27 अगस्त 2026
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ओंकारेश्वर एकात्म धाम में पंचायतन मंदिर का शिलान्यास, CM मोहन यादव ने रखी आधारशिला

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ओंकारेश्वर एकात्म धाम में पंचायतन मंदिर का शिलान्यास, CM मोहन यादव ने रखी आधारशिला

सारांश

ओंकारेश्वर के एकात्म धाम में पंचायतन मंदिर की नींव रखी गई — आदि शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन को पत्थर में उकेरने का प्रयास। 80,000 घन फुट गुलाबी बलुआ पत्थर, 100 नक्काशीदार स्तंभ और 121 कलश — यह मंदिर आस्था और स्थापत्य का संगम बनेगा।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 27 अगस्त 2026 को ओंकारेश्वर एकात्म धाम में पंचायतन मंदिर की आधारशिला रखी।
मंदिर नागर शैली में बनेगा; लगभग 80,000 घन फुट गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग होगा।
मुख्य गर्भगृह में भगवान शिव ; चारों कोनों पर विष्णु, सूर्य, गणेश और शक्ति के सहायक गर्भगृह।
मंदिर में 100 नक्काशीदार स्तंभ , 26 फुट व्यास का गुंबद और 121 कलश होंगे।
संरचना 16 फुट ऊँचे जगती स्तंभ पर खड़ी होगी; सर्वतोभद्र शैली में चारों दिशाओं से प्रवेश।
वैदिक अनुष्ठान आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के प्रमुख पीठों के आचार्यों द्वारा संपन्न।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 27 अगस्त 2026 को ओंकारेश्वर स्थित एकात्म धाम में एक भव्य पंचायतन मंदिर की आधारशिला रखी। यह परियोजना आदि शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन और प्राचीन भारतीय स्थापत्य परंपराओं को एक साथ जीवंत करने का प्रयास है।

शिलान्यास समारोह का विवरण

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपनी पत्नी सीमा यादव के साथ इस ऐतिहासिक अवसर पर 45 पवित्र पत्थरों की विधिवत पूजा-अर्चना की। समारोह में संन्यास परंपरा के प्रतिनिधि, षड्दर्शन संत मंडल के संत और अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

वैदिक अनुष्ठान आंध्र प्रदेश के श्री वेंकटेश्वर वेद विज्ञान पीठम के प्रधान आचार्य तथा कर्नाटक के दक्षिणाम्नाय शारदा पीठम एवं श्री श्री गुरुकुल से जुड़े आचार्यों द्वारा वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराए गए।

पंचायतन पूजा का आध्यात्मिक महत्व

मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, 'पंचायतन पूजा आदि शंकराचार्य के उस दृष्टिकोण को दर्शाती है जिसमें पूजा की विभिन्न परंपराओं के बीच सामंजस्य स्थापित करने की बात कही गई थी। यह संदेश देती है कि पूजा के विभिन्न रूप अंततः एक ही सर्वोच्च वास्तविकता की ओर ले जाते हैं।'

गौरतलब है कि आदि शंकराचार्य द्वारा पुनर्जीवित की गई पंचायती व्यवस्था, शिव, विष्णु, सूर्य, गणेश और शक्ति को एक ही परम सत्ता के पाँच स्वरूपों के रूप में स्वीकार करती है। यह शैव, वैष्णव, शाक्त, सौर और गाणपत्य परंपराओं के बीच आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है।

मंदिर की स्थापत्य विशेषताएँ

यह मंदिर पारंपरिक नागर शैली में निर्मित होगा और इसमें लगभग 80,000 घन फुट गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग किया जाएगा। मुख्य गर्भगृह में भगवान शिव विराजमान होंगे, जबकि परिसर के चारों कोनों पर भगवान विष्णु, सूर्य, गणेश और देवी शक्ति को समर्पित चार सहायक गर्भगृह होंगे।

मुख्य गर्भगृह में सोमतिलक शैली का शिखर होगा, जबकि गर्भगृह सर्वतोभद्र शैली में बनाया जाएगा — जिसमें चारों दिशाओं से प्रवेश की व्यवस्था होगी। मंदिर में कलात्मक रूप से नक्काशीदार 100 स्तंभ, 8 संवर्ण संरचनाएँ और अलंकृत तोरणद्वार शामिल होंगे।

मुख्य मंडप में 26 फुट व्यास का एक विशाल गुंबद होगा। यह संपूर्ण संरचना 16 फुट ऊँचे जगती स्तंभ पर खड़ी होगी और 121 कलशों से सुशोभित होगी। बाहरी भाग में भद्र, कर्ण, प्रतिरथ और देवकोष्ठ जैसे पारंपरिक तत्त्व तथा सजावटी पैनल भी शामिल रहेंगे।

एकात्म धाम का व्यापक उद्देश्य

एकात्म धाम में विकसित किया जा रहा यह मंदिर परिसर केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि पारंपरिक भारतीय वास्तुकला और मूर्तिकला का एक जीवंत प्रदर्शन स्थल भी होगा। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश सरकार धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है।

मंदिर के पूर्ण होने के बाद यह परिसर देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आस्था एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभरने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि निर्माण समयसीमा और गुणवत्ता पर खरा उतरे — राज्य की कई बड़ी धार्मिक परियोजनाएँ अतीत में विलंब और लागत-वृद्धि का शिकार हो चुकी हैं। पंचायतन दर्शन की सार्वभौमिक अपील इस स्थल को वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कर सकती है, बशर्ते इसका प्रबंधन और संरक्षण दीर्घकालिक दृष्टि से हो।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओंकारेश्वर एकात्म धाम का पंचायतन मंदिर क्या है?
यह मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर स्थित एकात्म धाम में निर्मित होने वाला एक भव्य मंदिर परिसर है, जिसकी आधारशिला 27 अगस्त 2026 को रखी गई। इसमें केंद्रीय गर्भगृह में भगवान शिव और चारों कोनों पर विष्णु, सूर्य, गणेश व शक्ति के सहायक गर्भगृह होंगे, जो आदि शंकराचार्य की पंचायतन पूजा परंपरा को मूर्त रूप देते हैं।
पंचायतन पूजा का क्या अर्थ है और इसे किसने प्रचलित किया?
पंचायतन पूजा आदि शंकराचार्य द्वारा पुनर्जीवित की गई उपासना पद्धति है, जिसमें शिव, विष्णु, सूर्य, गणेश और शक्ति को एक ही परम सत्ता के पाँच स्वरूप माना जाता है। यह शैव, वैष्णव, शाक्त, सौर और गाणपत्य परंपराओं के बीच आध्यात्मिक सामंजस्य का संदेश देती है।
इस मंदिर की प्रमुख वास्तुकला विशेषताएँ क्या हैं?
मंदिर पारंपरिक नागर शैली में लगभग 80,000 घन फुट गुलाबी बलुआ पत्थर से बनेगा। इसमें 100 नक्काशीदार स्तंभ, 26 फुट व्यास का गुंबद, 121 कलश और 16 फुट ऊँचे जगती स्तंभ होंगे। गर्भगृह सर्वतोभद्र शैली में चारों दिशाओं से प्रवेश के साथ बनाया जाएगा।
शिलान्यास समारोह में कौन-कौन शामिल हुए?
समारोह में मुख्यमंत्री मोहन यादव अपनी पत्नी सीमा यादव के साथ उपस्थित रहे। आंध्र प्रदेश के श्री वेंकटेश्वर वेद विज्ञान पीठम के प्रधान आचार्य तथा कर्नाटक के दक्षिणाम्नाय शारदा पीठम व श्री श्री गुरुकुल के आचार्यों ने वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराए। षड्दर्शन संत मंडल के संत और अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे।
एकात्म धाम का व्यापक उद्देश्य क्या है?
एकात्म धाम को पूजा-अर्चना के केंद्र के साथ-साथ पारंपरिक भारतीय वास्तुकला और मूर्तिकला के प्रदर्शन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह परिसर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और आदि शंकराचार्य की विरासत को संरक्षित करने के मध्य प्रदेश सरकार के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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