दिल्ली SIR विवाद: AAP का आरोप — 14 लाख गरीब, दलित और प्रवासी मतदाताओं के नाम सूची से हटाए
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) ने 17 जुलाई 2026 को आरोप लगाया कि नई दिल्ली में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का उपयोग जानबूझकर गरीब, दलित, पिछड़े और प्रवासी मतदाताओं के मतदान अधिकार छीनने के लिए किया जा रहा है। पार्टी का दावा है कि प्री-SIR चरण के दौरान ही लगभग 14 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए, और अब उन्हें SIR प्रक्रिया में भाग लेने से भी वंचित किया जा रहा है।
तीन स्तरों पर अनियमितताओं का आरोप
दिल्ली AAP प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में तीन अलग-अलग स्तरों पर गड़बड़ी की जा रही है। उनके अनुसार, पहले प्री-SIR के दौरान लाखों नाम हटाए गए। इसके बाद झुग्गी-झोपड़ी और गरीब बस्तियों में रहने वाले लोगों तक गणना (एन्यूमरेशन) फॉर्म नहीं पहुँचाए गए, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में 100 प्रतिशत फॉर्म वितरण का दावा किया जा रहा है। तीसरे, जिन लोगों की झुग्गियाँ हटाई गईं और जिन्हें सरकार द्वारा फ्लैट आवंटित किए गए, उन्हें भी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा फॉर्म नहीं दिए जा रहे।
प्रवासी मतदाताओं पर विशेष असर
भारद्वाज ने यह भी कहा कि गर्मियों की छुट्टियों के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी परिवार अपने गृह राज्यों में गए हुए थे। इसी अवधि में प्री-SIR की प्रक्रिया पूरी कर उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। उनका आरोप है कि अब इन्हें गणना फॉर्म भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, जिससे वे अपना नाम दोबारा दर्ज कराने में असमर्थ हैं।
विधायकों ने जमीनी स्थिति का ब्यौरा दिया
बुराड़ी विधायक संजीव झा ने आरोप लगाया कि BLO किसी घर पर पहुँचा और घर बंद मिला तो मतदाता को अनुपस्थित मान लिया गया, जबकि किरायेदारों के मकान बदलने पर उन्हें 'शिफ्टेड' बताकर सूची से बाहर कर दिया गया। कोंडली विधायक कुलदीप कुमार ने दावा किया कि कई गाँवों और बस्तियों में लोगों को फॉर्म नहीं मिले, जबकि रिकॉर्ड में सभी फॉर्म वितरित दिखाए गए हैं। विकास गोयल ने कहा कि पिछले डेढ़ वर्ष में जिन हजारों झुग्गियों को हटाया गया और जिन्हें फ्लैट आवंटित किए गए, उन्हें भी BLO द्वारा गणना फॉर्म नहीं दिए जा रहे — सरकार के पास इनका पूरा रिकॉर्ड होने के बावजूद।
AAP की माँग और संवैधानिक तर्क
आम आदमी पार्टी ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कराने और जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं उन्हें दोबारा प्रक्रिया में शामिल करने की माँग की है। पार्टी ने तर्क दिया कि मतदान का अधिकार प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और किसी भी पात्र मतदाता को इससे वंचित नहीं किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि AAP ने इन सभी आरोपों के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जिम्मेदार ठहराया है, हालाँकि BJP की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब दिल्ली में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ राजनीतिक दलों के एजेंडे पर हैं। मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ने की संभावना है। AAP के आरोपों की जाँच और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा तय करेगी।