मैसूरु में विवेक स्मारक उद्घाटन: स्वामी त्यागिश्वरानंद बोले — 'युवा भारत का भविष्य, यह केंद्र देगा मार्गदर्शन'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मैसूरु दौरे से पहले, दावणगेरे स्थित रामकृष्ण आश्रम के सचिव स्वामी त्यागिश्वरानंद ने कहा कि स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र 'विवेक स्मारक' देश के युवाओं को दिशा और प्रेरणा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री की शिक्षा, संस्कृति और सनातन धर्म की विरासत को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता की सराहना की।
विवेक स्मारक का उद्घाटन और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैसूरु के ऐतिहासिक निरंजन मठ में स्थापित स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र 'विवेक स्मारक' का उद्घाटन किया। यह स्मारक नवंबर 1892 में स्वामी विवेकानंद की मैसूरु यात्रा की स्मृति में बनाया गया है — वही यात्रा जो उनके राष्ट्रीय चिंतन और आध्यात्मिक दृष्टि को आकार देने में मील का पत्थर मानी जाती है।
स्वामी त्यागिश्वरानंद के विचार
उद्घाटन से पूर्व स्वामी त्यागिश्वरानंद ने कहा, 'विवेक स्मारक का मुख्य उद्देश्य युवाओं को शिक्षित और प्रेरित करना है। हम जो भी करते हैं, वह हमारे मूल सिद्धांतों और हमारे आदर्श वाक्य से प्रेरित होता है। आज की युवा पीढ़ी भारत का भविष्य है और हमारी भूमिका उन्हें प्रेरित और मार्गदर्शन करना है। हमारा लक्ष्य 'आत्मनो मोक्षार्थं जगद्धिताय च' के आदर्श के माध्यम से अज्ञानता को दूर करना है, यानी दुनिया के कल्याण के लिए काम करते हुए अपनी आध्यात्मिक उन्नति करना।'
उन्होंने स्वामी विवेकानंद को देश का सच्चा 'यूथ आइकॉन' बताते हुए कहा कि स्वामीजी हमेशा युवाओं में जोश भरने के लिए प्रेरणादायक भाषा का उपयोग करते थे और उन्हें याद दिलाते थे कि 'हर आत्मा में दिव्यता छिपी होती है।' उनके अनुसार, यदि भीतर की दिव्यता जाग जाए, तो व्यक्ति अपने हर लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी की सराहना
स्वामी त्यागिश्वरानंद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा में सुधार, सीखने के अवसरों का विस्तार, भारतीय संस्कृति को प्रोत्साहन और सनातन धर्म की विरासत को मजबूत करने जैसे बुनियादी लक्ष्यों पर निरंतर ध्यान केंद्रित किया है।
विवेक स्मारक की सुविधाएँ और विस्तार
81,000 वर्ग फुट से अधिक क्षेत्रफल में फैले इस केंद्र में एक मुख्य भवन और एक संलग्न ब्लॉक है। इसमें 4-डी अनुभव केंद्र, प्रदर्शनी हॉल, लगभग 700 लोगों की क्षमता वाला एम्फीथिएटर, कक्षाएं, सम्मेलन कक्ष, पुस्तकालय, वाचनालय, ध्यान एवं योग कक्ष और पुस्तक स्टॉल शामिल हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भी विशेष सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।
युवाओं पर अपेक्षित प्रभाव
यह सांस्कृतिक युवा केंद्र मूल्य-आधारित शिक्षा, नेतृत्व विकास और व्यक्तित्व निर्माण का केंद्र बनने का लक्ष्य रखता है। व्याख्यानों, कार्यशालाओं, अल्पकालिक पाठ्यक्रमों और क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से यह केंद्र आसपास के शिक्षण संस्थानों के 10,000 से अधिक छात्रों के साथ-साथ शहरी और ग्रामीण युवाओं को लाभान्वित करेगा। स्वामी विवेकानंद के राष्ट्र निर्माण और चरित्र विकास के दर्शन से प्रेरित यह पहल भविष्य में कर्नाटक के युवा विमर्श को नई दिशा दे सकती है।