ओवैसी का आह्वान: मुसलमान तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों पर निर्भरता छोड़ें, स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व बनाएं

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ओवैसी का आह्वान: मुसलमान तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों पर निर्भरता छोड़ें, स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व बनाएं

सारांश

ओवैसी का संदेश साफ़ है — दशकों की निर्भरता के बावजूद तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल मुसलमानों को न विकास दे सके, न सुरक्षा। महाराष्ट्र, बिहार, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के नतीजों को उदाहरण बनाते हुए उन्होंने समुदाय से अपना स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व खड़ा करने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

असदुद्दीन ओवैसी ने 5 मई 2025 को मुसलमानों से स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व विकसित करने का आह्वान किया।
उन्होंने महाराष्ट्र, बिहार, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत को तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों की विफलता का प्रमाण बताया।
ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि उन्होंने 15 साल सत्ता में रहने के बावजूद मुसलमानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति नहीं सुधारी।
पश्चिम बंगाल में 60 विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम बहुसंख्यक होने के बावजूद भाजपा की जीत को उन्होंने बड़ी चिंता बताया।
एसआईआर को नागरिकता से जोड़ने का विरोध करते हुए लोगों से 2002 की मतदाता सूची से मिलान सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
मालदा और मुर्शिदाबाद में एआईएमआईएम के उज्ज्वल भविष्य का दावा किया।

एआईएमआईएम अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार, 5 मई को मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत के मुसलमानों को तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों के लिए महज़ मतदाता बनने की बजाय अपना स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व विकसित करना होगा, ताकि वे अधिकारों के साथ नागरिक के रूप में अपनी आवाज़ उठा सकें। उन्होंने कहा कि दशकों तक इन दलों पर भरोसा करने से न तो समुदाय का विकास हुआ और न ही अन्याय व भेदभाव समाप्त हुआ।

ओवैसी का मुख्य बयान

ओवैसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों के तुरंत बाद इसका समय महत्वपूर्ण है। असली सवाल यह है कि क्या एआईएमआईएम खुद उस विकल्प की भूमिका निभाने में सक्षम है जिसकी वह वकालत करती है — पार्टी के 11 उम्मीदवार पश्चिम बंगाल में एक भी सीट नहीं जीत सके। धर्मनिरपेक्ष दलों की आलोचना जितनी तीखी है, उतनी ही यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि ओवैसी की पार्टी अभी तक हैदराबाद के बाहर अपनी चुनावी उपस्थिति सीमित ही रही है। मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक विकल्पों की यह बहस व्यापक है, लेकिन इसका उत्तर केवल नारों से नहीं, ज़मीनी संगठन से मिलेगा।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असदुद्दीन ओवैसी ने मुसलमानों को क्या सलाह दी?
ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों को तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों के लिए मात्र मतदाता बनने की बजाय अपना स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व विकसित करना चाहिए। उनके अनुसार इन दलों पर दशकों की निर्भरता से न विकास मिला और न अन्याय समाप्त हुआ।
ओवैसी ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए?
ओवैसी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के मुसलमानों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया और 15 साल सत्ता में रहने के बावजूद उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि बंगाल के बाहर बनर्जी की उदार और धर्मनिरपेक्ष छवि पूरी तरह गलत है।
पश्चिम बंगाल में एआईएमआईएम का प्रदर्शन कैसा रहा?
एआईएमआईएम के 11 उम्मीदवारों ने पश्चिम बंगाल चुनाव में हिस्सा लिया, लेकिन कोई भी जीत नहीं सका। हालांकि ओवैसी ने कंडी सीट पर अपने उम्मीदवार को मिले वोटों का उल्लेख करते हुए मतदाताओं का आभार जताया।
एसआईआर मुद्दे पर ओवैसी का क्या रुख है?
ओवैसी ने एसआईआर को नागरिकता से जोड़ने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने और 2002 की मतदाता सूची से मिलान सुनिश्चित करने का आग्रह किया, साथ ही तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को भी इस मुद्दे पर सावधान रहने की सलाह दी।
ओवैसी ने असम चुनाव परिणामों पर क्या कहा?
ओवैसी ने कहा कि असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने लगभग 50,000 मुसलमानों को विस्थापित किया, फिर भी वे चुनाव जीत गए। उन्होंने कहा कि अगर बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ को अधिक विधायक मिलते तो असम के मुसलमानों को और मज़बूत आवाज़ मिल सकती थी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले