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नेपाल बाढ़ त्रासदी: भारतीय नेताओं ने जताया दुख, 600 से अधिक मृत, 2,400 लापता

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नेपाल बाढ़ त्रासदी: भारतीय नेताओं ने जताया दुख, 600 से अधिक मृत, 2,400 लापता

सारांश

नेपाल की विनाशकारी बाढ़ ने 600 से अधिक जानें ली हैं और 2,400 से अधिक लोग लापता हैं। भारतीय नेताओं ने संवेदना जताते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की माँग की। झारखंड के दो प्रवासी मज़दूर भी लापता हैं — यह त्रासदी गरीब प्रवासियों की असुरक्षा को भी उजागर करती है।

मुख्य बातें

नेपाल में अचानक आई बाढ़ में अब तक 600 से अधिक शव बरामद; 2,400 से अधिक लोग लापता।
झारखंड के दो प्रवासी मज़दूर नेपाल में लापता, रोज़गार के लिए 1,500 किलोमीटर दूर गए थे।
UP BJP अध्यक्ष पंकज चौधरी , बिहार मंत्री अशोक कुमार चौधरी , कांग्रेस नेताओं ने गहरी संवेदना जताई।
बिहार मंत्री ने अगले 20-25 वर्षों की दीर्घकालिक योजना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की ज़रूरत पर बल दिया।
कांग्रेस ने भारत सरकार से लापता भारतीय नागरिकों का पता लगाने के लिए तत्काल कार्रवाई की माँग की।

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक 600 से अधिक शव बरामद हो चुके हैं और 2,400 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। इस मानवीय संकट पर भारत के विभिन्न राज्यों के नेताओं ने गहरी संवेदना जताई है और भारत सरकार द्वारा भेजी जा रही राहत सामग्री का स्वागत करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी मदद के लिए आगे आने की अपील की है।

मुख्य घटनाक्रम

नेपाल में आई इस बाढ़ को आलोचक और विशेषज्ञ दोनों ही पिछले कई वर्षों की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक बता रहे हैं। झारखंड से मिली खबरों के अनुसार, राज्य के दो मज़दूर अभी भी नेपाल में लापता हैं और यह संख्या बढ़ने की आशंका है। ये मज़दूर रोज़गार की तलाश में करीब 1,500 किलोमीटर दूर नेपाल गए थे।

यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल पिछले तीन-चार वर्षों में बार-बार प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहा है। गौरतलब है कि नेपाल एक भूकंप-संभावित और बाढ़-प्रवण क्षेत्र में स्थित है, जहाँ आपदा प्रबंधन के लिए सीमित संसाधन उपलब्ध हैं।

नेताओं की प्रतिक्रियाएँ

महाराजगंज में उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा, 'नेपाल में हुई घटना हम सभी के लिए दिल दहला देने वाली है। हम सभी इससे प्रभावित लोगों के साथ खड़े हैं। एक अच्छे पड़ोसी के तौर पर भारत सरकार ने मदद भेजी है। सरकार भविष्य में भी मदद करती रहेगी।'

पटना में बिहार सरकार के मंत्री अशोक कुमार चौधरी ने इस आपदा को 'बहुत दुखद' बताते हुए दीर्घकालिक समाधान की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा, 'नेपाल एक बहुत कमज़ोर देश है। जहाँ तक मुझे याद है, पिछले तीन-चार सालों में नेपाल को बार-बार किसी न किसी आपदा का सामना करना पड़ा है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत के साथ-साथ अन्य देशों को भी मिलकर नेपाल की सुरक्षा के लिए काम करना चाहिए और अगले 20 से 25 वर्षों की योजना बनाकर वहाँ की आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।

रांची में भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड के लापता मज़दूरों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा, 'ज़रा सोचिए, अगर कोई रोज़ाना मज़दूरी करने के लिए 1,500 किलोमीटर दूर जाता है, तो यह उनकी गरीबी का स्तर दिखाता है। झारखंड के ये दो लापता मज़दूर रोज़गार की तलाश में मौत के मुंह में चले गए।'

विपक्ष की माँग

रांची में कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने भारत सरकार से अपील की कि वह लापता भारतीय नागरिकों का पता लगाने के लिए तेज़ी से कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर 'पूरी गंभीरता' से काम करना चाहिए।

