21 जुलाई 2026
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पुंछ-राजौरी बाढ़: बादल फटने से 20 से अधिक मौतें, 8 लापता; सेना-SDRF का बचाव अभियान जारी

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पुंछ-राजौरी बाढ़: बादल फटने से 20 से अधिक मौतें, 8 लापता; सेना-SDRF का बचाव अभियान जारी

सारांश

जम्मू-कश्मीर के पुंछ और राजौरी में रविवार तड़के बादल फटने से आई बाढ़ ने 20 से अधिक जानें लीं, 8 लोग अभी लापता हैं। मर्राह गाँव में एक ही परिवार के 8 सदस्य बह गए। सेना, SDRF और पुलिस का बचाव अभियान जारी है, मौसम विभाग ने और बारिश की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

पुंछ और राजौरी में 20 जुलाई 2026 को बादल फटने से आई अचानक बाढ़ में 20 से अधिक लोगों की मौत हुई।
सुरनकोट के मर्राह गाँव में एक परिवार के 8 सदस्य लापता हुए — 3 शव मिले, 5 की तलाश जारी।
राजौरी में 20 गाड़ियाँ बह गईं, 40 अन्य क्षतिग्रस्त; 50 से अधिक परिवारों के घर उजड़े।
सेना, SDRF , NDRF और पुलिस ने 45 से अधिक लोगों को सुरक्षित बचाया।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आपात बैठक बुलाई; उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने हालात का जायज़ा लिया।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भारी बारिश और अचानक बाढ़ की चेतावनी जारी की है।

जम्मू-कश्मीर के पुंछ और राजौरी जिलों में रविवार, 20 जुलाई 2026 की तड़के बादल फटने से आई विनाशकारी अचानक बाढ़ ने 20 से अधिक लोगों की जान ले ली और 8 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। सुरनकोट, थन्नामंडी और हवेली सहित दर्जनों गाँवों में घर, दुकानें और बुनियादी ढाँचा पल भर में बह गए, जबकि बचाव दलों ने नदियों के उफनते पानी से 45 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला।

मुख्य घटनाक्रम

रविवार तड़के करीब 2:45 बजे ऊपरी पहाड़ी इलाकों में कई स्थानों पर बादल फटने से सुरन नदी, सुखतो नदी और थन्नामंडी नदी का जलस्तर अचानक खतरनाक स्तर तक बढ़ गया। पुंछ के सुरनकोट क्षेत्र में 15 लोग बाढ़ में बह गए या मलबे में दब गए। मर्राह गाँव में एक परिवार के 8 सदस्य लापता हो गए — बाद में 3 शव बरामद हुए, जबकि 5 अन्य की तलाश अभी जारी है। सांगला गाँव में एक अन्य परिवार का घर बह गया, जिसमें 1 शव मिला और 3 लोग अभी भी लापता हैं।

राजौरी के बेला कॉलोनी में बाढ़ का पानी नदी की सुरक्षा दीवार तोड़कर न्यू बेला बस स्टैंड में घुस गया। बस स्टैंड पर खड़ी करीब 20 गाड़ियाँ तेज बहाव में बह गईं, जबकि 40 अन्य गाड़ियों को भारी नुकसान पहुँचा। पिंकी देवी नाम की एक महिला बाढ़ में बह गई — बचाव दलों ने बाद में उनका शव बरामद किया। हवेली इलाके में एक कच्चा घर ढहने से नाज़िया कौसर की मौत हो गई और उनके पति मोहम्मद हफीज़ गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें जीएमसी राजौरी रेफर किया गया।

बुनियादी ढाँचे को नुकसान

बाढ़ ने पुंछ के सुरनकोट क्षेत्र में कम से कम 47 घरों और इमारतों को क्षति पहुँचाई, जबकि राजौरी में 20 से अधिक दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरी तरह बर्बाद हो गए। बिजली के कई खंभे और आधा दर्जन ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने से थन्नामंडी, दरहाल, सुरनकोट, मंडी और हवेली के कई इलाकों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। दर्जनों मवेशी और परिवारों की जीवन भर की जमा-पूँजी भी बाढ़ में बह गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह हाल के दशकों में राजौरी में आई सबसे भयंकर बाढ़ों में से एक थी। स्थानीय लोगों ने नदी के किनारे बस स्टैंड और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के निर्माण को लेकर पूर्ववर्ती प्रशासनों पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि नाले की सरकारी ज़मीन पर प्रभावशाली लोगों ने स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध निर्माण किए थे।

