नेपाल बाढ़ त्रासदी: भारतीय नेताओं ने जताया शोक, कई भारतीय नागरिक फंसे; केंद्र-राज्य सरकारें अलर्ट पर
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल में 27 अगस्त 2026 को अचानक आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें कई भारतीय नागरिकों के फंसे होने की खबर है। इस आपदा की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारें हाई अलर्ट पर आ गई हैं। देशभर के नेताओं ने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया है।
नेताओं की संवेदनाएं और प्रतिक्रियाएं
कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी ने कहा, 'यह बहुत दुखद खबर है। हमारी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। उनमें से कई भारतीय नागरिक हैं और सभी लोग कैलाश की यात्रा पर जा रहे थे। यह बहुत दुखद और परेशान करने वाली खबर है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि जो लोग अभी भी लापता हैं, वे जीवित और सुरक्षित मिल जाएं।'
राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा, 'इस त्रासदी से भारी नुकसान हुआ है और कई लोगों की जान चली गई है। पीड़ित परिवारों को राहत और सहायता प्रदान करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।'
उत्तर प्रदेश सरकार में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि भूकंप के कारण ग्लेशियरों को अचानक नुकसान पहुंचा है, जिसका असर नेपाल के साथ-साथ महाराजगंज से सटे सीमावर्ती इलाकों पर बड़े पैमाने पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री ने तुरंत मदद का भरोसा दिलाया है और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी सभी को सतर्क कर दिया है। यह एक प्राकृतिक आपदा है, जो किसी के नियंत्रण में नहीं थी, लेकिन अब बचाव और राहत कार्य ही एकमात्र विकल्प है।'
आपदा की भयावहता: गांव के गांव बह गए
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने स्थिति को अत्यंत भयावह बताया। उन्होंने कहा, 'नेपाल से आ रही खबरें, वीडियो और जानकारी बहुत भयावह हैं। जिस तरह से भूस्खलन हुआ और प्राकृतिक आपदा आई, उसमें पूरे के पूरे गांव बह गए। जो बाजार कभी चहल-पहल से भरे रहते थे, वे अब पूरी तरह से कब्रिस्तान में बदल गए हैं। इलाके का पूरा बुनियादी ढांचा तबाह हो गया है और कई बांधों को भी नुकसान पहुंचा है।'
गौरतलब है कि नेपाल और उत्तर भारत के सीमावर्ती क्षेत्र हर मानसून सत्र में बाढ़ और भूस्खलन की मार झेलते हैं, लेकिन इस बार की तबाही को अब तक की सबसे गंभीर घटनाओं में से एक बताया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब कैलाश मानसरोवर यात्रा के कई श्रद्धालु इस मार्ग पर थे।
DMK की प्रतिक्रिया और व्यापक राजनीतिक एकजुटता
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के प्रवक्ता टी. के. एस. एलंगोवन ने कहा, 'यह स्वाभाविक रूप से एक प्राकृतिक आपदा है। इसे कोई रोक नहीं सकता, लेकिन हमें उन लोगों के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए, जो इस आपदा की चपेट में आ गए हैं।' उल्लेखनीय है कि इस बार विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों ने एकजुट होकर मदद का संदेश दिया है — जो किसी बड़ी सीमापार आपदा के समय भारतीय राजनीति की सामान्य प्रतिक्रिया रही है।
सीमावर्ती क्षेत्रों पर असर और राहत की स्थिति
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जैसे नेपाल-सीमावर्ती जिलों को विशेष रूप से सतर्क किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, ग्लेशियरों को पहुंचे नुकसान के चलते नदियों में जलस्तर तेज़ी से बढ़ा, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है। बचाव और राहत दल तैनात किए गए हैं, हालांकि क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण राहत पहुंचाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
आगे की स्थिति
केंद्र सरकार की ओर से नेपाल को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया गया है। लापता भारतीय नागरिकों की तलाश जारी है और विदेश मंत्रालय स्थिति पर नज़र बनाए हुए है। आने वाले दिनों में राहत और बचाव कार्यों की गति पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।