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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ओंकारेश्वर में 'एकात्म पर्व' की शुरुआत करेंगे

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ओंकारेश्वर में 'एकात्म पर्व' की शुरुआत करेंगे

सारांश

मध्य प्रदेश में ओंकारेश्वर में 'एकात्म पर्व' का उद्घाटन मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे। इस अनूठे उत्सव में संत और विद्वान एकत्रित होकर अध्यात्म और संस्कृति का संगम पेश करेंगे।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा 'एकात्म पर्व' का उद्घाटन।
देश-विदेश के संतों और विद्वानों का एकत्रित होना।
आध्यात्मिकता और संस्कृति का संगम।
विशेष कार्यक्रमों में अद्वैत दर्शन की चर्चा।
ओंकारेश्वर का धार्मिक महत्व।

भोपाल, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव शुक्रवार को खंडवा जिले के पवित्र स्थल ओंकारेश्वर में पांच दिवसीय 'एकात्म पर्व' का उद्घाटन करेंगे। इस 'एकता के उत्सव' में देश-विदेश से संत, विद्वान और कलाकार एक मंच पर एकत्रित होंगे, जिससे अध्यात्म, संस्कृति और विचारों का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

यह कार्यक्रम एकात्म धाम में मंधाता पहाड़ी पर आयोजित किया जा रहा है, जो आदि शंकराचार्य से संबंधित एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल है। वैशाख शुक्ल पंचमी के अवसर पर आयोजित इस पर्व का मुख्य उद्देश्य आध्यात्मिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से 'एकता' का संदेश फैलाना है।

उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री 'अद्वैत लोक' और 'अक्षर ब्रह्म' प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे और वैदिक अनुष्ठानों में भी शामिल होंगे। इस अवसर पर प्रमुख संत स्वामी सदानंद सरस्वती सहित कई आध्यात्मिक हस्तियां उपस्थित रहेंगी। निवेदिता भिड़े और स्वामी शारदानंद सरस्वती के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है।

इस पर्व का एक महत्वपूर्ण आकर्षण 'अद्वैतामृतम् - विमर्श सभा' होगा, जिसमें विद्वान और विशेषज्ञ आधुनिक समय में अद्वैत दर्शन की प्रासंगिकता पर चर्चा करेंगे। इन सत्रों में 'अद्वैत और जेन-जी', आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पर्यावरण संरक्षण, वैश्विक शांति और सिख धर्म के 'एक ओंकार' जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा।

हर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा। उद्घाटन के दिन शास्त्रीय गायक जयतीर्थ मेवुंडी और ओडिसी नृत्यांगना शुभदा वरदकर अपनी प्रस्तुतियां देंगी। आने वाले दिनों में भरतनाट्यम, कर्नाटक संगीत और निर्गुण वाणी के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

21 अप्रैल को इस पर्व का एक और विशेष क्षण होगा, जब भारत और विदेशों से आए 700 से अधिक युवा 'शंकरदूत' के रूप में शपथ लेंगे और आदि शंकराचार्य की शिक्षाओं को आगे बढ़ाने का संकल्प करेंगे।

ओंकारेश्वर का धार्मिक महत्व अत्यधिक है, क्योंकि यहां स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। नर्मदा नदी के बीच मंधाता द्वीप पर स्थित यह मंदिर हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, जिससे इस आयोजन की आध्यात्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है।

यह पर्व राज्य सरकार की एक पहल का हिस्सा है, जिसके तहत 'एकात्म धाम' को वैश्विक आध्यात्मिक अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। 'स्टैच्यू ऑफ वननेस' और प्रस्तावित 'अद्वैत लोक' संग्रहालय भी आने वाले समय में श्रद्धालुओं, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बनेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकात्म पर्व का उद्घाटन कब हो रहा है?
यह उद्घाटन 17 अप्रैल को किया जाएगा।
इस पर्व में कौन-कौन शामिल होंगे?
इस पर्व में देश-विदेश के संत, विद्वान और कलाकार शामिल होंगे।
इस पर्व का उद्देश्य क्या है?
इस पर्व का उद्देश्य आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से 'एकता' का संदेश फैलाना है।
ओंकारेश्वर का धार्मिक महत्व क्या है?
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
इस पर्व में कौन सी विशेष गतिविधियां होंगी?
इस पर्व में सांस्कृतिक कार्यक्रम, विमर्श सभाएं और आध्यात्मिक अनुष्ठान होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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