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राजौरी बाढ़ बचाव: सेना ने 11 नागरिकों को बचाया, 5 बच्चे भी शामिल; बफलियाज में 10 की मौत

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राजौरी बाढ़ बचाव: सेना ने 11 नागरिकों को बचाया, 5 बच्चे भी शामिल; बफलियाज में 10 की मौत

सारांश

राजौरी में फ्लैश फ्लड के बीच भारतीय सेना ने दो समानांतर अभियानों में 11 नागरिकों — जिनमें 5 बच्चे शामिल — को सुरक्षित निकाला। पुंछ के बफलियाज में 10 मौतें हो चुकी हैं, कई लापता हैं। CM उमर अब्दुल्ला दिल्ली से जम्मू लौटे।

मुख्य बातें

भारतीय सेना ने 19 जुलाई को राजौरी जिले में फ्लैश फ्लड के बीच 11 नागरिकों को बचाया, जिनमें 5 बच्चे शामिल थे।
व्हाइट नाइट कॉर्प्स के जवानों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस , SDRF और सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के साथ मिलकर दो समानांतर अभियान चलाए।
चुरुंग गाँव के पास नाले में फंसे 9 लोग और नौशेरा तवी नदी के टापू पर फंसे 2 युवक सुरक्षित निकाले गए।
बफलियाज इलाके में 10 लोगों की मौत की पुष्टि; कई अन्य अभी भी लापता।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला राहत कार्यों की निगरानी के लिए नई दिल्ली से तत्काल जम्मू लौटे।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने के निर्देश दिए।

भारतीय सेना ने रविवार, 19 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के बीच तेज़ और समन्वित बचाव अभियान चलाकर 11 नागरिकों को सुरक्षित निकाला, जिनमें पाँच बच्चे भी शामिल थे। रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह अभियान व्हाइट नाइट कॉर्प्स के जवानों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के साथ मिलकर अंजाम दिया।

मुख्य घटनाक्रम

बचाव अभियान दो मोर्चों पर एक साथ चलाया गया। पहले ऑपरेशन में, थानामंडी के दक्षिण में चुरुंग गाँव के पास एक उफनते नाले में फंसे नौ नागरिकों — जिनमें पाँच बच्चे थे — की सूचना मिलते ही सेना के जवान तत्काल मौके पर पहुँचे। तेज़ जलधारा और प्रतिकूल मौसम के बावजूद सभी को सुरक्षित निकाला गया।

दूसरे समानांतर अभियान में, इंजीनियर रेजिमेंट के जवानों ने राजौरी से लगभग 12 किलोमीटर दूर धनगरी के पास नौशेरा तवी नदी के बीच एक टापू पर फंसे 17 से 20 वर्ष की आयु के दो युवकों को सुरक्षित बाहर निकाला। बाद में दोनों युवकों को राजौरी के नागरिक प्रशासन अधिकारियों की उपस्थिति में उनके परिवारों को सौंपा गया।

व्यापक तबाही का मंज़र

अचानक आई बाढ़ ने पुंछ और राजौरी जिलों में भारी तबाही मचाई है। बफलियाज इलाके में 10 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लगातार बारिश और फ्लैश फ्लड के कारण कई इलाकों में संपर्क टूट गया है।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में मानसून के दौरान इस तरह की आपदाएँ हर वर्ष जनजीवन को बाधित करती हैं, लेकिन इस बार पुंछ और राजौरी में एक साथ आई बाढ़ की तीव्रता असाधारण रही।

प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सुबह ही बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया और जिला प्रशासन को प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला राहत एवं बचाव कार्यों की व्यक्तिगत निगरानी के लिए नई दिल्ली से तत्काल जम्मू लौटे।

सेना और एजेंसियों का समन्वय

रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, सेना, पुलिस, SDRF और सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के बीच बेहतरीन तालमेल ने यह सुनिश्चित किया कि दोनों बचाव अभियान बिना किसी जान-माल के अतिरिक्त नुकसान के सफलतापूर्वक पूरे हों। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय सेना संकट के समय नागरिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहने के अपने संकल्प पर अडिग है।

आगे की स्थिति

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य जारी हैं और लापता लोगों की तलाश में अभियान चल रहा है। मौसम विभाग की चेतावनियों के मद्देनज़र प्रशासन सतर्क है। यह घटना एक बार फिर इस क्षेत्र में आपदा प्रबंधन के बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने की ज़रूरत को रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बफलियाज में 10 मौतें यह सवाल उठाती हैं कि पूर्व चेतावनी प्रणाली और निकासी तंत्र कितने प्रभावी हैं। जम्मू-कश्मीर में हर मानसून फ्लैश फ्लड की पुनरावृत्ति होती है, फिर भी स्थायी बुनियादी ढाँचे और आपदा-रोधी बस्तियों की योजना वर्षों से लंबित है। सेना को बार-बार नागरिक प्रशासन की खाइयाँ भरनी पड़ती हैं — यह साहस की कहानी है, लेकिन साथ ही नीतिगत विफलता का संकेत भी।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजौरी बाढ़ बचाव अभियान में कितने लोगों को बचाया गया?
भारतीय सेना ने 19 जुलाई को राजौरी जिले में दो अलग-अलग अभियानों में कुल 11 नागरिकों को सुरक्षित बचाया, जिनमें पाँच बच्चे शामिल थे। ये सभी लगातार बारिश और फ्लैश फ्लड के कारण विभिन्न स्थानों पर फंसे हुए थे।
राजौरी में बाढ़ बचाव अभियान कहाँ-कहाँ चलाया गया?
पहला अभियान थानामंडी के दक्षिण में चुरुंग गाँव के पास एक उफनते नाले में चलाया गया, जहाँ 9 लोग फंसे थे। दूसरा अभियान राजौरी से लगभग 12 किलोमीटर दूर धनगरी के पास नौशेरा तवी नदी के बीच एक टापू पर चलाया गया, जहाँ 2 युवक फंसे थे।
जम्मू-कश्मीर की बाढ़ में कितने लोगों की मौत हुई?
बफलियाज इलाके में अचानक आई बाढ़ से 10 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। कई अन्य लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं और तलाश अभियान जारी है।
राजौरी बाढ़ पर सरकार ने क्या कदम उठाए?
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सुबह बाढ़ की स्थिति का जायजा लेकर जिला प्रशासन को प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला राहत एवं बचाव कार्यों की व्यक्तिगत निगरानी के लिए नई दिल्ली से तत्काल जम्मू लौटे।
व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने राजौरी बचाव में कैसे भूमिका निभाई?
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, व्हाइट नाइट कॉर्प्स के अंतर्गत भारतीय सेना के जवानों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस, SDRF और सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के साथ समन्वय कर दोनों बचाव अभियान सफलतापूर्वक पूरे किए। इंजीनियर रेजिमेंट के जवानों ने नौशेरा तवी नदी के टापू पर फंसे दो युवकों को तेज़ जलधारा के बावजूद सुरक्षित निकाला।
राष्ट्र प्रेस
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