लखनऊ में कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने इस आपदा को 'दुनिया की सबसे भयानक मानवीय त्रासदियों में से एक' करार दिया। उन्होंने माँग की कि नेपाल को बिना किसी शर्त के मानवीय सहायता दी जाए — चाहे वह खाना-पानी हो, खोज-बचाव अभियान हो, भारी उपकरण हों या तंबू और अन्य आवश्यक सामग्री।

आम जनता और प्रवासी मज़दूरों पर असर

इस त्रासदी ने एक बड़ी सामाजिक-आर्थिक सच्चाई को भी उजागर किया है — भारत के गरीब राज्यों के हज़ारों प्रवासी मज़दूर रोज़गार की तलाश में नेपाल तक जाते हैं। झारखंड के लापता मज़दूरों का मामला इसी वास्तविकता का प्रतिबिंब है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे प्रवासी मज़दूर किसी भी आपदा में सबसे अधिक असुरक्षित होते हैं क्योंकि उनके पास न पर्याप्त दस्तावेज़ होते हैं और न ही उन्हें सरकारी सहायता आसानी से मिल पाती है।

क्या होगा आगे

भारत सरकार पहले से ही नेपाल को राहत सामग्री भेज रही है। बिहार के मंत्री अशोक कुमार चौधरी समेत कई नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय — विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र और अन्य देशों — से समन्वित प्रयास करने की अपील की है। नेपाल का सीमित राजस्व आधार और छोटे आकार को देखते हुए, दीर्घकालिक पुनर्निर्माण के लिए बाहरी सहायता अपरिहार्य मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 किलोमीटर दूर मज़दूरी के लिए जाना और फिर बाढ़ में लापता हो जाना, उस व्यवस्थागत विफलता को उजागर करता है जहाँ प्रवासी मज़दूरों का कोई ट्रैकिंग तंत्र नहीं है। भारत की राहत सहायता सराहनीय है, लेकिन नेताओं की 'अंतरराष्ट्रीय सहयोग' की अपील तब तक खोखली रहेगी जब तक भारत खुद द्विपक्षीय आपदा-प्रबंधन ढाँचे में ठोस निवेश नहीं करता। नेपाल पिछले चार वर्षों में बार-बार आपदाओं से जूझ रहा है — यह पैटर्न अब 'अप्रत्याशित' नहीं, बल्कि पूर्वानुमेय है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल बाढ़ में अब तक कितने लोगों की मौत हुई है और कितने लापता हैं?
रिपोर्टों के अनुसार नेपाल बाढ़ में अब तक 600 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं और 2,400 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। यह संख्या बचाव अभियान जारी रहने के साथ बदल सकती है।
क्या नेपाल बाढ़ में कोई भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं?
हाँ, झारखंड के दो प्रवासी मज़दूर नेपाल में लापता बताए जा रहे हैं, जो रोज़गार की तलाश में करीब 1,500 किलोमीटर दूर नेपाल गए थे। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि यह संख्या बढ़ सकती है।
भारत सरकार नेपाल को क्या मदद दे रही है?
भारत सरकार नेपाल को राहत सामग्री भेज रही है। विभिन्न नेताओं ने इस सहायता का स्वागत किया है और कहा है कि भविष्य में भी हर संभव सहयोग जारी रहेगा। कांग्रेस ने सरकार से लापता भारतीय नागरिकों की खोज में तेज़ी लाने की अपील भी की है।
नेपाल में बाढ़ की समस्या इतनी गंभीर क्यों है?
बिहार के मंत्री अशोक कुमार चौधरी के अनुसार नेपाल पिछले तीन-चार वर्षों में बार-बार प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहा है। नेपाल का राजस्व आधार सीमित है और वह भूकंप व बाढ़ के लिहाज़ से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है, जिससे आपदा प्रबंधन की क्षमता कमज़ोर रहती है।
नेपाल की मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या अपील की गई है?
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने माँग की है कि नेपाल को बिना किसी शर्त के मानवीय सहायता दी जाए — जिसमें खाना-पानी, खोज-बचाव दल, भारी उपकरण और तंबू शामिल हों। बिहार मंत्री ने भी अन्य देशों से मिलकर नेपाल की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए काम करने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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