।