27 अगस्त 2026
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ओंकारेश्वर में एकात्म धाम के पंचायतन मंदिर का शिलान्यास, संतों ने बताया भारतीय आध्यात्म का नया केंद्र

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ओंकारेश्वर में एकात्म धाम के पंचायतन मंदिर का शिलान्यास, संतों ने बताया भारतीय आध्यात्म का नया केंद्र

सारांश

ओंकारेश्वर में एकात्म धाम प्रकल्प का अगला चरण शुरू — पंचायतन मंदिर का शिलान्यास हुआ, जो शिव को केंद्र में रखकर शक्ति, गणेश, सूर्य और विष्णु की एकीकृत उपासना का केंद्र बनेगा। अयोध्या राम मंदिर जैसे बलुआ पत्थर से बनने वाला यह मंदिर ढाई से तीन वर्षों में पूर्ण होगा।

मुख्य बातें

27 अगस्त 2026 को ओंकारेश्वर स्थित एकात्म धाम में पंचायतन मंदिर का शिलान्यास और शिला पूजन संपन्न हुआ।
यह शिव पंचायतन मंदिर होगा — केंद्र में भगवान शिव , चारों कोनों में शक्ति, गणेश, सूर्य और विष्णु के विग्रह।
मंदिर निर्माण में अयोध्या राम मंदिर जैसा बलुआ पत्थर उपयोग किया जाएगा।
पूर्ण प्रकल्प के लिए ढाई से तीन वर्ष का समय लगने का अनुमान है।
जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर विवेकानंद पुरी महाराज और स्वामी भूमनंद सरस्वती ने इसे आदि शंकराचार्य की एकात्मता परंपरा का आधुनिक विस्तार बताया।

मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर स्थित एकात्म धाम प्रकल्प में 27 अगस्त 2026 को पंचायतन मंदिर का शिलान्यास और शिला पूजन संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री द्वारा किए गए इस शिलान्यास के अवसर पर उपस्थित संतों ने इसे भारतीय धर्म, दर्शन और आध्यात्मिक परंपरा के विस्तार की दिशा में एक ऐतिहासिक पड़ाव बताया।

संतों की प्रतिक्रिया और धार्मिक महत्व

श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर विवेकानंद पुरी महाराज ने कहा कि संतों के चरण जहाँ पड़ते हैं, वह स्थान तीर्थ बन जाता है। उन्होंने स्मरण कराया कि ओंकारेश्वर भगवान आद्य गुरु शंकराचार्य की दीक्षा भूमि है, जहाँ पहले भूमि पूजन और तत्पश्चात आदि शंकराचार्य की मूर्ति की स्थापना भी हो चुकी है। उनके अनुसार, पंचायतन मंदिर के शिला पूजन के साथ इस प्रकल्प का अगला महत्वपूर्ण चरण पूर्ण हुआ है।

विवेकानंद पुरी महाराज ने यह भी कहा कि ओंकार पर्वत पर गौरी सोमनाथ और चौरासी खंभे जैसे प्राचीन धार्मिक स्थल पहले से विद्यमान हैं। उन्होंने इस प्रकल्प को केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि ऐसा केंद्र बताया जो भविष्य में पूरे विश्व को भारतीय आध्यात्मिक दर्शन और 'सबको साथ लेकर चलने' के सिद्धांत का मार्गदर्शन करेगा।

पंचायतन मंदिर की संकल्पना और संरचना

एकात्म धाम ओंकारेश्वर के आवासीय आचार्य स्वामी भूमनंद सरस्वती ने बताया कि यह मंदिर पंचमहाभूतों और पंचदेव उपासना की अवधारणा को समर्पित होगा। उनके अनुसार, पंचमहाभूतों से ही समस्त सृष्टि की रचना मानी गई है और पंचदेव उपासना के माध्यम से भगवान के विराट स्वरूप की आराधना की जाएगी।

स्वामी भूमनंद सरस्वती ने स्पष्ट किया कि यह एक शिव पंचायतन मंदिर होगा, जिसके मध्य में भगवान शिव मुख्य विग्रह के रूप में विराजमान होंगे। चारों दिशाओं और कोनों में शक्ति, गणेश, सूर्य और विष्णु के मंदिर स्थापित किए जाएँगे। इस प्रकार यह मंदिर विभिन्न उपासना परंपराओं के समन्वय और सम्मान का जीवंत संदेश बनेगा।

