ए. बालकृष्णन के निधन पर PM मोदी ने जताया गहरा दुख, विवेकानंद केंद्र अध्यक्ष ने पाँच दशक राष्ट्र सेवा को दिए
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अगस्त को विवेकानंद शिला स्मारक एवं विवेकानंद केंद्र के अखिल भारतीय अध्यक्ष रहे ए. बालकृष्णन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। मोदी ने कहा कि बालकृष्णन ने अपने जीवन के पाँच दशकों से अधिक स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और राष्ट्र सेवा को समर्पित किए। उनके निधन की खबर से देशभर में शोक की लहर है।
प्रधानमंत्री मोदी की श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ए. बालकृष्णन के साथ अपनी पुरानी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'विवेकानंद केंद्र के अध्यक्ष के रूप में सेवा करने वाले ए. बालकृष्णन जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने अपने जीवन के पाँच दशकों से अधिक स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और समाज सेवा में समर्पित किए।'
मोदी ने आगे कहा कि विवेकानंद केंद्र के प्रारंभिक जीवनव्रतियों में से एक के रूप में बालकृष्णन ने पूरे देश में अथक परिश्रम किया। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत से उनके गहरे जुड़ाव और शैक्षिक, सामाजिक तथा राष्ट्र निर्माण गतिविधियों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने विवेकानंद केंद्र परिवार और उनके प्रशंसकों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएँ व्यक्त कीं।
केंद्रीय मंत्री और राज्य नेताओं की प्रतिक्रिया
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए बालकृष्णन को श्रद्धांजलि दी। रिजिजू ने कहा कि बालकृष्णन की निःस्वार्थ सेवा, विशेषकर अरुणाचल प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान, राज्य के लोग और पूरा देश सदैव याद रखेगा। उन्होंने बालकृष्णन को 'एक सच्चे कर्मयोगी' की संज्ञा दी।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा कि बालकृष्णन ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को जीवनधर्म मानकर पाँच दशकों से अधिक समय तक राष्ट्रकार्य, समाज जागरण, शिक्षा और संगठन निर्माण में स्वयं को समर्पित रखा। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में उनके योगदान को राष्ट्रसेवा की एक प्रेरक परंपरा बताया।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बालकृष्णन को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने कन्याकुमारी के समुद्र तट से लेकर असम में ब्रह्मपुत्र के तट तक, देशभर में विवेकानंद केंद्रों को नई ऊर्जा से संचालित किया। सरमा ने उन्हें 'एक सच्चे राष्ट्रभक्त और जीवनव्रती कार्यकर्ता' कहा।
बालकृष्णन का जीवन और योगदान
ए. बालकृष्णन विवेकानंद केंद्र के प्रारंभिक जीवनव्रतियों में से एक थे और उन्होंने संगठन के अखिल भारतीय अध्यक्ष के रूप में लंबे समय तक सेवा की। उनका कार्यक्षेत्र विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत में शिक्षा, सामाजिक जागरण और राष्ट्र निर्माण तक फैला रहा। विवेकानंद केंद्र की स्थापना एकनाथ रानडे ने 1972 में की थी और बालकृष्णन इसके विस्तार में एक अहम स्तंभ रहे।
आगे की राह
बालकृष्णन के निधन से विवेकानंद केंद्र और उससे जुड़े लाखों कार्यकर्ताओं के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है। देशभर के नेताओं और सामाजिक संगठनों ने उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की है। विवेकानंद केंद्र परिवार अब उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए राष्ट्र सेवा के कार्य को आगे बढ़ाने का संकल्प लेगा।