27 अगस्त 2026
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ए. बालकृष्णन के निधन पर PM मोदी ने जताया गहरा दुख, विवेकानंद केंद्र अध्यक्ष ने पाँच दशक राष्ट्र सेवा को दिए

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ए. बालकृष्णन के निधन पर PM मोदी ने जताया गहरा दुख, विवेकानंद केंद्र अध्यक्ष ने पाँच दशक राष्ट्र सेवा को दिए

सारांश

विवेकानंद केंद्र के अखिल भारतीय अध्यक्ष ए. बालकृष्णन के निधन पर PM मोदी, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, दिल्ली CM रेखा गुप्ता और असम CM हिमंता बिस्वा सरमा ने गहरा शोक जताया। बालकृष्णन ने पाँच दशकों से अधिक राष्ट्र सेवा, शिक्षा और पूर्वोत्तर भारत के विकास को समर्पित किए।

मुख्य बातें

बालकृष्णन , विवेकानंद शिला स्मारक एवं विवेकानंद केंद्र के अखिल भारतीय अध्यक्ष, का निधन हो गया।
PM नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पुरानी तस्वीर साझा कर श्रद्धांजलि दी; बताया कि बालकृष्णन ने पाँच दशकों से अधिक राष्ट्र सेवा को समर्पित किए।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अरुणाचल प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।
दिल्ली CM रेखा गुप्ता और असम CM हिमंता बिस्वा सरमा ने उन्हें 'सच्चे कर्मयोगी और राष्ट्रभक्त' की संज्ञा दी।
बालकृष्णन का कार्यक्षेत्र कन्याकुमारी से पूर्वोत्तर भारत तक फैला था, जहाँ उन्होंने विवेकानंद केंद्रों को नई ऊर्जा दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अगस्त को विवेकानंद शिला स्मारक एवं विवेकानंद केंद्र के अखिल भारतीय अध्यक्ष रहे ए. बालकृष्णन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। मोदी ने कहा कि बालकृष्णन ने अपने जीवन के पाँच दशकों से अधिक स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और राष्ट्र सेवा को समर्पित किए। उनके निधन की खबर से देशभर में शोक की लहर है।

प्रधानमंत्री मोदी की श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ए. बालकृष्णन के साथ अपनी पुरानी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'विवेकानंद केंद्र के अध्यक्ष के रूप में सेवा करने वाले ए. बालकृष्णन जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने अपने जीवन के पाँच दशकों से अधिक स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और समाज सेवा में समर्पित किए।'

मोदी ने आगे कहा कि विवेकानंद केंद्र के प्रारंभिक जीवनव्रतियों में से एक के रूप में बालकृष्णन ने पूरे देश में अथक परिश्रम किया। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत से उनके गहरे जुड़ाव और शैक्षिक, सामाजिक तथा राष्ट्र निर्माण गतिविधियों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने विवेकानंद केंद्र परिवार और उनके प्रशंसकों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएँ व्यक्त कीं।

केंद्रीय मंत्री और राज्य नेताओं की प्रतिक्रिया

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए बालकृष्णन को श्रद्धांजलि दी। रिजिजू ने कहा कि बालकृष्णन की निःस्वार्थ सेवा, विशेषकर अरुणाचल प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान, राज्य के लोग और पूरा देश सदैव याद रखेगा। उन्होंने बालकृष्णन को 'एक सच्चे कर्मयोगी' की संज्ञा दी।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा कि बालकृष्णन ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को जीवनधर्म मानकर पाँच दशकों से अधिक समय तक राष्ट्रकार्य, समाज जागरण, शिक्षा और संगठन निर्माण में स्वयं को समर्पित रखा। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में उनके योगदान को राष्ट्रसेवा की एक प्रेरक परंपरा बताया।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बालकृष्णन को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने कन्याकुमारी के समुद्र तट से लेकर असम में ब्रह्मपुत्र के तट तक, देशभर में विवेकानंद केंद्रों को नई ऊर्जा से संचालित किया। सरमा ने उन्हें 'एक सच्चे राष्ट्रभक्त और जीवनव्रती कार्यकर्ता' कहा।

बालकृष्णन का जीवन और योगदान

ए. बालकृष्णन विवेकानंद केंद्र के प्रारंभिक जीवनव्रतियों में से एक थे और उन्होंने संगठन के अखिल भारतीय अध्यक्ष के रूप में लंबे समय तक सेवा की। उनका कार्यक्षेत्र विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत में शिक्षा, सामाजिक जागरण और राष्ट्र निर्माण तक फैला रहा। विवेकानंद केंद्र की स्थापना एकनाथ रानडे ने 1972 में की थी और बालकृष्णन इसके विस्तार में एक अहम स्तंभ रहे।

आगे की राह

बालकृष्णन के निधन से विवेकानंद केंद्र और उससे जुड़े लाखों कार्यकर्ताओं के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है। देशभर के नेताओं और सामाजिक संगठनों ने उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की है। विवेकानंद केंद्र परिवार अब उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए राष्ट्र सेवा के कार्य को आगे बढ़ाने का संकल्प लेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसने संस्थागत ढाँचे या सरकारी पद की परवाह किए बिना दशकों तक ज़मीनी स्तर पर काम किया। विवेकानंद केंद्र का पूर्वोत्तर में शैक्षिक विस्तार उस क्षेत्र में हुआ जहाँ राज्य की पहुँच अक्सर सीमित रही — यह उनकी सेवा की असली कसौटी है। राजनीतिक नेताओं की श्रद्धांजलियाँ स्वाभाविक हैं, लेकिन असली विरासत इस बात में है कि विवेकानंद केंद्र उनके बाद अपने संस्थापक मूल्यों को किस हद तक बनाए रख पाता है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ए. बालकृष्णन कौन थे?
ए. बालकृष्णन विवेकानंद शिला स्मारक एवं विवेकानंद केंद्र के अखिल भारतीय अध्यक्ष थे। वे संगठन के प्रारंभिक जीवनव्रतियों में से एक थे और उन्होंने पाँच दशकों से अधिक समय तक स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और राष्ट्र सेवा को समर्पित किया।
PM मोदी ने बालकृष्णन के निधन पर क्या कहा?
PM मोदी ने एक्स पर बालकृष्णन के साथ अपनी पुरानी तस्वीर साझा करते हुए कहा कि उनके निधन से अत्यंत दुख हुआ है। मोदी ने उनके पूर्वोत्तर भारत से विशेष जुड़ाव और शैक्षिक, सामाजिक तथा राष्ट्र निर्माण गतिविधियों में उनकी भूमिका को याद किया।
पूर्वोत्तर भारत में बालकृष्णन का क्या योगदान था?
बालकृष्णन ने पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर अरुणाचल प्रदेश और असम में, शिक्षा और सामाजिक जागरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया। असम CM हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार, उन्होंने कन्याकुमारी से ब्रह्मपुत्र तट तक विवेकानंद केंद्रों को नई ऊर्जा से संचालित किया।
विवेकानंद केंद्र क्या है?
विवेकानंद केंद्र एक राष्ट्रीय सेवा संगठन है जिसकी स्थापना 1972 में एकनाथ रानडे ने की थी। यह संगठन स्वामी विवेकानंद के आदर्शों पर आधारित शिक्षा, सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण के कार्य करता है, और इसका विस्तार पूरे भारत में है।
बालकृष्णन के निधन पर किन-किन नेताओं ने शोक जताया?
PM नरेंद्र मोदी, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बालकृष्णन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। सभी नेताओं ने उन्हें एक सच्चे कर्मयोगी और राष्ट्रभक्त के रूप में याद किया।
राष्ट्र प्रेस
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