निर्माण सामग्री और समयसीमा

स्वामी भूमनंद सरस्वती ने बताया कि पंचायतन मंदिर का निर्माण उसी बलुआ पत्थर से किया जाएगा, जिसका उपयोग अयोध्या के राम मंदिर निर्माण में हुआ है। मंदिर का मुख्य ढाँचा अपेक्षाकृत शीघ्र तैयार हो सकता है, किंतु संपूर्ण प्रकल्प को पूर्ण होने में ढाई से तीन वर्ष का समय लगने का अनुमान है।

आदि शंकराचार्य की परंपरा और एकात्मता का संदेश

संतों ने इस अवसर पर स्मरण कराया कि आदि शंकराचार्य ने अपने समय में विभिन्न संप्रदायों और उपासना पद्धतियों को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास किया था। पंचायतन मंदिर उसी समन्वय और एकात्मता की भावना को आधुनिक काल में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण केंद्र बनने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में आध्यात्मिक पर्यटन और धार्मिक अवसंरचना में निवेश तेज़ी से बढ़ रहा है।

गौरतलब है कि ओंकारेश्वर पहले से ही 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक के रूप में देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में गिना जाता है। एकात्म धाम प्रकल्प इस क्षेत्र को एक व्यापक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में अगला कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक नियोजित आध्यात्मिक-सांस्कृतिक परिसर के रूप में स्थापित करने की महत्वाकांक्षी कोशिश है — और पंचायतन मंदिर इसका वैचारिक केंद्रबिंदु है। अयोध्या राम मंदिर के बलुआ पत्थर का चयन प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, जो इस प्रकल्प को समकालीन धार्मिक पुनरुत्थान की व्यापक धारा से जोड़ता है। हालाँकि, आदि शंकराचार्य की 'समन्वय' परंपरा को राजकीय संरक्षण में पुनर्जीवित करने के प्रयास पर यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या यह वैचारिक एकात्मता वास्तव में सर्वसमावेशी होगी या केवल प्रतीकात्मक। ढाई से तीन वर्ष की समयसीमा और क्रियान्वयन की पारदर्शिता ही इस प्रकल्प की विश्वसनीयता की असली कसौटी बनेगी।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकात्म धाम का पंचायतन मंदिर क्या है?
यह मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर स्थित एकात्म धाम प्रकल्प के अंतर्गत निर्मित होने वाला शिव पंचायतन मंदिर है, जिसमें केंद्र में भगवान शिव और चारों दिशाओं में शक्ति, गणेश, सूर्य व विष्णु के विग्रह स्थापित होंगे। यह पंचमहाभूतों और पंचदेव उपासना की अवधारणा पर आधारित है।
पंचायतन मंदिर का निर्माण कब तक पूरा होगा?
स्वामी भूमनंद सरस्वती के अनुसार, संपूर्ण प्रकल्प को पूरा होने में ढाई से तीन वर्ष का समय लगने का अनुमान है। मंदिर का मुख्य ढाँचा इससे पहले तैयार हो सकता है।
पंचायतन मंदिर में किस पत्थर का उपयोग होगा?
मंदिर निर्माण में उसी बलुआ पत्थर का उपयोग किया जाएगा जो अयोध्या के राम मंदिर निर्माण में प्रयुक्त हुआ है। यह जानकारी एकात्म धाम के आवासीय आचार्य स्वामी भूमनंद सरस्वती ने दी।
एकात्म धाम प्रकल्प का आदि शंकराचार्य से क्या संबंध है?
ओंकारेश्वर आदि गुरु शंकराचार्य की दीक्षा भूमि मानी जाती है। एकात्म धाम प्रकल्प के अंतर्गत यहाँ पहले आदि शंकराचार्य की मूर्ति की स्थापना हो चुकी है और पंचायतन मंदिर उनकी समन्वय परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
पंचायतन मंदिर में किन देवताओं की उपासना होगी?
इस शिव पंचायतन मंदिर में मध्य में भगवान शिव मुख्य विग्रह होंगे, जबकि चारों कोनों पर शक्ति, गणेश, सूर्य और विष्णु के मंदिर होंगे। इस प्रकार यह विभिन्न उपासना परंपराओं के समन्वय का केंद्र बनेगा।
राष्ट्र प्रेस
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