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ओवैसी का दावा: SIR के तहत 13 राज्यों में 6.5 करोड़ वोटर नाम हटे, गरीब मुस्लिम निशाने पर

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ओवैसी का दावा: SIR के तहत 13 राज्यों में 6.5 करोड़ वोटर नाम हटे, गरीब मुस्लिम निशाने पर

सारांश

असदुद्दीन ओवैसी ने SIR को सिर्फ प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि ‘बाहर किए गए भारतीयों’ का स्थायी वर्ग बनाने का औजार बताया। 13 राज्यों में 6.5 करोड़ नाम कटने और 27 लाख लोगों के अब भी जांच के दायरे में रहने के दावे के साथ, उन्होंने सरकार पर गरीबों, मुस्लिमों और प्रवासियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।

मुख्य बातें

असदुद्दीन ओवैसी ने 3 जून को दावा किया कि SIR के तहत 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 6.5 करोड़ मतदाता नाम हटाए गए।
27 लाख लोग अभी जांच के दायरे में; फॉर्म 6 से पुनः पंजीकरण संभव।
ओवैसी का आरोप — बाहर किए गए ज्यादातर लोग मुस्लिम, महिलाएं, गरीब और प्रवासी ।
ECI ने अब तक यह नहीं बताया कि कितने नाम ‘विदेशी’ श्रेणी में हटाए गए।
ओवैसी ने TFR 2.0 का हवाला देकर प्रस्तावित कमेटी की जरूरत पर सवाल उठाया।

एआईएमआईएम अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने 3 जून को आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का इस्तेमाल ‘बाहर किए गए भारतीयों’ का एक स्थायी वर्ग खड़ा करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के तहत मतदाता सूची से करीब 6.5 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं।

मुख्य आरोप

ओवैसी ने एक्स पर पोस्ट कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “केंद्र सरकार ने पहले कागजों पर आधारित SIR लागू किया, जिससे 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट से करीब 6.5 करोड़ नाम हटा दिए गए। अब वह उन्हीं हटाए गए नामों की जांच के लिए एक कमेटी बनाना चाहती है और अवैध प्रवासियों की पहचान, हिरासत और देश-निकाले के लिए एक पक्का सिस्टम बनाना चाहती है।”

हैदराबाद के सांसद के मुताबिक यह कवायद ‘गरीबों के हाथ से वोट का अधिकार छीनने’ की दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “गरीबों के पास वोट देने का अधिकार ही ताकतवर लोगों के खिलाफ एकमात्र हथियार है। इसके बिना सरकार उनके साथ जो चाहेगी, वह करेगी।”

नाम कटने का मतलब नागरिकता खोना नहीं

ओवैसी ने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार SIR के तहत किसी का नाम हटाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि वह व्यक्ति नागरिक नहीं है। उन्होंने बताया कि 27 लाख लोग अभी भी जांच के दायरे में हैं और उनमें से कई फॉर्म 6 के जरिए दोबारा मतदाता के तौर पर पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने अभी तक यह आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है कि कितने लोगों को विदेशी होने के आधार पर सूची से बाहर किया गया। ओवैसी के अनुसार, उपलब्ध आंकड़ों से संकेत मिलता है कि बाहर किए गए ज्यादातर लोग मुस्लिम, महिलाएं, गरीब और प्रवासी हैं। ये दावे ओवैसी की ओर से किए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

जनसांख्यिकी का सवाल

ओवैसी ने तर्क दिया कि सरकार के अपने आंकड़े बताते हैं कि देश की जनसांख्यिकी स्थिर हो गई है और कुल प्रजनन दर (TFR) 2.0 है। उन्होंने पूछा, “तो फिर हमें इस समिति की क्या जरूरत है? ताकि मुसलमानों के खिलाफ लगातार शक और डर का माहौल बना रहे।”

‘कागजी कार्रवाई’ पर तंज

सांसद ने यह भी कहा कि सरकार को आम भारतीयों का समय कागजी कार्रवाई में लगवाना पसंद है — कभी KYC, कभी SIR, तो कभी पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करना। उन्होंने तंज कसा कि यही सरकार “एक साधारण परीक्षा भी ठीक से आयोजित नहीं कर सकती,” लेकिन आम लोगों की जांच में जुटी रहती है। उन्होंने जोड़ा, “आम लोगों की जांच सरकार करती है, लेकिन सरकार की जांच हम नहीं कर सकते।”

आगे क्या

ओवैसी के बयान के बाद SIR प्रक्रिया और प्रस्तावित कमेटी को लेकर विपक्ष के तेवर और तीखे होने की संभावना है। निगाहें अब निर्वाचन आयोग की ओर हैं, जिससे राज्यवार हटाए गए नामों और ‘विदेशी’ श्रेणी में रखे गए लोगों का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग बढ़ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई; दूसरी ओर, ECI ने भी राज्यवार और श्रेणीवार ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया है, जिससे संदेह को जगह मिलती है। असली परीक्षा यह नहीं कि नाम कितने हटे, बल्कि यह है कि क्या हटाए गए मतदाताओं को पुनर्पंजीकरण का सुलभ, समयबद्ध रास्ता मिलता है — खासकर प्रवासी मजदूरों और महिलाओं के लिए। पारदर्शी डेटा के बिना, यह बहस आरोप-प्रत्यारोप के चक्र में फँसकर मतदाता-शुद्धिकरण की वैध जरूरत और मताधिकार-संकुचन की वैध आशंका — दोनों को नुकसान पहुँचाएगी।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण क्या है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मतदाता सूचियों की गहन समीक्षा की प्रक्रिया है, जिसके तहत मौजूदा प्रविष्टियों का सत्यापन कर डुप्लिकेट, मृत और अपात्र नाम हटाए जाते हैं। ओवैसी के अनुसार, इस प्रक्रिया के तहत 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 6.5 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं।
ओवैसी ने SIR पर क्या आरोप लगाए हैं?
असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि SIR का उपयोग ‘बाहर किए गए भारतीयों’ का एक स्थायी वर्ग बनाने और गरीबों, खासकर मुस्लिमों, महिलाओं व प्रवासियों से वोट का अधिकार छीनने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने प्रस्तावित कमेटी और अवैध प्रवासियों की पहचान-हिरासत-देश निकाला की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।
क्या SIR में नाम कटने से नागरिकता समाप्त हो जाती है?
नहीं। ओवैसी के अनुसार, कानून के तहत SIR में नाम हटना यह साबित नहीं करता कि व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है। 27 लाख लोग अभी जांच के दायरे में हैं और वे फॉर्म 6 के माध्यम से दोबारा मतदाता के तौर पर पंजीकरण करा सकते हैं।
चुनाव आयोग ने इस पर क्या कहा है?
ओवैसी का दावा है कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने अब तक यह सार्वजनिक नहीं किया है कि कितने लोगों को विदेशी होने के आधार पर मतदाता सूची से बाहर किया गया। राज्यवार और श्रेणीवार आधिकारिक डेटा का इंतजार है।
इस विवाद से सबसे ज्यादा कौन प्रभावित बताया जा रहा है?
ओवैसी के अनुसार उपलब्ध आंकड़े संकेत देते हैं कि SIR के तहत बाहर किए गए ज्यादातर लोग मुस्लिम, महिलाएं, गरीब और प्रवासी हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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