विवेक स्मारक उद्घाटन: मोदी बोले — स्वामी विवेकानंद शिक्षा के साथ समानता को भी राष्ट्र उत्थान का आधार मानते थे
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अगस्त 2026 को मैसूरु में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र 'विवेक स्मारक' का उद्घाटन किया और कहा कि स्वामी विवेकानंद राष्ट्र उत्थान के लिए शिक्षा के साथ-साथ समानता को भी उतना ही अनिवार्य मानते थे। उन्होंने इस अवसर पर युवाओं को राष्ट्र-सेवा के लिए प्रेरित करते हुए रामकृष्ण आश्रम की विरासत की सराहना की।
मैसूरु और स्वामी विवेकानंद का ऐतिहासिक संबंध
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लगभग 130 वर्ष पूर्व स्वामी विवेकानंद एक युवा संन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए मैसूरु आए थे। उन्होंने कहा, 'जो साधक को तपस्या में पहचानता है, वो उसकी सिद्धि का सहभागी भी होता है।' मोदी ने रेखांकित किया कि जब स्वामी विवेकानंद अमेरिका में थे, तब उन्होंने मैसूरु के महाराजा को पत्र लिखकर उनके सहयोग का उल्लेख किया था — जो इस नगर और स्वामी जी के बीच के गहरे रिश्ते का प्रमाण है।
शिक्षा और समानता: विवेकानंद की दोहरी दृष्टि
मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने देखा था कि दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित कर रहे थे, लेकिन तब भारत गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा था। उन्होंने जोर दिया कि विवेकानंद की दृष्टि में शिक्षा में भेदभाव और अवसरों में असमानता दोनों राष्ट्र-निर्माण की राह में बाधा हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यही विजन देश की नीति का आधार बन चुका है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) भारत के युवाओं को 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार कर रही है।
युवाशक्ति और भारत की उपलब्धियाँ
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है और दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता देश बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत में विकसित डिजिटल समाधान दुनिया के अनेक देशों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं और देश सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की नई यात्रा पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जो युवा कभी गुलामी की जंजीरों में था, आज वह दुनिया के विकास को गति दे रहा है।
रामकृष्ण आश्रम की भूमिका और विवेक स्मारक का महत्त्व
मोदी ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्यों के ज़रिये रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद की विरासत को जीवंत रखा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विवेक स्मारक साधकों और श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक उत्थान का तीर्थ बनेगा। स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा 'शिव ज्ञाने, जीव सेवा' — अर्थात प्रत्येक जीव की सेवा ही शिव की सेवा है — का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस स्मारक में ऐसे युवाओं को गढ़ना है जिनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि हो और मातृभूमि की सेवा ही जीवन का लक्ष्य हो।
खेल और अनुशासन: युवाशक्ति के तीन स्तंभ
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि युवाशक्ति का स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे रहना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि जो देश खेलों को महत्व देते हैं, वहाँ के युवाओं में ये तीनों गुण तेज़ी से विकसित होते हैं, इसलिए आज खेलों को राष्ट्र-निर्माण की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जा रहा है। विवेक स्मारक के उद्घाटन के साथ मैसूरु एक बार फिर स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा का जीवंत केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है।