नेपाल बाढ़ में 359 मौतें, भारत ने भेजी राहत; राम माधव बोले — 'हर मुश्किल में साथ'
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल में 27 अगस्त 2026 को अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे देश में भारी तबाही मचाई है। नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक 359 शव अलग-अलग जिलों से बरामद किए जा चुके हैं। इस प्राकृतिक आपदा के बीच भारत ने तत्काल राहत सामग्री नेपाल रवाना की और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव ने स्पष्ट किया कि भारत हर संकट में अपने पड़ोसी के साथ खड़ा रहेगा।
मुख्य घटनाक्रम
नेपाल पुलिस के आँकड़ों के अनुसार बाढ़ से मरने वालों की संख्या 359 तक पहुँच गई है और बचाव अभियान अभी भी जारी है। गुरुवार को एक राहत भरी खबर यह आई कि 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया। विदेश मंत्रालय ने इन सभी के नाम जारी करते हुए बताया कि ये सभी तमिलनाडु के निवासी थे और कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल गए थे।
भारत की त्वरित राहत कार्रवाई
राम माधव ने काठमांडू में एक कार्यक्रम में बताया कि बुधवार को उनकी फ्लाइट के तुरंत बाद एक अन्य विमान भारत से राहत और बचाव सामग्री लेकर नेपाल पहुँचा, और गुरुवार को दूसरा विमान भी राहत सामग्री लेकर पहुँचा। उन्होंने कहा, 'भारत के 140 करोड़ लोग इस संकट की घड़ी में नेपाल के साथ खड़े हैं।'
माधव ने 2015 के नेपाल भूकंप का स्मरण कराते हुए कहा, 'दुख की बात है कि नेपाल ऐसी त्रासदियों का दंश झेलता रहा है। 2015 में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। आप याद रखिएगा कि हर मुश्किल समय में भारत आपके साथ खड़ा रहेगा।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-नेपाल संबंधों में कूटनीतिक उतार-चढ़ाव के बावजूद दोनों देशों के बीच मानवीय सहयोग अटूट रहा है।
भारत-नेपाल संबंध पर माधव का दृष्टिकोण
राम माधव ने भारत-नेपाल रिश्ते को परिभाषित करते हुए कहा कि यह संबंध 'सरकारों के बीच का नहीं, बल्कि पीपुल टू पीपुल का है।' उन्होंने इस जन-से-जन के जुड़ाव को दोनों देशों की साझा संस्कृति, भाषा और इतिहास की बुनियाद पर टिका बताया। गौरतलब है कि दोनों देशों की खुली सीमा और सांस्कृतिक सामीप्य आपदाओं के समय इस सहयोग को और भी स्वाभाविक बनाती है।
नई झील टूटने का खतरा
इस बीच एक और गंभीर चेतावनी सामने आई है। चीनी अधिकारियों के अनुसार नेपाल में छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास एक बड़ी बैरियर झील बन गई है जो पहले से ही ओवरफ्लो हो रही है। रिपोर्टों के अनुसार गुरुवार सुबह तक झील का जलस्तर लगभग 20 लाख क्यूबिक मीटर था। अगले तीन दिनों में इसमें 30 लाख क्यूबिक मीटर अतिरिक्त पानी आने की आशंका है, जिससे झील के टूटने का खतरा और बढ़ गया है।
चीनी अधिकारी स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं और बाढ़ सिमुलेशन तकनीक के ज़रिये संभावित नतीजों का आकलन कर आपातकालीन बचाव कार्यों की तैयारी में जुटे हैं।
आगे क्या
बचाव दल अभी भी कई जिलों में सक्रिय हैं और मृतकों की संख्या में और वृद्धि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि बैरियर झील टूटती है, तो निचले इलाकों में रहने वाली आबादी पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है। भारत की ओर से राहत अभियान जारी है और आने वाले दिनों में और सहायता भेजे जाने की संभावना है।