SIR प्रक्रिया में वोटर लिस्ट से नाम न कटे — ओवैसी की अपील, पश्चिम बंगाल के 27 लाख मामलों का हवाला
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 10 जून 2026 को हैदराबाद में लोगों से अपील की कि वे विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को गंभीरता से लें और यह सुनिश्चित करें कि मतदाता सूची में उनका नाम बना रहे। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया की अनदेखी करने पर नागरिकों को बाद में अपनी नागरिकता साबित करने जैसी अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
ओवैसी की मुख्य चेतावनी
ओवैसी ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ SIR जैसी पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर लगभग 27 लाख नाम मतदाता सूची से गायब हो गए थे। उन्होंने आगाह किया कि जिन लोगों का नाम पहले से मतदाता सूची में दर्ज है, उन्हें यह सत्यापित करना चाहिए कि नई सूची में भी उनका नाम मौजूद है। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया नजरअंदाज करने योग्य नहीं है।
विसंगतियों पर सवाल
AIMIM प्रमुख ने चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित कुछ मानकों और कथित 'अनॉमली' (विसंगति) के प्रावधान पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि परिवार के सदस्यों की संख्या या उम्र को लेकर कोई विसंगति दिखती है, तो उसे वास्तविक स्थिति के अनुसार ही दर्ज किया जाए — गलत या मनमाने तरीके से जानकारी न भरी जाए।
परिवार की संख्या और मतदान अधिकार
ओवैसी ने अपने निजी उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि उनके छह बच्चे हैं और उन्हें बताया जा रहा है कि पाँच से अधिक बच्चों का नाम दर्ज नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी परिवार में बच्चों की संख्या अधिक होना कोई कानूनी बाधा नहीं है और इसका मतदान के संवैधानिक अधिकार से कोई संबंध नहीं होना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के परिवारों का उदाहरण देते हुए तर्क दिया कि बड़े परिवार देश में असामान्य नहीं हैं।
2002 की मतदाता सूची की तकनीकी खामियाँ
ओवैसी ने यह भी कहा कि वर्ष 2002 की मतदाता सूची मैन्युअल रूप से तैयार की गई थी, जिसके कारण उसमें तकनीकी विसंगतियाँ स्वाभाविक हैं। उनके अनुसार, ऐसी पुरानी प्रविष्टियों को आधार बनाकर नागरिकों के नाम काटना उचित नहीं होगा।
नागरिकों से अपील
ओवैसी ने अंत में लोगों से आग्रह किया कि वे SIR फॉर्म भरते समय पूरी सावधानी बरतें, सभी आवश्यक दस्तावेज सही तरीके से जमा करें और यह सुनिश्चित करें कि उनका नाम मतदाता सूची में बना रहे। यह मामला आने वाले चुनावों से पहले मतदाता पंजीकरण की पारदर्शिता के लिए एक अहम पड़ाव साबित हो सकता है।