नेपाल बाढ़: बिदुर नगरपालिका महापौर राजन श्रेष्ठ ने भारत को बताया सच्चा मित्र, पुनर्निर्माण सहायता की अपील
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के त्रिशूली क्षेत्र में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत द्वारा जारी राहत और बचाव कार्यों की सराहना करते हुए बिदुर नगरपालिका के महापौर राजन श्रेष्ठ ने 4 सितंबर को कहा कि भारत हमेशा से नेपाल का सच्चा मित्र रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए दीर्घकालिक समर्थन की अपील की।
26 अगस्त की तबाही: एक अभूतपूर्व आपदा
महापौर राजन श्रेष्ठ ने कहा, '26 अगस्त का वह भयावह दिन हम कभी नहीं भूल पाएंगे।' उनके अनुसार, अचानक आई इस जल-आपदा ने नेपाल में पहले कभी न देखा गया विनाश मचाया। अब तक हजारों शव बरामद हो चुके हैं और अधिकारियों के अनुसार वास्तविक मृत्यु संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका है।
यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल पहले से ही भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से उबरने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि नेपाल भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है और यहाँ मानसून के दौरान बाढ़ व भूस्खलन की घटनाएँ सामान्य हैं, परंतु इस बार की तीव्रता असाधारण बताई जा रही है।
बिदुर नगरपालिका पर आपदा का असर
बिदुर नगरपालिका के कुल 13 वार्डों में से 10 वार्ड इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। महापौर श्रेष्ठ के अनुसार, नगरपालिका की करीब 5,000 की आबादी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुई है और 500 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। प्रभावित नागरिकों को फिलहाल नगरपालिका द्वारा स्थापित होल्डिंग सेंटरों में रखा गया है, जहाँ से उन्हें राहत सामग्री वितरित की जा रही है।
नगरपालिका प्रशासन पुनर्वास की योजना पर काम कर रहा है। महापौर ने बताया कि लक्ष्य है कि प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द स्थायी आश्रय उपलब्ध कराया जाए।
भारत की भूमिका: राहत से पुनर्निर्माण तक
महापौर राजन श्रेष्ठ ने कहा कि जिस प्रकार 2015 के भूकंप के दौरान भारत ने नेपाल की मदद की थी, उसी तरह इस बाढ़ आपदा में भी भारत सरकार राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों के लिए वित्तीय एवं व्यावहारिक सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष रूप से धन्यवाद दिया।
आपदाग्रस्त क्षेत्रों में पुनर्स्थापना कार्य भी भारत की सहायता से जारी है। बिदुर नगरपालिका के साथ-साथ नुवाकोट और रसुवा जिलों के लिए भी दीर्घकालिक पुनर्निर्माण सहायता की आशा व्यक्त की गई है।
भारत-नेपाल संबंध: आपदा में परखी दोस्ती
महापौर श्रेष्ठ का यह बयान भारत-नेपाल द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, भौगोलिक और ऐतिहासिक निकटता रही है और आपदा प्रबंधन सहयोग इस रिश्ते की एक अहम कड़ी रही है। यह पहला मौका नहीं है जब भारत ने नेपाल में संकट के समय तत्काल सहायता भेजी हो — 2015 के गोरखा भूकंप के बाद भी भारतीय सेना और राहत दल सबसे पहले पहुँचे थे।
आलोचकों का कहना है कि दीर्घकालिक पुनर्निर्माण में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का वास्तविक परीक्षण तब होगा जब तात्कालिक राहत के बाद की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल, नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन मिलकर प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।
आगे की राह
बिदुर नगरपालिका प्रशासन का कहना है कि पुनर्वास योजना पर काम जारी है और होल्डिंग सेंटरों से लोगों को स्थायी आवास में स्थानांतरित करना प्राथमिकता है। नुवाकोट और रसुवा जिलों के साथ समन्वय कर दीर्घकालिक पुनर्निर्माण के लिए भारत सहित अंतर्राष्ट्रीय सहयोगियों से समर्थन माँगा जा रहा है।