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दिल्ली SIR विवाद: AAP का आरोप — 14 लाख गरीब, दलित और प्रवासी मतदाताओं के नाम सूची से हटाए

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दिल्ली SIR विवाद: AAP का आरोप — 14 लाख गरीब, दलित और प्रवासी मतदाताओं के नाम सूची से हटाए

सारांश

AAP का बड़ा आरोप — दिल्ली में SIR की आड़ में 14 लाख गरीब, दलित और प्रवासी मतदाताओं के नाम चुपचाप सूची से हटाए गए। BLO ने फॉर्म नहीं बाँटे, रिकॉर्ड में 100% वितरण दिखाया। चुनाव से पहले मतदान अधिकार का यह विवाद गहरा राजनीतिक संकट बन सकता है।

मुख्य बातें

AAP ने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्री-SIR के दौरान लगभग 14 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए।
गरीब, दलित, पिछड़े और प्रवासी मतदाताओं को BLO द्वारा गणना फॉर्म नहीं दिए गए, जबकि रिकॉर्ड में 100% वितरण दर्ज है।
गर्मियों की छुट्टियों में गृह राज्य गए प्रवासी परिवारों को अनुपस्थित मानकर सूची से बाहर किया गया।
झुग्गी हटाने के बाद सरकारी फ्लैट पाने वाले लोगों को भी SIR प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है।
AAP ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से निष्पक्ष जाँच और हटाए गए मतदाताओं को पुनः शामिल करने की माँग की।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने 17 जुलाई 2026 को आरोप लगाया कि नई दिल्ली में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का उपयोग जानबूझकर गरीब, दलित, पिछड़े और प्रवासी मतदाताओं के मतदान अधिकार छीनने के लिए किया जा रहा है। पार्टी का दावा है कि प्री-SIR चरण के दौरान ही लगभग 14 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए, और अब उन्हें SIR प्रक्रिया में भाग लेने से भी वंचित किया जा रहा है।

तीन स्तरों पर अनियमितताओं का आरोप

दिल्ली AAP प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में तीन अलग-अलग स्तरों पर गड़बड़ी की जा रही है। उनके अनुसार, पहले प्री-SIR के दौरान लाखों नाम हटाए गए। इसके बाद झुग्गी-झोपड़ी और गरीब बस्तियों में रहने वाले लोगों तक गणना (एन्यूमरेशन) फॉर्म नहीं पहुँचाए गए, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में 100 प्रतिशत फॉर्म वितरण का दावा किया जा रहा है। तीसरे, जिन लोगों की झुग्गियाँ हटाई गईं और जिन्हें सरकार द्वारा फ्लैट आवंटित किए गए, उन्हें भी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा फॉर्म नहीं दिए जा रहे।

प्रवासी मतदाताओं पर विशेष असर

भारद्वाज ने यह भी कहा कि गर्मियों की छुट्टियों के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी परिवार अपने गृह राज्यों में गए हुए थे। इसी अवधि में प्री-SIR की प्रक्रिया पूरी कर उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। उनका आरोप है कि अब इन्हें गणना फॉर्म भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, जिससे वे अपना नाम दोबारा दर्ज कराने में असमर्थ हैं।

विधायकों ने जमीनी स्थिति का ब्यौरा दिया

बुराड़ी विधायक संजीव झा ने आरोप लगाया कि BLO किसी घर पर पहुँचा और घर बंद मिला तो मतदाता को अनुपस्थित मान लिया गया, जबकि किरायेदारों के मकान बदलने पर उन्हें 'शिफ्टेड' बताकर सूची से बाहर कर दिया गया। कोंडली विधायक कुलदीप कुमार ने दावा किया कि कई गाँवों और बस्तियों में लोगों को फॉर्म नहीं मिले, जबकि रिकॉर्ड में सभी फॉर्म वितरित दिखाए गए हैं। विकास गोयल ने कहा कि पिछले डेढ़ वर्ष में जिन हजारों झुग्गियों को हटाया गया और जिन्हें फ्लैट आवंटित किए गए, उन्हें भी BLO द्वारा गणना फॉर्म नहीं दिए जा रहे — सरकार के पास इनका पूरा रिकॉर्ड होने के बावजूद।

AAP की माँग और संवैधानिक तर्क

आम आदमी पार्टी ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कराने और जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं उन्हें दोबारा प्रक्रिया में शामिल करने की माँग की है। पार्टी ने तर्क दिया कि मतदान का अधिकार प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और किसी भी पात्र मतदाता को इससे वंचित नहीं किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि AAP ने इन सभी आरोपों के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जिम्मेदार ठहराया है, हालाँकि BJP की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे क्या होगा

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब दिल्ली में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ राजनीतिक दलों के एजेंडे पर हैं। मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ने की संभावना है। AAP के आरोपों की जाँच और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अभी तक ये एकतरफा दावे हैं — चुनाव आयोग या BJP की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिर भी, यह पहली बार नहीं है जब मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर शहरी प्रवासियों और झुग्गी निवासियों के संदर्भ में सवाल उठे हों — यह एक ढाँचागत कमज़ोरी है जो हर चुनाव से पहले उभरती है। असली मुद्दा यह है कि BLO की जवाबदेही और फॉर्म वितरण का सत्यापन स्वतंत्र रूप से क्यों नहीं होता। 14 लाख का आँकड़ा, अगर सही है, तो यह दिल्ली जैसे शहर में चुनावी प्रतिनिधित्व को बुनियादी रूप से प्रभावित करने वाला है — और चुनाव आयोग की चुप्पी इस विवाद को और गहरा करेगी।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) विवाद क्या है?
AAP का आरोप है कि दिल्ली में SIR प्रक्रिया के तहत प्री-SIR चरण में लगभग 14 लाख गरीब, दलित और प्रवासी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। पार्टी का कहना है कि इन्हें अब SIR में भाग लेने के लिए आवश्यक गणना फॉर्म भी नहीं दिए जा रहे।
BLO पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
AAP विधायकों का आरोप है कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) झुग्गी बस्तियों और गरीब इलाकों में घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करने के बजाय केवल औपचारिकताएँ पूरी कर रहे हैं। रिकॉर्ड में 100% वितरण दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर हजारों लोगों को फॉर्म नहीं मिले।
प्रवासी मतदाताओं के नाम क्यों हटाए गए?
AAP प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के अनुसार, गर्मियों की छुट्टियों के दौरान जब प्रवासी परिवार अपने गृह राज्यों में थे, उसी समय प्री-SIR की प्रक्रिया पूरी की गई और उन्हें अनुपस्थित मानकर सूची से बाहर कर दिया गया। किरायेदारों के मकान बदलने पर भी उन्हें 'शिफ्टेड' बताकर हटाया गया।
AAP ने चुनाव आयोग से क्या माँग की है?
आम आदमी पार्टी ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कराने और जिन पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने की माँग की है। पार्टी ने इसे संवैधानिक अधिकार का हनन बताया है।
सरकारी फ्लैट पाने वाले झुग्गी निवासियों का क्या हुआ?
AAP नेता विकास गोयल के अनुसार, पिछले डेढ़ वर्ष में जिन हजारों झुग्गी निवासियों को सरकार ने फ्लैट आवंटित किए, उन्हें भी BLO द्वारा गणना फॉर्म नहीं दिए जा रहे। सरकार के पास इन लोगों का पूरा रिकॉर्ड होने के बावजूद उन्हें SIR प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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