सरकार की प्रतिक्रिया

उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को प्रभावित इलाकों का जायज़ा लिया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू में वरिष्ठ अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई और सभी विभागों को प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता पहुँचाने का निर्देश दिया। रिपोर्टों के अनुसार, जम्मू पहुँचने के बाद से सोमवार सुबह तक मुख्यमंत्री को हर आधे घंटे में ताज़ा जानकारी दी जा रही थी।

जिला प्रशासन ने सेना, SDRF, NDRF, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सिविल डिफेंस के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर बचाव और राहत अभियान शुरू किया। नदी के किनारों से 30 से अधिक लोगों को बचाया गया। नुकसान का व्यापक आकलन जारी है और सभी संबंधित विभाग विस्तृत क्षति रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।

आम जनता पर असर

अब्दुल्ला ब्रिज और तारिक ब्रिज के पास की झुग्गी-बस्तियाँ पूरी तरह तबाह हो गईं और 50 से अधिक परिवारों के घर उजड़ गए। कई परिवारों के पास बाढ़ के बाद सिर्फ वही कपड़े बचे जो उन्होंने पहन रखे थे। जल निकायों के पास रहने वाले लोगों को अगले कुछ दिनों तक सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि मौसम विभाग ने इस क्षेत्र में और अधिक भारी बारिश व अचानक बाढ़ की चेतावनी जारी की है।

क्या होगा आगे

लापता लोगों की तलाश में सेना, पुलिस, SDRF और स्थानीय नागरिकों की संयुक्त टीमें मलबे की छानबीन कर रही हैं। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए बचाव अभियान में तेज़ी लाई गई है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि प्रभावित परिवारों को राहत और मुआवज़े की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। इस त्रासदी ने एक बार फिर पहाड़ी नदियों के किनारे अनियोजित निर्माण और बाढ़ सुरक्षा ढाँचे की कमज़ोरी को उजागर किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कुछ साल पहले ही बना था, नदी की सुरक्षा दीवार टूटते ही पल भर में तबाह हो गया; प्रत्यक्षदर्शियों के आरोप बताते हैं कि नाले की ज़मीन पर अवैध निर्माण को प्रशासनिक संरक्षण मिला था। जम्मू-कश्मीर में हर मानसून ऐसी ही खबरें आती हैं, फिर भी बाढ़ जोखिम क्षेत्रों में निर्माण नियंत्रण और नदी-किनारे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कागज़ों तक सीमित रहती है। जब तक भूमि उपयोग नीति और नदी प्रबंधन में ठोस बदलाव नहीं आता, राहत अभियानों की वीरगाथाएँ हर साल दोहराई जाती रहेंगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुंछ और राजौरी में बाढ़ कब और कैसे आई?
20 जुलाई 2026 की तड़के करीब 2:45 बजे ऊपरी पहाड़ी इलाकों में कई स्थानों पर बादल फटने से सुरन नदी, सुखतो नदी और थन्नामंडी नदी का जलस्तर अचानक खतरनाक स्तर तक बढ़ गया, जिससे पुंछ और राजौरी जिलों में विनाशकारी अचानक बाढ़ आई।
बाढ़ में कितने लोगों की मौत हुई और कितने लापता हैं?
अधिकारियों के अनुसार अब तक 20 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 8 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। सुरनकोट के मर्राह गाँव में एक परिवार के 8 सदस्यों में से 3 के शव मिले हैं, जबकि 5 की तलाश जारी है।
बचाव अभियान में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल हैं?
सेना, SDRF, NDRF, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सिविल डिफेंस और स्थानीय नागरिकों ने संयुक्त बचाव अभियान चलाया है। अब तक 45 से अधिक लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है और लापता लोगों की तलाश मलबे में जारी है।
सरकार ने बाढ़ पर क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू में वरिष्ठ अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई और सभी विभागों को प्रभावित परिवारों की हर संभव मदद का निर्देश दिया। उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को हालात का जायज़ा लिया और नुकसान का व्यापक आकलन जारी है।
क्या आगे भी बाढ़ का खतरा है?
हाँ, मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर के इन इलाकों में आने वाले दिनों में भारी बारिश और अचानक बाढ़ की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने जल निकायों के पास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
राष्ट्र प्रेस
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