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क्या पश्चिम बंगाल में एसआईआर विवाद को लेकर टीएमसी सांसद ने याचिका दायर की?

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क्या पश्चिम बंगाल में एसआईआर विवाद को लेकर टीएमसी सांसद ने याचिका दायर की?

सारांश

पश्चिम बंगाल में चल रही एसआईआर प्रक्रिया पर टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रॉयन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें तकनीकी खामियों और योग्य मतदाताओं के नाम हटाने की गंभीरता पर प्रकाश डाला गया है। क्या यह लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकता है?

मुख्य बातें

टीएमसी सांसद ने एसआईआर प्रक्रिया पर याचिका दायर की।
गंभीर तकनीकी खामियों का आरोप लगाया गया है।
योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।
चुनाव आयोग के कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट से मदद की उम्मीद की जा रही है।

नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद डेरेक ओ ब्रॉयन ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दाखिल की है। याचिका में एसआईआर के क्रियान्वयन में गंभीर खामियों का आरोप लगाया गया है और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं।

याचिका में यह भी कहा गया है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान तकनीकी प्रबंधन में गड़बड़ी के कारण पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है। सांसद डेरेक ओ ब्रॉयन ने यह दलील दी है कि तकनीकी खामियों और अव्यवस्थित प्रक्रिया के कारण आम नागरिकों, विशेषकर बुजुर्ग मतदाताओं को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि चुनाव आयोग द्वारा बूथ स्तर ऑफिसर्स (बीएलओ) को व्हाट्सऐप या अन्य अनौपचारिक माध्यमों से निर्देश दिए जा रहे हैं। इसे तुरंत बंद करने की मांग की गई है, ताकि मतदाता सूची से संबंधित कार्य पूरी तरह से नियमों के तहत और औपचारिक तरीके से किया जा सके। इसके अलावा, याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह अनुरोध किया गया है कि वह चुनाव आयोग को निर्देश दे कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, संशोधन करने या आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 15 जनवरी से आगे बढ़ाई जाए।

गौरतलब है कि प्रदेश में 15 दिसंबर 2025 से एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है और यह 15 जनवरी 2026 तक जारी रहेगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने सभी दलों और मतदाताओं से अपील की है कि वे निर्धारित फॉर्म और प्रक्रिया के तहत ही दावे-आपत्तियां दर्ज करें।

इसी बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सोमवार को बताया कि 17 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026 तक विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा कुल 2,09,438 दावे और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। जानकारी के अनुसार, भाजपा ने सबसे अधिक 61,451 दावे-आपत्तियां, जिनमें शामिल हैं 1 नाम जोड़ने और शून्य नाम हटाने के लिए, दर्ज की हैं। इसके बाद सबसे अधिक दावे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), यानी सीपीआई (एम), ने 49,436 दर्ज किए हैं। कांग्रेस ने 18,777 और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) ने 77,867 दावे-आपत्तियां प्रस्तुत की हैं। आम आदमी पार्टी (आप) ने 21, बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने शून्य और अन्य छोटे दलों ने कुल मिलाकर 2,091 दावे दर्ज किए हैं।

ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल प्रकाशन के बाद आम मतदाताओं से सीधे प्राप्त दावों और आपत्तियों की संख्या 206,237 (नाम जोड़ने के लिए) और 38,489 (नाम हटाने के लिए) है। निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि बिना निर्धारित फॉर्म और घोषणा पत्र के प्राप्त सामान्य शिकायतें दावों में नहीं गिनी जाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह पूरे देश में चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। सभी राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीएमसी सांसद का नाम क्या है?
टीएमसी सांसद का नाम डेरेक ओ ब्रॉयन है।
इस याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिका में तकनीकी खामियों को दूर करने और मतदाता सूची में नाम जोड़ने की अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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