PM मोदी 1 अगस्त को मैसूर में विवेकानंद स्मारक का उद्घाटन करेंगे, युवाओं को संबोधित करेंगे
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 अगस्त 2026 को मैसूर के रामकृष्ण आश्रम में नवनिर्मित विवेकानंद स्मारक का उद्घाटन करेंगे। रामकृष्ण आश्रम के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिदानंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कार्यक्रम की सभी तैयारियाँ अंतिम चरण में पहुँच चुकी हैं और 6,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना है।
कार्यक्रम का विस्तृत कार्यक्रम
प्रधानमंत्री मोदी दोपहर 3:30 बजे मैसूर पहुँचेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, राज्यपाल और अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रहेगी। पहुँचने पर प्रधानमंत्री स्मारक परिसर स्थित शिव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना करेंगे और अपने हाथों से बेलपत्र का पौधा रोपेंगे।
इसके बाद वे उस कक्ष में जाएँगे जहाँ स्वामी विवेकानंद वर्ष 1892 में मैसूर प्रवास के दौरान ठहरे थे — यह स्मारक उसी ऐतिहासिक स्थल पर बनाया गया है। वहाँ विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी और समय मिलने पर प्रधानमंत्री कुछ क्षण ध्यान भी कर सकते हैं।
उद्घाटन और डॉक्यूमेंट्री
औपचारिक उद्घाटन फीता काटकर किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री विद्यालय की तीसरी मंजिल पर विवेकानंद स्मारक पर आधारित एक लघु डॉक्यूमेंट्री देखेंगे। तत्पश्चात वे रामकृष्ण आश्रम पहुँचेंगे जहाँ आश्रम के 100 वर्षों की यात्रा पर आधारित एक और डॉक्यूमेंट्री का अवलोकन होगा।
युवाओं को संबोधन
रामकृष्ण चिकित्सालय स्टेडियम में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री लगभग 30 मिनट तक युवाओं को संबोधित करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं और युवा-शक्ति को लेकर राष्ट्रीय विमर्श तेज़ हो रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रवेश नियम
सुरक्षा कारणों से आम जनता को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। केवल स्थानीय निवासियों, युवाओं और आमंत्रित अतिथियों के लिए पास की व्यवस्था की गई है। स्वामी मुक्तिदानंद ने सभी उपस्थित लोगों से अनुरोध किया है कि वे कम से कम दो घंटे पहले पहुँचें और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करें।
विशेष भेंट और सम्मान
रामकृष्ण आश्रम की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा निर्मित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की जाएगी। साथ ही उन्हें मैसूर की विशेष पारंपरिक भेंट देकर सम्मानित किया जाएगा। यह आयोजन मैसूर और रामकृष्ण मिशन के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगा।