ओंकारेश्वर एकात्म धाम में पंचायतन मंदिर का शिलान्यास, CM मोहन यादव ने रखी आधारशिला
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 27 अगस्त 2026 को ओंकारेश्वर स्थित एकात्म धाम में एक भव्य पंचायतन मंदिर की आधारशिला रखी। यह परियोजना आदि शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन और प्राचीन भारतीय स्थापत्य परंपराओं को एक साथ जीवंत करने का प्रयास है।
शिलान्यास समारोह का विवरण
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपनी पत्नी सीमा यादव के साथ इस ऐतिहासिक अवसर पर 45 पवित्र पत्थरों की विधिवत पूजा-अर्चना की। समारोह में संन्यास परंपरा के प्रतिनिधि, षड्दर्शन संत मंडल के संत और अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
वैदिक अनुष्ठान आंध्र प्रदेश के श्री वेंकटेश्वर वेद विज्ञान पीठम के प्रधान आचार्य तथा कर्नाटक के दक्षिणाम्नाय शारदा पीठम एवं श्री श्री गुरुकुल से जुड़े आचार्यों द्वारा वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराए गए।
पंचायतन पूजा का आध्यात्मिक महत्व
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, 'पंचायतन पूजा आदि शंकराचार्य के उस दृष्टिकोण को दर्शाती है जिसमें पूजा की विभिन्न परंपराओं के बीच सामंजस्य स्थापित करने की बात कही गई थी। यह संदेश देती है कि पूजा के विभिन्न रूप अंततः एक ही सर्वोच्च वास्तविकता की ओर ले जाते हैं।'
गौरतलब है कि आदि शंकराचार्य द्वारा पुनर्जीवित की गई पंचायती व्यवस्था, शिव, विष्णु, सूर्य, गणेश और शक्ति को एक ही परम सत्ता के पाँच स्वरूपों के रूप में स्वीकार करती है। यह शैव, वैष्णव, शाक्त, सौर और गाणपत्य परंपराओं के बीच आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है।
मंदिर की स्थापत्य विशेषताएँ
यह मंदिर पारंपरिक नागर शैली में निर्मित होगा और इसमें लगभग 80,000 घन फुट गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग किया जाएगा। मुख्य गर्भगृह में भगवान शिव विराजमान होंगे, जबकि परिसर के चारों कोनों पर भगवान विष्णु, सूर्य, गणेश और देवी शक्ति को समर्पित चार सहायक गर्भगृह होंगे।
मुख्य गर्भगृह में सोमतिलक शैली का शिखर होगा, जबकि गर्भगृह सर्वतोभद्र शैली में बनाया जाएगा — जिसमें चारों दिशाओं से प्रवेश की व्यवस्था होगी। मंदिर में कलात्मक रूप से नक्काशीदार 100 स्तंभ, 8 संवर्ण संरचनाएँ और अलंकृत तोरणद्वार शामिल होंगे।
मुख्य मंडप में 26 फुट व्यास का एक विशाल गुंबद होगा। यह संपूर्ण संरचना 16 फुट ऊँचे जगती स्तंभ पर खड़ी होगी और 121 कलशों से सुशोभित होगी। बाहरी भाग में भद्र, कर्ण, प्रतिरथ और देवकोष्ठ जैसे पारंपरिक तत्त्व तथा सजावटी पैनल भी शामिल रहेंगे।
एकात्म धाम का व्यापक उद्देश्य
एकात्म धाम में विकसित किया जा रहा यह मंदिर परिसर केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि पारंपरिक भारतीय वास्तुकला और मूर्तिकला का एक जीवंत प्रदर्शन स्थल भी होगा। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश सरकार धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है।
मंदिर के पूर्ण होने के बाद यह परिसर देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आस्था एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभरने की संभावना है।